दधीचि कुंड: जहां महर्षि दधीचि ने सृष्टि की रक्षा के लिए किया था अस्थि दान, आज भी उमड़ते हैं श्रद्धालु

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Edited By Muskan Dixit
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आस्था, तपस्या और त्याग की अनूठी कहानी समेटे है मिश्रिख का दधीचि कुंड, 84 कोसीय परिक्रमा का भी प्रमुख पड़ाव

मिश्रिख (सीतापुर)। नैमिषारण्य तीर्थ क्षेत्र की 84 कोसीय परिक्रमा का प्रमुख पड़ाव और महर्षि दधीचि की तपोभूमि मिश्रिख स्थित 'दधीचि कुंड' सदियों से आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह वही पावन स्थली है, जहां महर्षि दधीचि ने देवराज इंद्र और संपूर्ण सृष्टि की रक्षा के लिए अपनी देह का त्याग कर अस्थि दान किया था। इस ऐतिहासिक और पौराणिक तीर्थ के दर्शन व कुंड में पुण्य स्नान के लिए न केवल देश के कोने-कोने से बल्कि विदेशों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

Naimisharanya Dadhichi Kund (3)

समस्त तीर्थों के जल से बना है यह कुंड

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब महर्षि दधीचि ने वृत्रासुर के वध के लिए अपनी अस्थियां दान करने का संकल्प लिया, तब उन्होंने सभी पवित्र नदियों और तीर्थों में स्नान करने की इच्छा जताई।

Naimisharanya Dadhichi Kund (4)

देवताओं ने उनके संकल्प को पूरा करने के लिए समस्त तीर्थों के पावन जल को एक स्थान पर संचित किया, जिसे आज 'मिश्रित तीर्थ' या 'दधीचि कुंड' के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से सभी तीर्थों के पुण्य का फल एक साथ प्राप्त होता है।

Naimisharanya Dadhichi Kund (2)

84 कोसीय परिक्रमा का अहम पड़ाव

फाल्गुन मास में होने वाली प्रसिद्ध 84 कोसीय परिक्रमा में शामिल लाखों श्रद्धालु दधीचि कुंड में स्नान और परिक्रमा कर स्वयं को धन्य मानते हैं। स्थानीय पुरोहितों के अनुसार, कुंड के जल में स्नान करने से असाध्य चर्म रोगों और शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। आस्था रखने वाले पर्यटक व शोधार्थी भी यहां के आध्यात्मिक वातावरण और त्याग की इस अनूठी परंपरा को जानने पहुंचते हैं।

Naimisharanya Dadhichi Kund (3)

धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान

शासन स्तर से नैमिषारण्य और मिश्रिख तीर्थ क्षेत्र के समग्र विकास के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। घाटों का सुंदरीकरण, प्रकाश व्यवस्था और यात्री सुविधाओं के विस्तार से यहां आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को सुगमता मिल रही है। स्थानीय वासी शेखर, सुमित, रामशरण, रामशंकर, विकास, रवि आदि का कहना है कि दधीचि कुंड केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि विश्व कल्याण के लिए किए गए 'सर्वोच्च त्याग' का जीवंत प्रतीक है।

Naimisharanya Dadhichi Kund

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