मुरादाबाद: मां ने बेटे का माथा चूमा तो बेटे ने मां को पहना दी कैप
मुरादाबाद,अमृत विचार। हर मां का सपना होता है कि अपने बेटे को तरक्की के रास्ते पर चलते देखे। अगर वह बेटा इन रास्तों पर आने वाली हर मुसीबत को निडर होकर पार करके अपना नाम ऊंचा करता है तो मानों मां की हर मुराद पूरी हो जाती है। कुछ ऐसे ही गौरवशाली क्षण मुहैया कराए …
मुरादाबाद,अमृत विचार। हर मां का सपना होता है कि अपने बेटे को तरक्की के रास्ते पर चलते देखे। अगर वह बेटा इन रास्तों पर आने वाली हर मुसीबत को निडर होकर पार करके अपना नाम ऊंचा करता है तो मानों मां की हर मुराद पूरी हो जाती है। कुछ ऐसे ही गौरवशाली क्षण मुहैया कराए इटावा के सैफनी निवासी अंकित यादव ने। एक साल के कठिन प्रशिक्षण के हर पड़ाव को अपने हुनर से से जीतने वाले अंकित यादव को सर्वांग सर्वोत्तम चुना गया।
बेटे को सर्वांग सर्वोत्तम का तमगा मिलने की जानकारी सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठी उसकी अधेड़ मां को हुई तो वह भी इस पल का गवाह बनने के लिए परेड ग्राउंड पहुंच गई। अपने तीन अन्य बेटे व देवर के साथ परेड ग्राउंड पहुंची मां देवेंद्री देवी ने जब अंकित को वर्दी में देखा तो वह अपने आंसू नहीं रोक सकी। खुशी में छलके आंसू काफी देर तक उसकी आंखों से निकलते रहे।
जैसे ही परेड खत्म होने के बाद अंकित ने मां के पैर छुए तो वह दुलार करने लगी। कभी बेटे का माथा चूमती तो कभी हाथ, दुलार के बीच कभी अंकित अपनी मां को कैंप पहनाता तो भी मां।
अंकित यादव मूलत: इटावा जिले के सैफई स्थित कंटीहार का रहने वाला है। मथुरा में पोस्टिंग के दौरान हार्ट अटैक आने से उसके पिता की मौत हो गई थी। पिता की मौत के बाद अंकित की मां देवेंद्री देवी, उसके भाई नितेश, अनुज और अंकुर मानो टूट गए। बाद में मृतक आश्रित में नौकरी के लिए परिजनों ने अंकित का नाम भेजा। 30 दिसंबर 2020 को पुलिस की बारीकियां सीखने के लिए अंकित ने डा. भीमराव अंबेडकर पुलिस अकादमी में आमद करा ली।
तीनों बेटे और देवर के साथ पहुंची परेड देखने
एक साल तक चले प्रशिक्षण में बेटे अंकित को सर्वांग सर्वोत्तम का तमगा मिलने की जानकारी जब मां देवेंद्री देवी को हुई तो वह गौरवशाली पल को देखने के लिए अपने बेटे नितेश, अनुज, अंकुर और देवर रामवीर सिंह यादव के साथ शुक्रवार की सुबह ही परेड पहुंच गई। परेड शुरू होने के साथ ही टकटकी लगाकर वह अपने बेटे को देखती रही। परेड खत्म होने के बाद अंकित जब अपनी मां के पैर छुए तो मानों उनके सब्र का बांध टूट गया। आंखों से निकलते आंसुओं के बीच वह बेटे को दुलार करने लगी। वहीं अंकित ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आईपीएस अफसर बनकर वह पिता के सपने को पूरा करना चाहता है, इसके लिए प्रयासरत रहेगा।
