बरेली: तीन साल के लेखा-जोखा का लिया हिसाब, कई अधिकारी रहे गायब
अमृत विचार, बरेली। विधानसभा परिषद की दैवीय आपदा प्रबंधन जांच समिति ने शनिवार दोपहर कलेक्ट्रेट सभागार में कोविड काल और कई बिंदुओं पर तीन साल के लेखा-जोखा की समीक्षा की। बरेली और शाहजहांपुर में कोविड जांच कराने से लेकर लोगों को कई मदों में राहत पहुंचाने और विभिन्न हादसों के जरिए हुई जनहानि पर सरकार …
अमृत विचार, बरेली। विधानसभा परिषद की दैवीय आपदा प्रबंधन जांच समिति ने शनिवार दोपहर कलेक्ट्रेट सभागार में कोविड काल और कई बिंदुओं पर तीन साल के लेखा-जोखा की समीक्षा की। बरेली और शाहजहांपुर में कोविड जांच कराने से लेकर लोगों को कई मदों में राहत पहुंचाने और विभिन्न हादसों के जरिए हुई जनहानि पर सरकार की योजना के तहत आर्थिक सहायता दिलाने के मामलों में अधिकारियों से सवाल किए।
बैठक में बेसिक शिक्षा, विद्युत विभाग, आबकारी अधिकारी, आंवला एसडीएम समेत कई अधिकारियों के उपस्थित नहीं रहने पर समिति ने नाराजगी जताई। समिति के सदस्यों ने कहा कि हाई पावर कमेटी की बैठक को अधिकारी हल्के में ले रहे हैं। बीएसए विनय कुमार की जगह खंड शिक्षा अधिकारी के आने पर कड़ा एतराज जताया। कहा कि बीएसए बीईओ को भेजकर सदन की मर्यादा गिरा रहे हैं।
समिति ने दोपहर 12.15 बजे से समीक्षा शुरू की। एडीएम वित्त को तहसीलवार कोविड जांच कराने को सेंटर बनाने की जानकारी देने को कहा। एसीएमओ डा. अशोक कुमार ने बताया कि 36 सेंटरों पर कोविड जांच कराई जा रही है। पौने पांच लाख लोगों की कोविड जांच कराई जा चुकी है। 14296 लोग अब तक संक्रमित हो चुके हैं। 164 की जान गई। 1.1 प्रतिशत मृत्युदर बरेली में है। शाहजहांपुर के स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि 27 सेंटरों पर जांच कराई है। 232487 लोगों की जांच हो चुकी है।
इसमें से 6864 संक्रमित हुए। 112 लोगों की संक्रमण से मौत हुई। दोनों जिलों ने वैक्सीनेशन की तैयारी पूरी होने की बात कही। शाहजहांपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी आने के सवाल पर अधिकारी ने बताया कि फैकल्टी पूरी हो चुकी है। बैठक के दौरान समिति सुरेश कुमार, हीरालाल यादव और बरेली-मुरादाबाद स्नातक क्षेत्र के एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त के अलावा एडीएम सिटी महेंद्र कुमार सिंह, डीएफओ भरतलाल समेत कई अधिकारी उपस्थित रहे।
तीन साल में कई तरह से लोगों की जान गईं, मुआवजा भी मिला
जिला आपदा प्रबंधन बरेली ने बताया कि तीन साल में बिजली गिरने से नवाबगंज में एक, फरीदपुर में तीन, मीरगंज में एक जनहानि हुई। सभी को पांच-पांच लाख रुपये आर्थिक सहायता दी गई। विद्युत विभाग के एसई देहात तारिक जलील ने बताया कि वर्ष 16-17 में 30, 19-20 में 25 और 20-21 में 13 हाईटेंशन लाइन और ट्रांसफार्मर से जनहानि हुई।
आश्रितों को 1.69 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी। सर्पदंश से बहेड़ी में तीन, नवाबगंज में दो, फरीदपुर में पांच और मीरगंज में चार जनहानि हुई हैं। मृतकों के आश्रितों को आठ लाख रुपये आर्थिक मदद दी। नदी में डूबने से बहेड़ी में चार, नवाबगंज में एक, फरीदपुर में सात, मीरगंज में दो लोगों की मौत हुई। इनके आश्रितों को चार लाख रुपये मदद दी गई। जिले में जंगली जानवरों से बहेड़ी में दो, फरीदपुर में दो और मीरगंज में एक की जान गई।
बताया कि तीन सालों में बाढ़, ओलावृष्टि, आंधी, पेड़ गिरने और अग्निकांड की 38 घटनाएं हुई हैं। इसमें बरेली में चार, बहेड़ी में पांच, आंवला में पांच, नवाबगंज में 18, फरीदपुर में तीन, मीरगंज तहसील में तीन घटनाओं में कई जनहानि व लोगों को आंशिक चोटें आई हैं। 76.25 लाख रुपये का मुआवजा लोगों के आश्रितों को दिया गया है।
पौन घंटे की समीक्षा में अधिकारियों के छूट गए पसीने
पौन घंटे तक चली समीक्षा में कई अधिकारियों के पसीने छूट गए। समिति के सवालों के सही तरीके से जवाब नहीं दे सके। विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता देहात (एसई) तारिक जलील को 16 जनवरी को लखनऊ तलब करने का फरमान हुआ। तब एसई बैठक में दौड़े-दौड़े आए। सभापति सर्किट हाउस आ गए तो वहां भी एससी पहुंच गए और वीसी चलने की वजह से बैठक में नहीं आने की बात कही। बहरहाल, उन्हें लखनऊ जाने से मोहलत मिल गई।
सभापति बोले-डीएम और एसएसपी का बैठक में होना जरूरी
जांच समिति के सभापति रणविजय सिंह ने बैठक की समीक्षा के बाद कहा कि महत्वपूर्ण बैठक में डीएम और एसएसपी का होना भी जरूरी है। जांच समिति इसलिए दौरा कर रही है कि सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन ठीक से हो रहा है या नहीं। डीएम-एसएसपी को थाना दिवस में जाना था, इसलिए वे सर्किट हाउस में मिलने आए और दिवस में जाने की इजाजत लेकर गए। जो इस बैठक में नहीं आए वे समिति की गरिमा नहीं समझ रहे हैं। उन्हें समिति की पावर को समझने की जरूरत है।
