बरेली: सेटेलाइट ओवरब्रिज- संचालन की राह के रोड़े हटने लगे

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। सेटेलाइट ओवरब्रिज तैयार है। विद्युत लाइन शिफ्ट हो जाए तो यातायात संचालन भी शुरू करा दिया जाएगा लेकिन बिजली विभाग की अनदेखी की वजह से ओवरब्रिज चालू नहीं हो पा रहा है। अधिकारियों को अप्रैल तक विद्युत लाइनें शिफ्ट करने का समय दिया गया है। रविवार दोपहर बाद ओवरब्रिज की चपेट से …

अमृत विचार, बरेली। सेटेलाइट ओवरब्रिज तैयार है। विद्युत लाइन शिफ्ट हो जाए तो यातायात संचालन भी शुरू करा दिया जाएगा लेकिन बिजली विभाग की अनदेखी की वजह से ओवरब्रिज चालू नहीं हो पा रहा है। अधिकारियों को अप्रैल तक विद्युत लाइनें शिफ्ट करने का समय दिया गया है। रविवार दोपहर बाद ओवरब्रिज की चपेट से हाईमास्ट लाइट को बुल्डोजर से खंभे सहित हटा दिया गया।

ओवरब्रिज की राह में विद्युत लाइनें अड़ंगा डाले हुए हैं। सेतु निगम की ओर से विद्युत लाइनें शिफ्ट कराने के लिए बिजली विभाग को 9.94 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। पिछले दिनों बरेली दौरे पर आए नोडल अधिकारी नवनीत सहगल ने लंबित विकास कार्यों के बड़े प्रोजेक्टों की समीक्षा की। उन्होंने विद्युत विभाग के अधिकारियों को लाइनें शिफ्ट न होने पर कसा और अप्रैल तक हर हाल में लाइनें शिफ्ट करने के कड़े निर्देश जारी किए।

बता दें कि 36.51 करोड़ रुपये की लागत से ओवरब्रिज का निर्माण कराया गया है। पहले इस ओवरब्रिज की लागत 26.51 करोड़ रुपये थी लेकिन पुनरीक्षित बजट में 10 करोड़ रुपये अधिक की वित्तीय स्वीकृति मिल गई थी।

लालफाटक ओवरब्रिज: कैंट की भूमि पर ओवरब्रिज निर्माण को नहीं मिली एनओसी
कैंट की ओर से लालफाटक ओवरब्रिज का निर्माण टेढ़ी खीर बन गया है। रक्षा मंत्रालय से एनओसी नहीं मिलने से निर्माण कार्य फंसा है। इससे माना जा रहा है कि वर्ष 2021 में भी ओवरब्रिज का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाएगा। 28 दिसंबर, 2020 को बरेली दौरे पर आए जिले के नोडल अधिकारी एवं अपर मुख्य सचिव (सूचना) नवनीत सहगल ने बताया था कि रक्षा मंत्रालय में उनकी बात हो गई है। सात दिन में एनओसी जारी हो जाएगी। इससे माना जा रहा था कि जनवरी के पहले सप्ताह तक एनओसी जारी होने पर निर्माण शुरू हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

इधर, सेतु निगम के डीपीएम बीके सेन ने बताया कि एनओसी न मिलने से कैंट की तरफ वाला ओवरब्रिज के हिस्से का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। रक्षा मंत्रालय में मामला फंसा है। बता दें कि लालफाटक क्रासिंग पर वर्ष 2016 में राज्य सरकार ने ओवरब्रिज स्वीकृत किया था। ओवरब्रिज का कुछ हिस्सा कैंट क्षेत्र की जमीन पर बनना है। रक्षा मंत्रालय से एनओसी लेने के लिए अगस्त 2017 में रक्षा संपदा विभाग की तरफ से संयुक्त सर्वे कराया गया। तब एनओसी के लिए प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय भेजा गया।

एनओसी के लिए केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, सांसद धर्मेंद्र कश्यप रक्षामंत्री से मिल चुके हैं। हर बार जल्द एनओसी जारी होने का दावा हुआ लेकिन अभी तक एनओसी मिल नहीं पाई है। 84 करोड़ रुपये की लागत से 980 मीटर लंबा ओवरब्रिज निर्माणाधीन है। हालांकि, रेलवे ने ओवरब्रिज के अपने हिस्से वाले क्षेत्र में कार्य शुरू कर दिया है लेकिन कार्य लेटलतीफी से कराया जा रहा है।

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