Barabanki Flood : सरयू ने मिटा दी गांव की पहचान! कभी गुलजार तपेसिपाह में अब सिर्फ एक परिवार, संजय सेतु पर भी खतरा
लाल निशान से 9 सेमी ऊपर सरयू, संजय सेतु और रेलवे पुल के किनारे कटान तेज
बाराबंकी के तपेसिपाह गांव पर सरयू नदी की बाढ़ और कटान ने ऐसा कहर बरपाया कि कभी आबाद रहे गांव में अब सिर्फ एक परिवार बचा है। नदी की कटान संजय सेतु और रेलवे पुल के आसपास भी तेज है। हालांकि जलस्तर घट रहा है और फिलहाल बड़ा खतरा टला माना जा रहा है।
रामनगर/बाराबंकी, अमृत विचार। सरयू नदी के दायरा बढ़ाने से पहले संजय सेतु के ठीक किनारे बसे तपेसिपाह गांव में अब महज एक ही परिवार बचा है। कहा जा सकता है कि यह बड़ी पंचायत होने के साथ ही कभी गुलजार हुआ करता था पर बाढ़ ने दर्जनों गांवों के साथ ही इसकी पहचान ही खत्म कर दी।
उधर नदी की कटान अब संजय सेतु व रेलवे पुल को धीरे धीरे नुकसान पहुंचा रही है। नदी का जलस्तर अब घटने की ओर है। लाल निशान से नदी का पानी अब केवल 9 सेमी ही ऊपर है। फिलहाल खतरा टला माना जा रहा हालांकि नदी किनारों पर तेजी से कटान कर रही है। इस बीच संजय सेतु के निकट ही बसे तपेसिपाह गांव पर सरयू नदी की बाढ़ ने किस कदर कहर ढाया है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब इस गांव में महज एक ही परिवार बचा है, वह भी खतरे की दशा में गांव छाेड़ने को तैयार है।
कुछ वक्त पहले इस गांव में कई परिवार थे पर उजाड़ती नदी के चपेट में आए घर नष्ट होते चले गए। दशक भर पहले यहां पर खासी आबादी बसी थी पर नदी के पानी और कटान ने सब लील लिया। खेत, मैदान, घर जमीन सब नदी के हवाले हो गई। इसी तरह नदी की कटान ने संजय सेत और रेलवे पुल को लक्षित किया है। तेजी से किनारे काटती नदी इनके दोनों हिस्सों की जमीन लीलती जा रही, खतरे जैसी कोई बात तो नही है पर निर्माण से संबंधित संस्थाओं को इस पर नजर डालनी होगी।

राज्यमंत्री ने बांटी बाढ़ राहत किट, जाना हाल
रामसनेहीघाट : बाढ़ की विभीषिका से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए शनिवार को खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति राज्यमंत्री सतीश चन्द्र शर्मा ने तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया। उन्होंने ग्राम सेमरी, बसन्तपुर, अतरसुईया, उमराहरा और सिकरी जीवल में प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर बाढ़ राहत किट का वितरण किया। राज्यमंत्री ने प्रभावित ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं जानीं और राहत एवं सहायता को लेकर जानकारी ली।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री और आवश्यक सुविधाएं समय से पहुंचाई जाएं, ताकि किसी भी परिवार को परेशानी का सामना न करना पड़े। इस दौरान उपजिलाधिकारी बृजेन्द्र उपाध्याय, तहसीलदार रामसनेहीघाट शशांक नाथ उपाध्याय तथा नायब तहसीलदार दरियाबाद सुधाकर पाण्डेय समेत प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। राज्यमंत्री के इस कदम से प्रभावित परिवारों ने राहत की सांस ली।

बाढ़ को लेकर प्रशासन अलर्ट, 19 गांव प्रभावित
सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। तीन तहसीलों के बाढ़ से प्रभावित 19 गांवों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं। प्रशासन ने जनपद व तहसील स्तर पर 24 घंटे संचालित बाढ़ नियंत्रण कक्ष सक्रिय किए व 18 राहत शिविर बनाए गए हैं, जिनमें एक वर्तमान में संचालित है। प्रभावित क्षेत्रों में 11 चिकित्सा टीमें काम कर रही हैं। बचाव कार्य के लिए प्रशासन ने 75 गोताखोर, 243 नावें, 434 नाविक और 691 लाइफ जैकेट उपलब्ध कराए हैं।
प्रभावित लोगों को भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने अब तक 3,860 लोगों का उपचार किया है। मच्छरों की रोकथाम के लिए 195 गांवों में लार्वीसाइडल का छिड़काव कराया गया है। पशुपालन विभाग की ओर से 393 पशुओं का उपचार किया जा चुका है। जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार भ्रमण और निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति तक समय से राहत और सहायता पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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