बरेली: पैर का साइज तीन नंबर, जूता दे दिया चार नंबर का
अमृत विचार, बरेली। दिसंबर खत्म होने के बाद भी परिषदीय स्कूलों के बच्चों को ठंड से बचाने के लिए जूते-मोजे अब तक नहीं बांटे जा सके हैं। कुछ बच्चों को जूते दिए भी गए तो गलत साइज के दे दिए गए हैं। किसी के पैर का साइज तीन नंबर है तो उसे चार नंबर या …
अमृत विचार, बरेली। दिसंबर खत्म होने के बाद भी परिषदीय स्कूलों के बच्चों को ठंड से बचाने के लिए जूते-मोजे अब तक नहीं बांटे जा सके हैं। कुछ बच्चों को जूते दिए भी गए तो गलत साइज के दे दिए गए हैं। किसी के पैर का साइज तीन नंबर है तो उसे चार नंबर या दो नंबर का जूता दे दिया गया है। ऐसे में कड़ाके की ठंड में बच्चे बिना जूतों के ही रहने को मजबूर हैं। बता दें कि इससे पहले स्वेटर वितरण में भी इसी तरह की गड़बड़ी उजागर हुई थी।
जिले के बेसिक स्कूलों में स्वेटर वितरण के बाद जूता वितरण में भी अनियमितता सामने आई है। जूतों-मोजों की गुणवत्ता तो छोड़िए, साइज तक ठीक नहीं दिए गए हैं। इस बार बच्चों को देने के लिए तीन नंबर का जूता ही गायब कर दिया गया है। ऐसे में जिन बच्चों को तीन नंबर जूता आता है तो उन्हें या तो 2 नंबर या फिर 4 नंबर जूता दिया जा रहा है।
इस तरह 2 नंबर जूता बच्चों को छोटा हो रहा है और 4 नंबर बड़ा। बात करें क्वालिटी की तो शिक्षक संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि इस बार जूतों की गुणवत्ता भी ठीक उसी तरह की है जैसी पिछली बार थी। कुछ खास नहीं है। वहीं, मोजे की भी क्वालिटी कुछ खास नहीं है। बतातें चले के इस बार परिषदीय स्कूलों में 35 हजार 978 बच्चे हैं। विभाग का दावा है कि उसने करीब 35 फीसदी बच्चों को जूते-मोजे बांट दिए हैं जबकि हकीकत में करीब 80 फीसदी बच्चों को जूते-मोजे मिले ही नहीं हैं।
एक नजर इधर भी
जिले में कुल स्कूल 2485
संविलयन स्कूल 390
कुल बच्चे 350978
जूतों और मोजों का स्टॉक मिलते ही उन्हें लगातार वितरित करवाया जा रहा है। अगर कुछ कमियां हैं तो उन्हें दिखवाया जाएगा।
– विनय कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी
