बहराइच : फर्जी डी-फार्मा डिग्री देने के आरोप में फार्मेसी कॉलेज का प्रिंसिपल अरेस्ट
नंदा इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी में फार्मेसी छात्र को कथित तौर पर फर्जी डिग्री दिए जाने के मामले में पुलिस ने संस्थान के प्राचार्य को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पीड़ित छात्र की शिकायत पर पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव के हस्तक्षेप से मुकदमा दर्ज हुआ था। मंगलवार को रामगांव थानाध्यक्ष दिवाकर तिवारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने दबिश देकर आरोपी प्राचार्य सुरेंद्र कुमार सिंह उर्फ दीप राठौर को गिरफ्तार कर लिया।
बहराइच, अमृत विचार : नंदा इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी में फार्मेसी छात्र को कथित तौर पर फर्जी डिग्री दिए जाने के मामले में पुलिस ने संस्थान के प्राचार्य को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पीड़ित छात्र की शिकायत पर पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव के हस्तक्षेप से मुकदमा दर्ज हुआ था। मंगलवार को रामगांव थानाध्यक्ष दिवाकर तिवारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने दबिश देकर आरोपी प्राचार्य सुरेंद्र कुमार सिंह उर्फ दीप राठौर को गिरफ्तार कर लिया।
बलरामपुर जिले के उतरौला थाना क्षेत्र के पुरैना गांव निवासी रवि प्रताप पुत्र राममीत ने वर्ष 2020 में नंदा इंस्टीट्यूट में डी-फार्मा की पढ़ाई के लिए प्रवेश लिया था। छात्र के मुताबिक उसने संस्थान में निर्धारित शुल्क के अलावा पढ़ाई पूरी करने के बाद उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल में पंजीकरण कराने के नाम पर 1.75 लाख रुपये भी जमा किए। इसके बाद उसका डी-फार्मा में पंजीकरण कराया गया।
रवि प्रताप का आरोप है कि संस्थान से अंकपत्र और प्रमाणपत्र मांगे जाने पर लगातार टालमटोल की जाती रही। इसी बीच 31 मार्च को गाजीपुर थाने के उपनिरीक्षक नीरज यादव की ओर से उसे सूचना दी गई कि उसके द्वारा प्रस्तुत डी-फार्मा की डिग्री कूट रचित और फर्जी है। यह जानकारी मिलने के बाद छात्र ने एसपी विश्वजीत श्रीवास्तव से मुलाकात कर पूरे मामले की शिकायत की।
एसपी के हस्तक्षेप के बाद 13 अगस्त को रामगांव थाने में मामले की एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस ने जांच तेज करते हुए आरोपी प्राचार्य की गिरफ्तारी के लिए दबिश शुरू की। मंगलवार को थानाध्यक्ष दिवाकर तिवारी के नेतृत्व में उपनिरीक्षक हेमंत कुमार सिंह, मैनेजर सिंह और पुलिस बल ने कार्रवाई करते हुए सुरेंद्र कुमार सिंह उर्फ दीप राठौर को गिरफ्तार कर लिया।
थानाध्यक्ष ने बताया कि आरोपी से गहन पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। मामले की जांच जारी है। कार्रवाई के बाद संस्थान से जुड़े अन्य छात्रों में भी अपने शैक्षिक प्रमाणपत्रों और पंजीकरण को लेकर चिंता बढ़ गई है।
