लखनऊ : खेतों की मिट्टी बीमार, नाइट्रोजन, कार्बन और सल्फर की मात्रा मिली कम
फसल चक्र टूटने व रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से आई कमी
लखनऊ, अमृत विचार : जिले में फसल चक्र के अनुसार खेती और जैविक खादों का उपयोग न करना खेतों की मिट्टी को बीमार बना रहा है। किसानों ने एक ही फसल करने की परम्परा और अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों का उपयोग न रोका तो आगे गंभीर परिणाम सामने आएंगे। मृदा परीक्षण की रिपोर्ट में कई पोषक तत्व कम मिले हैं, जिनकी पूर्ति किसानों को करना बेहद जरूरी है।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना में सभी आठ विकास खंड से 32 गांव चयनित किए गए। इनमें खरीफ फसल के दौरान कुल 3170 मिट्टी के सैंपल लेकर लैब में परीक्षण कराया गया। जो रिपोर्ट आई उसमें ज्यादातर क्षेत्रों की मिट्टी में लगभग एक जैसे पोषक तत्वों में भारी कामी पाई गई। मुख्य रूप से नाइट्रोजन की मात्रा 169 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के आसपास मिली। जबकि 280 से 560 के बीच होनी चाहिए। इसी तरह सल्फर 10 किलो प्रति एकड़/हेक्टेयर की जगह 7.81 निकला। दोनों पोषक तत्व सबसे नीचे और अपूर्ण स्थिति में पाए गए। जबकि सबसे खराब लाल श्रेणी में कार्बनिक कार्बन .33 फीसदी निकला, जोकि अच्छी श्रेणी में .50 से .75 फीसद तक होना चाहिए।
सहायक निदेशक मृदा परीक्षण/कल्चर लखनऊ मंडल डॉ. मनमोहन लाल ने बताया इसकी मुख्य वजह किसानों द्वारा फसल चक्र न अपनाकर एक ही खेती करना व अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल करना है। सुधार के लिए गेहूं, धान, मक्का, आलू, बाजारा, ज्वार, दलहन-तिलहन चक्र के अनुसार करना होगा। साथ ही प्राकृतिक संसाधन जैसे खेतों पर गोबर की खाद, कूड़ा, वर्मी कम्पोस्ट, फसल अवशेष जमीन पर निस्तारित करके पोषक तत्व बढ़ाने होंगे। इसके लिए किसानों को रिपोर्ट कार्ड दिए हैं।
ये पोषक तत्व मिले मध्यम व सामान्य
कॉपर .82, आयरन 7.23, बोरान 1.31, सल्फर 7.81, जिंक 1.30, मैंगनीज 6.07, फासफोरस 18, पोटेशियम 235, इसके आलवा पीएच 7.80 व इलेक्ट्रिकल कंडक्टीविटी .11
