एआई कभी नहीं ले सकेगा शिक्षक का स्थान
एआई शिक्षा की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। ज्ञान और सूचना उपलब्ध करा सकता है पर विवेक, संवेदना, संस्कार, अनुशासन और जीवन-दृष्टि नहीं दे सकता।
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस पर हर वर्ष पांच सितंबर को मनाया जाने वाला शिक्षक दिवस हमें स्मरण कराता है कि शिक्षा केवल अक्षरों का ज्ञान नहीं बल्कि जीवन के उद्देश्य को समझने और उसे सार्थक बनाने की प्रक्रिया है। शिक्षक वह मार्गदर्शक है, जो अज्ञानता से ज्ञान की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर और असमंजस से विवेक की ओर ले जाता है। आज जब तकनीकी क्रांति ने जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित कर दिया है, तब यह प्रश्न अनिवार्य रूप से उठता है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) क्या वास्तव में शिक्षकों का स्थान ले पाएगी? पिछले कुछ वर्षों में एआई ने जिस तीव्रता के साथ शिक्षा व्यवस्था में प्रवेश किया है, वह अभूतपूर्व है। गूगल, चैटजीपीटी, मशीन लर्निंग और अन्य जनरेटिव टूल्स ने छात्रों को तुरंत जानकारी प्राप्त करने और असाइनमेंट तैयार करने की सुविधा दी है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट बताती है कि एआई आधारित टूल्स का उपयोग शिक्षा क्षेत्र में लगभग पचास प्रतिशत बढ़ चुका है।
भारत में भी विश्वविद्यालयों से लेकर स्कूलों तक, छात्र अपने प्रोजेक्ट, शोध और होमवर्क में एआई का सहारा ले रहे हैं। इससे एक ओर जहां जानकारी का दायरा व्यापक हुआ है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों के सामने चुनौती यह है कि छात्रों की मौलिकता और रचनात्मकता कहीं खो न जाए। इस बारे में कुछ शिक्षाविदों का कहना है कि एआई किताब तो उपलब्ध करवा सकता है, लेकिन उसे पढ़ना, समझना और जीवन में उतारना केवल एक शिक्षक ही सिखा सकता है। यह चेतावनी केवल भारत की नहीं बल्कि दुनियाभर की है।
अमेरिका के स्टैनफोर्ड और हार्वर्ड विश्वविद्यालय द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई पर अत्यधिक निर्भरता से छात्रों में विश्लेषण और समस्या-समाधान की क्षमता घट सकती है। फिर भी हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि एआई अपने आप में एक खतरा नहीं बल्कि अवसर भी है। सही दिशा और सीमाओं में इसका इस्तेमाल शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ा सकता है। सिंगापुर और फिनलैंड जैसे देशों ने पहले ही यह व्यवस्था कर दी है कि शिक्षक स्वयं एआई का प्रशिक्षण लें, ताकि वे इसे सहायक उपकरण की तरह उपयोग कर सकें।
भारत में भी एनसीईआरटी और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा सुझाव दिया गया है कि शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में एआई को शामिल किया जाए। इसका उद्देश्य यह नहीं कि शिक्षक मशीन की जगह छोड़ दें, बल्कि यह है कि वे तकनीक को समझकर उसे अपने शिक्षण के सहायक बना सकें। शिक्षण का मूल सार केवल पाठ्यपुस्तक आधारित ज्ञान देना नहीं है। यह एक संबंध है, एक प्रक्रिया है, जिसमें शिक्षक और छात्र आपसी संवाद से सीखने का वातावरण बनाते हैं।
जब कोई छात्र कक्षा में ऊब जाता है तो शिक्षक उसकी आंखों में देखकर समझ सकता है कि वह क्यों असमंजस में है। जब कोई बच्चा कठिनाई का सामना करता है, तो शिक्षक अपने अनुभव और संवेदना से उसे प्रेरित करता है। यही वह मानवीय जुड़ाव है, जिसे कोई मशीन कभी नहीं दोहरा सकती। एआई भावनाओं की सतह को समझ सकता है, लेकिन संवेदना, करुणा और सहानुभूति का स्थान नहीं ले सकता। यही कारण है कि शिक्षा शास्त्रियों का मानना है कि शिक्षक का महत्व किसी भी युग में कम नहीं हो सकता।
यह भी ध्यान रखना होगा कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत ज्ञान तक सीमित नहीं है। संस्थागत शिक्षा यानी स्कूल और विश्वविद्यालय छात्रों को जीवन का व्यापक अनुभव कराते हैं। यहां वे केवल पाठ्यक्रम नहीं सीखते बल्कि टीमवर्क, सहयोग, खेल, नैतिकता और सामाजिक मूल्यों को आत्मसात करते हैं। यदि कोई बच्चा केवल एआई आधारित घर-परिवार के अध्ययन तक सीमित रहेगा, तो वह इन मूल अनुभवों से वंचित रह जाएगा। यही कारण है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह स्वीकार किया जा रहा है कि शिक्षा का वास्तविक स्वरूप तभी सार्थक है, जब उसमें मानवीय संपर्क और सामाजिक अनुभव शामिल हों।
एआई कभी भी मानव को पूरी तरह प्रतिस्थापित नहीं कर सकता। इसके पास डेटा है, परंतु निर्णय क्षमता नहीं, इसके पास जानकारी है, परंतु प्रेरणा नहीं। कोई मशीन कभी यह नहीं समझ सकती कि कब छात्र को कठोर अनुशासन की आवश्यकता है और कब उसे सहानुभूति और प्रोत्साहन की। शिक्षा केवल तथ्यों का संग्रह नहीं, जीवन जीने की कला है और यह कला केवल वही सिखा सकता है, जो स्वयं जीवन के अनुभवों से गुजरा हो अर्थात शिक्षक।
फिर भी, एआई को नकारना व्यावहारिक नहीं है। यह असंख्य तरीकों से शिक्षकों का सहयोग कर सकता है। उदाहरण के लिए, प्रश्नपत्र तैयार करने, उपस्थिति दर्ज करने, नोट्स बनाने या आभासी वास्तविकता आधारित भ्रमण कराने में एआई अत्यंत सहायक सिद्ध हो सकता है। इससे शिक्षक का बोझ कम होगा और वे छात्रों पर व्यक्तिगत ध्यान दे पाएंगे। यूनाइटेड किंगडम के शिक्षा विभाग ने कुछ समय पहले एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें बताया गया कि एआई के उपयोग से शिक्षकों के प्रशासनिक कार्यों का बोझ 30 प्रतिशत तक घटा है और वे छात्रों के साथ संवाद में अधिक समय व्यतीत कर पा रहे हैं। (ये लेखक के निजी विचार हैं)
