बरेली: एक बार चूके तो साइबर सेल भी खाते से वापस नहीं ला पाएगी रकम

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बरेली,अमृत विचार। चोरी, लूट और डकैती होने पर पुलिस तुरंत सक्रिय होकर अपराधियों की धरपकड़ में लग जाती है। लेकिन साइबर अपराधियों के द्वारा खातों से रकम निकालने के बाद साइबर सेल की टीमें चाहते हुए भी इन अपराधियों को पकड़ नहीं पा रही हैं। साइबर अपराधी एक बार खाते से रकम निकालकर उसे अलग-अलग …

बरेली,अमृत विचार। चोरी, लूट और डकैती होने पर पुलिस तुरंत सक्रिय होकर अपराधियों की धरपकड़ में लग जाती है। लेकिन साइबर अपराधियों के द्वारा खातों से रकम निकालने के बाद साइबर सेल की टीमें चाहते हुए भी इन अपराधियों को पकड़ नहीं पा रही हैं। साइबर अपराधी एक बार खाते से रकम निकालकर उसे अलग-अलग खातों या वर्चुअल खातों में ट्रांसफर कर दे रहे हैं। इसकी वजह से साइबर टीम रकम भी आसानी से वापस नहीं करवा रही है। ऐसे में लोगों को और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि एक बार चूके तो फिर रकम वापस मिलना बहुत मुश्किल है। बुधवार को भी तीन अलग-अलग तरीके से साइबर ठगी के मामले सामने आए।

बरेली में साइबर क्राइम को रोकने के लिए रेंज स्तर पर पुलिस लाइंस में साइबर थाना खुला है और जिला स्तर पर एसएसपी आवास में साइबर सेल बनी है। साइबर थाना और साइबर सेल के साथ-साथ थानों में भी रोज लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंच जा रहे हैं। थानों में पहुंचने वाले पीड़ितों को साइबर थाना या साइबर सेल भेज दिया जाता है, जो लोग साइबर थाना पहुंचते हैं, उन्हें एक लाख रुपये से कम की ठगी होने पर साइबर सेल में भेज दिया जाता है। ऐसे में कई बार ठगी होने के बाद काफी देर हो चुकी होती है।

साइबर सेल शिकायत मिलने पर तुरंत खाते से रकम ट्रांसफर को होल्ड कराने का प्रयास करती है। लेकिन मौजूदा समय में देखने में आया है कि साइबर ठग बरेली के जिस पीड़ित के अकाउंट से रकम निकालते हैं। उसे कर्नाटक, झारखंड या अन्य किसी राज्य में खुले बैंक खाते में भेज देते हैं। इस बैंक खाते से ठगी की रकम को छोटे-छोटे अमाउंट में अलग-अलग किसी दूसरी बैंक के खाते या फिर वर्चुअल खातों जैसे पेटीएम, फोन पे आदि में ट्रांसफर कर दिया जाता है। यह साइबर इंटरनेट बैंकिंग के जरिए कुछ ही मिनट में हो जाता है।

साइबर सेल सबसे पहले पीड़ित के बैंक अकाउंट को सूचना देकर रकम ट्रांसफर होने से रोकने के लिए कहती है और जानकारी मांगती है। इसके बाद संबंधित बैंक उस बैंक से डिटेल मांगती है, जिसमें रकम ट्रांसफर हुई है। इसमें ही काफी वक्त लग जाता है। उसके बाद वर्चुअल खातों से रकम वापस कराना काफी मुश्किल होता है। जबकि पहले साइबर ठग खाते से रकम निकालने के बाद ऑनलाइन शॉपिंग करते थे। ऐसे में सामान की डिलीवरी में वक्त लगता था। इसकी वजह से साइबर सेल की टीम संबंधित को फोन कर सामान की डिलीवरी या रकम का ट्रांसफर रुकवा देती थी। इसकी वजह से अधिकांश लोगों के खाते में काफी हद तक रकम वापस आ जाती थी।

