सरसों में तेजी, सोयाबीन-बिनौला कमजोर, जानें तेल-तिलहन के ताजा भाव

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
On

विदेशी बाजारों की मजबूती के बावजूद घरेलू बाजार में सीमित असर, सरसों तेल-तिलहन में मामूली सुधार तो सोयाबीन और बिनौला तेल में गिरावट

नई दिल्लीः विदेशी बाजारों में मजबूती के बीच बीते सप्ताह घरेलू बाजार में सरसों तेल-तिलहन की कीमतों में सीमित सुधार दर्ज किया गया। दूसरी ओर सोयाबीन तेल-तिलहन और बिनौला तेल के भाव गिरावट के साथ बंद हुए। लागत से कम कीमत पर बिकवाली के दबाव के कारण कच्चे पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल के भाव स्थिर रहे। ऊंचे भाव पर मांग कमजोर रहने से मूंगफली तेल-तिलहन में भी कोई बदलाव नहीं हुआ।

सोमवार को अवकाश के कारण मलेशिया एक्सचेंज बंद रहेगा।

सरसों की सीमित उपलब्धता से कीमतों को सहारा

बाजार सूत्रों के अनुसार सरसों की उपलब्धता कम होने से बीते सप्ताह सरसों तेल-तिलहन के भाव में मामूली मजबूती आई। हालांकि, ऊंची कीमतों के कारण सरसों की खरीदारी कमजोर बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तिलहन महंगा होगा तो उससे बनने वाला तेल भी स्वाभाविक रूप से ऊंचे भाव पर ही उपलब्ध होगा।

समीक्षाधीन सप्ताह में सरसों दाना 50 रुपये की बढ़त के साथ 8,300-8,350 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। सरसों तेल दादरी का भाव 100 रुपये बढ़कर 16,800 रुपये प्रति क्विंटल हो गया।

सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल के भाव में भी 15-15 रुपये का सुधार हुआ। दोनों क्रमश: 2,735-2,835 रुपये और 2,735-2,885 रुपये प्रति टिन (15 किलो) पर बंद हुए।

सोयाबीन के भाव में मामूली गिरावट

सूत्रों के मुताबिक बड़े सोयाबीन संयंत्र किसानों से कम कीमत पर सोयाबीन खरीदने के उद्देश्य से इसके भाव में बदलाव करते रहते हैं। बीते सप्ताह तेल संयंत्रों की ओर से सोयाबीन के दाम घटाए जाने के कारण सोयाबीन तेल-तिलहन में मामूली गिरावट दर्ज हुई।

सोयाबीन की उपलब्धता कम होने के बावजूद इसके तेल-रहित खल (डीओसी) की घरेलू मांग बनी हुई है। इसके बावजूद आयातकों की ओर से सोयाबीन और पाम-पामोलीन तेल की लागत से कम कीमत पर बिक्री जारी है। इसी वजह से विदेशी बाजारों में मजबूती के बावजूद घरेलू बाजार में उसका पूरा असर नहीं दिख रहा है।

सप्ताह के दौरान सोयाबीन दाना और सोयाबीन लूज के थोक भाव में 100-100 रुपये की गिरावट आई। दोनों क्रमश: 6,675-6,725 रुपये और 6,525-6,625 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।

दिल्ली में सोयाबीन तेल 50 रुपये घटकर 15,750 रुपये प्रति क्विंटल, सोयाबीन इंदौर तेल 100 रुपये घटकर 15,550 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल 150 रुपये घटकर 12,050 रुपये प्रति क्विंटल रह गया।

मूंगफली के भाव स्थिर

बाजार सूत्रों ने बताया कि सहकारी संस्था नाफेड के पास मूंगफली का स्टॉक मौजूद है। ऐसे में मूंगफली के बाजार भाव में उतार-चढ़ाव काफी हद तक नाफेड की बिक्री पर निर्भर करता है।

ऊंचे भाव पर खरीदारी कमजोर रहने के कारण बीते सप्ताह मूंगफली तेल-तिलहन के भाव स्थिर रहे। मूंगफली तिलहन 7,350-7,925 रुपये प्रति क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 17,000 रुपये प्रति क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 2,680-2,980 रुपये प्रति टिन पर स्थिर बंद हुआ।

पाम और पामोलीन तेल में भी बदलाव नहीं

आयातकों की ओर से लागत से कम कीमत पर बिक्री किए जाने के कारण पाम और पामोलीन तेल के भाव में भी कोई बदलाव नहीं आया। सूत्रों के मुताबिक आयातक बैंक के ऋण साखपत्र (एलसी) को घुमाते रहने के लिए लगातार बिकवाली करते रहते हैं।

बीते सप्ताह सीपीओ तेल 13,950 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर रहा। वहीं पामोलीन दिल्ली 15,850 रुपये प्रति क्विंटल और पामोलीन एक्स-कांडला तेल 14,600 रुपये प्रति क्विंटल पर बिना बदलाव के बंद हुए।

कम उपलब्धता के बावजूद बिनौला तेल कमजोर

सूत्रों के अनुसार बिनौला की उपलब्धता भी कम है। बिनौला का रिफाइंड तेल मूंगफली तेल की तुलना में महंगा पड़ता है। इसके बावजूद मूंगफली तेल के भाव में बढ़ोतरी नहीं होने से बिनौला तेल पर दबाव बना रहा।

बीते सप्ताह बिनौला तेल का भाव 225 रुपये गिरकर 16,900 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

यह भी पढ़ें:

संबंधित समाचार