Budget 2027-28: केंद्र सरकार ने शुरू की बजट की तैयारी, मंत्रालयों को दिए ये खास निर्देश

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2027-28 के केंद्रीय बजट की तैयारियों का औपचारिक आगाज कर दिया है। वित्त मंत्रालय ने बजट प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बजट परिपत्र (Budget Circular) जारी कर दिया है और सभी मंत्रालयों और विभागों के लिए समयसीमा तय कर दी है। सभी मंत्रालयों को आने वाले वित्तीय वर्ष की जरूरतों, योजनाओं और व्यय प्रस्तावों का विस्तृत आकलन तैयार करने को कहा गया है।

इसका सीधा असर अभी के लिए आम लोगों की जेब पर नहीं दिखने वाला है, लेकिन इसकी शुरुआती तैयारी में तय होने वाली प्राथमिकताएं आने वाले वित्त वर्ष में रोजगार, सड़क-बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल सेवाओं, सामाजिक योजनाओं और विकास परियोजनाओं के लिए सरकारी खर्च की दिशा तय करेंगी।

आम आदमी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है बजट की यह शुरुआती प्रक्रिया?

बजट आने के समय आम तौर पर लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा टैक्स, महंगाई, नौकरी, सब्सिडी और सरकारी योजनाओं पर रहता है। लेकिन इन फैसलों की नींव कई महीने पहले बजट तैयार करने की प्रक्रिया में रखी जाती हैं।

मंत्रालय जब अपनी योजनाओं और खर्च का प्रस्ताव भेजते हैं तो उसमें यह तय करने की कोशिश होती है जैसे की अगले वित्त वर्ष में किन क्षेत्रों को कितना संसाधन चाहिए। इसके बाद वित्त मंत्रालय उपलब्ध राजस्व और सरकार की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए खर्च की सीमा तय करता है। यानी बजट में किस क्षेत्र को कितना पैसा मिलेगा, उसकी शुरुआती तस्वीर इसी प्रक्रिया से बननी शुरू होती है।

6 अक्टूबर तक जमा करने होंगे प्रस्ताव, 12 अक्टूबर से शुरू होंगी बैठकें

वित्त मंत्रालय के अनुसार, आगामी 2027-28 के बजट को लेकर पूर्व-बजट परामर्श बैठकें 12 अक्टूबर 2026 से शुरू होंगी। इन बैठकों के लिए मंत्रालयों और विभागों को जरूरी आंकड़े और प्रस्ताव 6 अक्टूबर 2026 तक जमा कराने होंगे।

बजट प्रक्रिया के तहत विभागों को वित्त वर्ष 2026-27 के संशोधित अनुमान (RE) और 2027-28 के बजट अनुमान (BE) तैयार करने होंगे। इसके लिए सभी मंत्रालयों से विस्तृत व्यय प्रस्ताव और उनकी वित्तीय जरूरतों का आकलन मांगा गया है।

विकास और भविष्य की प्राथमिकताओं पर होगा जोर

प्री-बजट बैठकों में अलग-अलग मंत्रालयों की वित्तीय जरूरतों, मौजूदा परियोजनाओं और आम जनता के लिए आने वाली योजनाओं पर चर्चा होगी। इन्हीं प्रस्तावों और चर्चाओं के आधार पर केंद्रीय बजट का शुरुआती ढांचा तैयार किया जाएगा।

आगामी बजट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत @2047' विजन के अनुरूप तैयार किए जाने की संभावना है। मंत्रालयों को निर्देश दिया गया है कि उनके व्यय प्रस्ताव होंगे उन्हें सरकार की स्वीकृत प्राथमिकताओं और वास्तविक वित्तीय जरूरतों के आधार पर ही तैयार करना है। 

सरकार की प्राथमिकता ऐसे खर्चों को बढ़ावा देने की है, जो आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार, रोजगार को बढ़ावा, डिजिटल बदलाव और सामाजिक विकास के लक्ष्यों में योगदान देने और देश को आगे बढ़ाने में मदद कर सकें। ऐसे होने चाहिए।

अतिरिक्त बजट मांगों को सीमित रखने का निर्देश

वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने मंत्रालयों और विभागों को बजट अनुमान बनाते समय सटीक और यथार्थवादी वित्तीय आकलन पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही वित्तीय वर्ष के दौरान अगर कोई अलग से संसाधनों की मांग को यथासंभव सीमित रखने को कहा गया है।

