मंदाकिनी का रौद्र रूप: चित्रकूट का रामघाट डूबा, 90 साल में सबसे भीषण बाढ़; दुकानें और कई आश्रम जलमग्न

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Edited By Anjali Singh
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चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से रामघाट पूरी तरह जलमग्न हो गया। 90 साल में आई सबसे भीषण बाढ़ से दुकानें और कई आश्रम डूब गए।

चित्रकूट। उत्तर प्रदेश के पौराणिक एवं ऐतिहासिक तीर्थस्थल चित्रकूट में मंदाकिनी नदी में आई जबरदस्त बाढ़ से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नदी के किनारे स्थित आश्रम, मंदिर, मठ, रामघाट की दुकानें और कई होटल पानी में डूब गए हैं। बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान का अनुमान है। स्थानीय निवासी 90 वर्षीय राम सलोने ने बताया कि उनकी याद में मंदाकिनी नदी में इससे अधिक भीषण बाढ़ कभी नहीं आई। 

MP से सटे इलाके में घुसा मंदाकिनी का पानी 

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर मंदाकिनी नदी के किनारे बसे कई इलाकों में घरों में पानी घुस गया है। कुछ लोगों ने अपने घरों की छतों पर शरण ले रखी है, लेकिन अब उनके मकान चारों ओर से पानी से घिर गए हैं। बाढ़ के कारण सैकड़ों लोग अपने घरों में फंसे हुए हैं। 

 पुलिस लगातार कर रही निगरानी 

पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के प्रयास में जुटी हैं। कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है। उत्तर प्रदेश के कटरा गूदर गांव में स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है, जबकि तरौवां ग्रामीण क्षेत्र का बड़ा हिस्सा बाढ़ के पानी में डूब गया है। कई सड़कों पर पानी भर जाने से नावों का सहारा लिया जा रहा है और लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान जारी है। 

 रामघाट में बना बड़ा पुल भी डूबा 

मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से रामघाट में बना बड़ा पुल भी पानी में डूब गया है। नदी के आसपास स्थित धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर बाढ़ का व्यापक असर पड़ा है। रामघाट के किनारे बनीं दुकानें और होटल भी जलमग्न हो गए हैं। जानकीकुंड क्षेत्र में पंजाबी भगवान आश्रम, आरोग्यधाम, सद्गुरु सेवा संघ का आश्रम, जगद्गुरु रामभद्राचार्य आश्रम समेत सैकड़ों आश्रमों में बाढ़ का पानी घुस गया है। 

जलस्तर और बढ़ने की आशंका

कई भवनों में पानी भरने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ इमारतों में कंपन महसूस किया जा रहा है और उनके क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी हुई है। बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोगों के सामने सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की चुनौती है। पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। हालांकि स्थानीय स्तर पर और अधिक राहत एवं बचाव सहायता की आवश्यकता बताई जा रही है।

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