आंसू कमजोरी नहीं! रोने से शरीर और मन को मिलते हैं ये हैरान करने वाले फायदे
तनाव के बीच क्यों हल्का महसूस होता है मन? जानिए रोने का शरीर, दिमाग और आंखों पर क्या असर पड़ता है
नई दिल्ली। किसी को रोते हुए देखकर अक्सर हम मान लेते हैं कि वह कमजोर है या अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पा रहा। बचपन से ही कई लोगों को 'रोओ मत, मजबूत बनो' जैसी बातें सुनने को मिलती हैं। हालांकि, भावनात्मक रूप से रोना हमेशा कमजोरी का संकेत नहीं होता। तनाव या परेशानी के दौरान रो लेने के बाद कई लोगों को मानसिक रूप से कुछ राहत महसूस होती है।
जब व्यक्ति बहुत ज्यादा तनाव में होता है, तो इसका असर शरीर पर भी दिखाई दे सकता है। दिल की धड़कन बढ़ना, बेचैनी और लगातार नकारात्मक विचार आते रहना इसका हिस्सा हो सकता है। ऐसे समय में रोना व्यक्ति को अपनी भावनाओं को बाहर व्यक्त करने का एक स्वाभाविक रास्ता दे सकता है।
तनाव के बाद शरीर को शांत करने में मदद कर सकता है रोना
तनाव के दौरान शरीर का स्ट्रेस सिस्टम सक्रिय हो जाता है। इससे दिल की धड़कन बढ़ सकती है और मांसपेशियों में खिंचाव महसूस हो सकता है। भावनात्मक रूप से रोने के बाद कुछ लोगों में शरीर के सामान्य और शांत अवस्था में लौटने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसमें पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम की भूमिका होती है, जो शरीर को आराम की स्थिति में लाने में मदद करता है।
जब शब्द कम पड़ जाएं, तब आंसू बनते हैं भावनाओं की भाषा
कई बार व्यक्ति अपनी परेशानी को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाता। ऐसी स्थिति में रोना भावनाओं को जाहिर करने का स्वाभाविक माध्यम बन सकता है। किसी भरोसेमंद व्यक्ति के सामने रोने से बातचीत का रास्ता भी खुल सकता है और सामने वाला व्यक्ति आपकी भावनात्मक स्थिति को बेहतर तरीके से समझ सकता है।
रोने के बाद मन हल्का क्यों लगता है?
भावनात्मक रोने के बाद कुछ लोगों को शांत और बेहतर महसूस होता है। इसका एक कारण यह हो सकता है कि व्यक्ति अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें स्वीकार और व्यक्त करता है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि आंसुओं के जरिए तनाव के हार्मोन निकल जाने से तनाव पूरी तरह खत्म हो जाता है। रोने के बाद राहत महसूस होना कई शारीरिक, भावनात्मक और सामाजिक प्रक्रियाओं का परिणाम हो सकता है।
आंखों के लिए भी बेहद जरूरी हैं आंसू
आंसू सिर्फ भावनाओं से जुड़े नहीं हैं, बल्कि आंखों की सेहत के लिए भी जरूरी हैं। वे आंखों की सतह को नम रखते हैं और पलक झपकने के दौरान आंखों पर एक पतली परत बनाए रखते हैं। इससे आंखों को सूखने से बचाने और बाहरी कणों को हटाने में मदद मिलती है।
धूल या किसी जलन पैदा करने वाली चीज के आंख में जाने पर अचानक आंसू आना भी शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रक्रिया है। हालांकि, अगर लगातार आंखों से पानी आता रहे, तो यह किसी अन्य आंख संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है।
कब बार-बार रोना चिंता का कारण हो सकता है?
कभी-कभार रोना सामान्य है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति को लगातार या बहुत बार रोने का मन करता है, वह खुद को रोक नहीं पाता और इसका असर उसके काम, रिश्तों या रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना मददगार हो सकता है।
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