छुट्टी के दिन ज्यादा वारदातें
साइबर ठग ज्यादातर वारदातों को अंजाम छुट्टी के दिनों में दे रहे हैं। साइबर ठग शनिवार दोपहर बाद से रविवार रात तक फोन करते हैं, क्योंकि इस दौरान ठगी का शिकार होने वाला शख्स बैंक बंद होने की वजह से वहां जाकर तुरंत शिकायत नहीं कर सकता है। यदि वह पुलिस के पास भी पहुंचता है तो बैंक बंद होने की वजह से साइबर सेल की टीम को भी यही दिक्कत होती है, क्योंकि बैंक से तुरंत जानकारी नहीं मिल पाती है।

मामला-1: ओटीपी के बिना भी इंजीनियर के खाते से निकाल लिए 25 हजार रुपये
सिविल लाइंस जेल रोड की निवासी उज्ज्वला गुप्ता ने मंगलवार को कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करायी कि दोपहर में मोबाइल पर फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को बैंक अधिकारी बताते खाते को केवाईसी से लिंक करने के लिए कहा। उसके एक घंटे बाद उनके मोबाइल पर ओटीपी नंबर तो आए लेकिन उन्होंने ओटीपी नहीं बताए। उसके बाद भी उनके निजी खाते से पांच बार में 25 हजार रुपये निकल गए। उन्होंने बैंक को सूचना भी दी। उसके बाद शातिरों ने उनके दूसरे बैंक खाते से रकम निकालने का प्रयास किया, जिसके बाद उन्होंने खाता ब्लॉक कराया।

पुलिस ने जब पूछताछ की तो पता चला कि उज्ज्वला बेंगलुरू में इंजीनियर हैं। साइबर ठगों ने उन्हें आधा घंटे तक अपनी बातों में फंसाया रहा। यहां तक की प्रोसेसिंग के बहाने भी काफी देर तक फोन पर होल्ड रखा। उज्ज्वला के पिता डा. सूरज ने काफी देर तक बेटी को फोन पर बात करते हुए देखा तो कहा कि किस से बात कर रहे हो। इस पर ठग ने फोन काट दिया और उसके बाद खाते से रकम निकलना शुरू हो गया। साइबर सेल की जांच में आया कि उज्ज्वला ने साइबर ठग के कहने पर एनी डेस्क एप फोन में इंस्टाल कर लिया था। इसके बाद ही साइबर ठग ने फोन खुद ऑपरेट किया और अकाउंट से रकम निकाल ली।

मामला- 2: चाय व्यापारी का फोन और खाता हैक कर निकाले 3.2 लाख रुपये
गूगल पर कस्टमर केयर का नंबर सर्च करना श्यामगंज निवासी चाय व्यापारी दिलीप कुमार बंसल को महंगा पड़ गया। साइबर ठगों ने उनके खाते से 3 लाख 20 हजार रुपये निकाल लिए। बारादरी पुलिस ने मामले में रिपोर्ट दर्ज की है। दिलीप ने पुलिस को बताया कि उनकी श्यामगंज में मेट्रो वाली गली में बंसल टी कंपनी के नाम से फर्म है। मंगलवार को उन्होंने खाते से जुड़ी जानकारी लेने के लिए गूगल पर सर्च कर बैंक का कस्टर केयर नंबर निकाला।

उन्होंने इस नंबर पर कॉल की। कॉल उठाने वाले ने खुद को बैंक का प्रतिनिधि बताया। ठग ने उनके मोबाइल पर एक मैसेज भेजा और उसमें दिए लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा। दिलीप ने जैसे ही लिंक पर क्लिक किया तो उनके अकाउंट से रकम निकलने लगी। उन्होंने मोबाइल से ट्रांजेक्शन रोकने का प्रयास किया तो फोन हैंग हो गया। उन्होंने बैंक में फोन कर खाता बंद करने के लिए कहा तो पता चला कि खाता भी हैक है। इसकी वजह से बैंक कर्मचारी भी रकम ट्रांसफर होने से नहीं रोक सके। काफी देर खाता ब्लॉक हुआ लेकिन तब तक 3 लाख 20 हजार रुपये की ठगी हो चुकी थी।