इसका उद्देश्य सार्वजनिक वित्त प्रबंधन को अधिक अनुशासित और प्रभावी बनाना है। Budget Circular में यह भी कहा गया है कि केवल उन्हीं योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए बजट के प्रावधान प्रस्तावित किए जाएं, जिसे सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी मिल चुकी है।

जारी योजनाओं के मामले में स्वीकृत व्यय योजनाओं का डिस्क्रिप्शन भी उपलब्ध कराना होगा।

UBIS के जरिए तैयार होंगी अनुदान मांगें

सभी मंत्रालय और विभाग अपनी विस्तृत अनुदान मांगें यूनियन बजट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (UBIS) के माध्यम से तैयार किए जाएंगे। वित्त मंत्रालय ने बजट प्रक्रिया के दौरान दर्ज की जाने वाली वित्तीय सूचनाओं और दस्तावेजों को पूरी तरह से गोपनीयता बनाए रखने को कहा है। साभी ही कहा है की किसी भी तरह की भूल न हो।

वित्तीय सलाहकारों को निर्देश दिया गया है कि UBIS में दर्ज सभी आंकड़ों और दस्तावेजों की सुरक्षा निर्धारित मानकों के अनुरूप रखने के लिए भी निर्देशित किया गया है। 

विकास और राजकोषीय अनुशासन के बीच हो संतुलन

Budget Circular जारी होने के साथ ही वित्त वर्ष 2027-28 के लिए केंद्र सरकार की प्रमुख वित्तीय योजना प्रक्रिया शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि आगामी बजट में विकास से जुड़ी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने पर भी खास ध्यान दिया जाएगा।

अक्टूबर से दिसंबर तक कैसे आगे बढ़ेगी बजट प्रक्रिया?

बजट प्रक्रिया को मोटे तौर पर इस तरह समझा जा सकता है-

- 6 अक्टूबर 2026 को मंत्रालयों और विभागों को आवश्यक आंकड़े व प्रस्ताव जमा करने होंगे।

- 12 अक्टूबर 2026 को पूर्व-बजट परामर्श बैठकें शुरू होंगी।

- 15 अक्टूबर को टैक्स रिसिप्ट से जुड़े अनुमान जमा करने की समयसीमा निर्धारित है।

- 6 नवंबर को वित्तीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन (FRBM) ढांचे के तहत आवश्यक प्रकटीकरण विवरण जमा करने होंगे।

प्री-बजट बैठक के बाद

सभी मंत्रालयों और विभागों को शुरुआती व्यय सीमा की जानकारी दी जाएगी और उसके आधार पर Detailed Demands for Grants तैयार होंगी।

दिसंबर 2026 के अंत या जनवरी 2027 की शुरुआत 

वित्त मंत्रालय के अंतिम व्यय सीमा तय किए जाने के बाद संबंधित आंकड़े UBIS में दर्ज किए जाएंगे।

इसके बाद इन विस्तृत मांगों के आधार पर Demands for Grants, Expenditure Budget, Expenditure Profile, Annual Financial Statement और Appropriation Bill जैसे महत्वपूर्ण बजट दस्तावेज तैयार किए जाएंगे, जिन्हें संसद में पेश किया जाएगा।

आम लोगों को अभी क्या उम्मीद रखनी चाहिए?

आप लोगों को बता दें कि बजट की तैयारी शुरू होने का मतलब यह नहीं है कि अभी से टैक्स में कटौती, किसी योजना में बढ़ोतरी या किसी नई घोषणा का फैसला हो गया है। फिलहाल सरकार मंत्रालयों और विभागों से उनकी जरूरतों और योजनाओं का आकलन मांग रही है।

हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया से एक महत्वपूर्ण संकेत जरूर मिलता है कि आगामी बजट में विकास और राजकोषीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाने पर जोर रहेगा। आम लोगों के लिए अंतिम तस्वीर फरवरी 2027 में बजट पेश होने के बाद ही साफ होगी।

फिलहाल नजर उन प्रस्तावों पर रहेगी जो मंत्रालय अक्टूबर में वित्त मंत्रालय के सामने रखेंगे। इन्हीं प्रस्तावों और सरकार की राजस्व स्थिति के आधार पर यह तय होगा कि अगले वित्त वर्ष में किस क्षेत्र में सरकारी खर्च बढ़ेगा और कौन सी योजनाओं को प्राथमिकता मिलेगी।

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