संपादकीय : यूरोप में रणनीतिक राह

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की वार्ता भारत की यूरोप-केंद्रित आर्थिक और रणनीतिक नीति तथा बेल्जियम की यूरोपीय संघ में विशिष्ट स्थिति बताती है। जुलाई में भारत-बेल्जियम रणनीतिक संवाद शुरू होना और अब रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा तथा सुरक्षा तक सहयोग का विस्तार इसी का संकेत है। अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करना महत्वपूर्ण आर्थिक लक्ष्य है। अभी दोनों देशों का व्यापार लगभग 18 अरब डॉलर के आसपास है, जिसमें बेल्जियम को भारत का निर्यात और वहां से आयात—विशेषकर हीरा, रसायन, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स तथा पेट्रो-रसायन महत्वपूर्ण हैं। 

दोगुना का महत्वाकांक्षी लक्ष्य असंभव नहीं है, क्योंकि भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते की वार्ताओं के सफल समापन से नए बाजार खुलने की संभावना है, बशर्ते व्यापार को केवल पारंपरिक हीरा कारोबार पर निर्भर रखने के बजाय फार्मा, जैव-प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री, डिजिटल तकनीक, लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण तक ले जाया जाए। रक्षा सहयोग इस साझेदारी को रणनीतिक गहराई देता है। दोनों देशों ने नियमित सैन्य वार्ता, स्टाफ-स्तरीय आदान-प्रदान, शिक्षा-प्रशिक्षण, अनुसंधान तथा रक्षा उद्योग में साझेदारी के लिए आशय-पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे सेनाओं में पारस्परिक समझ, समुद्री क्षेत्र में सहयोग और इंडो-पैसिफिक में समन्वय बढ़ेगा। बेल्जियम रक्षा क्षेत्र में बड़ा हथियार-आपूर्तिकर्ता नहीं है, लेकिन उसकी विशेषीकृत तकनीकी क्षमता भारत के लिए उपयोगी है।

बख्तरबंद प्रणालियों, बुर्ज और अग्नि-नियंत्रण, इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स, सेंसर, मिसाइल तकनीक, ड्रोन-रोधी प्रणालियों और रक्षा विनिर्माण में उसके उद्योगों की विशेषज्ञता भारतीय निजी और सार्वजनिक रक्षा कंपनियों के साथ सह-विकास तथा सह-उत्पादन में काम आ सकती है, जिसका लाभ भारतीय विनिर्माण क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ाने में होगा। साइबर अपराध और संगठित अपराध पर सीबीआई तथा बेल्जियन फेडरल पुलिस का समझौता भी महत्वपूर्ण है। सूचना साझा करने, भगोड़ों का पता लगाने, जांच-पद्धतियों और क्षमता निर्माण में सहयोग से एक से अधिक देशों में नेटवर्क रखने वाले अपराधियों पर कार्रवाई संभव होगी।

स्वच्छ ऊर्जा में सहयोग का दायरा व्यापक है— ग्रीन हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, अपतटीय पवन, जैव-ऊर्जा और पंप्ड-स्टोरेज तक। महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण में बेल्जियम की विशेषज्ञता भारत की आपूर्ति-श्रृंखला सुरक्षा मजबूत कर सकती है। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बेल्जियम का सबसे बड़ा लाभ उसका विश्वस्तरीय अनुसंधान केंद्र है। यह सहयोग भारत के चिप उद्योग, नैनोफैब्रिकेशन और उन्नत चिप तकनीक में भारत की क्षमता बढ़ाएगी। दोनों पक्षों ने आतंकवाद पर संयुक्त कार्य समूह की संभावना तलाशने पर सहमति जताई है, यह स्वागतयोग्य है।

समुद्री सुरक्षा में बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, ड्रेजिंग, संपर्क और अपतटीय पवन परियोजनाओं से लेकर सुरक्षित समुद्री मार्गों तक सहयोग का व्यापक अर्थ है। 35 हजार भारतीय मूल के लोग बेल्जियम में रहते हैं, इनके के लिए तेज वीजा सेवाएं, कुशल पेशेवरों और छात्रों के लिए कानूनी गतिशीलता, स्वास्थ्य क्षेत्र में भारतीय नर्सों की आवाजाही और सीधी विमान सेवा की संभावना का सकारात्मक असर होगा।  बेल्जियम भारत के लिए आकार से अधिक तकनीक, यूरोपीय पहुंच और रणनीतिक विश्वसनीयता के कारण महत्वपूर्ण है। चुनौती समझौतों की संख्या नहीं, उन्हें परियोजनाओं में बदलने की है। यदि भारत व्यापार-विस्तार को तकनीक, रक्षा-उत्पादन, ऊर्जा और मानव-गतिशीलता से जोड़ पाया, तो यह संबंध यूरोप में भारत की आर्थिक और रणनीतिक उपस्थिति का प्रभावी आधार बनेगा।