मामला-3: टाटा सफारी इनाम में निकलने के बहाने ठगी का प्रयास
एक अन्य केस में साइबर ठग ने टाटा सफारी दिलाने के नाम पर ठगी का प्रयास किया। पीड़ित ने समझदारी दिखायी जिसकी वजह से ठगी से बच गए। साइबर ठग ने पता पूछने पर इतना लंबा पता बताया कि कोई आसानी से ढूंढ पाए। पीड़ित ने ठग से बातचीत का ऑडियो भी रिकार्ड किया है। जिससे आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि ठग किस तरह से लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। पेश हैं बातचीत के अंश

साइबर ठग- आपको फ्लिपकार्ट कंपनी फर्स्ट प्राइज के तौर पर टाटा सफारी गाड़ी दे रहे हैं। इसकी मार्केट में कीमत 12 लाख 60 हजार रुपये है। क्या आप गाड़ी लेना चाहते हैं या पेमेंट लेना चाहते हैं।
पीड़ित- पेमेंट दिला दो।
साइबर ठग- यदि पेमेंट लेंगे तो आपको खाता नंबर देना होगा, जो खाता नंबर देंगे। उसमें रकम ऑनलाइन के माध्यम से ट्रांसफर कर दी जाएगी।
पीड़ित- यदि हम टाटा सफारी लें तो।
साइबर ठग- गाड़ी लेते हैं तो गाड़ी 24 से 48 घंटे में आपके दरवाजे पर होम डिलीवरी के जरिए पहुंचा दी जाएगी।
पीड़ित- आप कहां से बोल रहे हैं।
साइबर ठग- मैं मुंबई महाराष्ट्र से बोल रहे हैं।
पीड़ित- पता नोट करता हूं।
साइबर ठग- मुंबई महाराष्ट्र, दयाशंकर मिश्रा, रो बिहिंड, गुरुद्वार न्यू गुप्ता बिल्डिंग मोहनपुर, सेक्टर नंबर 6, एसबीआई बैंक के सामने, यही कंपनी का पूरा पता है।
पीड़ित- पिन कोड क्या है।
साइबर ठग- 342301
पीड़ित- गाड़ी कब मिलेगी।
साइबर ठग- होम डिलीवरी में गाड़ी 48 से 72 घंटे में पहुंच जाएगी। इसके लिए नाम से गाड़ी का रजिस्ट्रेशन होगा, विनर कार्ड, सारे पेपर बनेंगे, इसके लिए 35 सौ रुपये का रजिस्ट्रेशन खर्च लगेगा।
पीड़ित- डिलीवरी होने के बाद जमा कर देंगे।
साइबर ठग- पहले जमा करना होगा।
पीड़ित- एडवांस में नहीं जमा करते हैं।

इस तरह बचें ठगी से
– बैंक अधिकारी, कूरियर, रिश्तेदार बनकर फर्जी कॉल करने वालों को निजी जानकारी न दें
– ओलेक्स या अन्य वेबसाइट पर खरीदारी के बाद ही पेमेंट करें
– जॉब फ्रॉड के मामलों में भी किसी तरह के झांसे में न आएं
– कस्टमर केयर पर नंबर सर्च करने के लिए गूगल आदि सर्च इंजन का प्रयोग न करें
– संबंधित वेबसाइट पर जाकर ही कस्टमर केयर का नंबर देखें
– घर बैठे लॉटरी या अन्य किसी ऑफर के झांसे में न आएं
– यूपीआई, फोन पे, गूगल पे का इस्तेमाल करते वक्त ध्यान रखें
– किसी को अपना एम पिन न बताएं
– रजिस्ट्रेशन के नाम पर 10, 20 या छोटी रकम के लाचल में न आएं
– किसी भी लिंक, मैसेज पर कभी न क्लिक करें

“साइबर ठग अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपने झांसे में ले रहे हैं। मौजूदा समय में साइबर ठग ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में छोटी-छोटी रकम कर ट्रांसफर कर रहे हैं। इसकी वजह से रकम वापस कराने में देरी होती है।” -डा. त्रिवेणी सिंह, एसपी साइबर उत्तर प्रदेश

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