बरेली जोन के ज्यादातर लोग फांसी लगाकर दे रहे जान

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली, अमृत विचार। आत्महत्या के अलग-अलग कारण होते हैं। कोई बीमारी तो कोई घरेलू कलह या प्रेम प्रसंग में अपनी जान दे देता है। यहां तक कि आर्थिक तंगी में भी लोग आत्महत्या को मजबूर हो जाते हैं। कोरोना काल में रोजगार छिनने के दौरान ऐसा ही देखने को मिला। परेशान व्यक्ति आत्महत्या करने का …

बरेली, अमृत विचार। आत्महत्या के अलग-अलग कारण होते हैं। कोई बीमारी तो कोई घरेलू कलह या प्रेम प्रसंग में अपनी जान दे देता है। यहां तक कि आर्थिक तंगी में भी लोग आत्महत्या को मजबूर हो जाते हैं। कोरोना काल में रोजगार छिनने के दौरान ऐसा ही देखने को मिला। परेशान व्यक्ति आत्महत्या करने का तरीका ढूंढता है। लोगों को सबसे आसान तरीका फंदा लगाकर जान देना ही लगता है।

आईजी परिक्षेत्र राजेश कुमार पांडेय के द्वारा परिक्षेत्र के जिलों से तैयार कराई गई रिपोर्ट में यही चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। परिक्षेत्र में एक साल में 411 आत्महत्या करने वालों में से 310 लोगों ने फंदा लगाकर जान दी है। इसके अलावा रात की जगह दिन में ज्यादा लोगों ने आत्महत्या की। आईजी आत्महत्या के मामलों को लेकर अध्ययन कर रहे हैं ताकि भविष्य में जागरूकता के माध्यम से मामलों को रोका जा सके। परिक्षेत्र के पुलिस अधिकारियों को भी इस संबंध में लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए जाएंगे।

आईजी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि बरेली परिक्षेत्र में बीते वर्ष के आत्महत्या के मामलों की रिपोर्ट तैयार करायी जा रही है जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सबसे चौंकाने वाला तथ्य है कि 70 फीसदी से ज्यादा लोगों ने फंदा लगाकर अपनी जान दी है। इसकी वजह साफ है कि फंदा लगाकर जान देने में लोगों को आसानी रहती है। लगभग हर घर में रस्सी, दुपट्टा या अन्य ऐसा कोई कपड़ा या वस्तु होती है जिससे लोग आसानी से फंदा बना लेते हैं और फिर कुंडे या पंखे से लटक जाते हैं।

दूसरे नंबर पर 46 लोगों ने शस्त्र का इस्तेमाल करके जान दी है। इसकी वजह है कि ऐसा उन लोगों ने ही किया जिनके घर में शस्त्र रहा होगा। आग लगाकर, ट्रेन के सामने कूदकर और नदी में कूदकर जान देने वालों की संख्या काफी कम है। इन तरीकों से जान देना आसान नहीं है।

रिपोर्ट में सामने आया कि परिक्षेत्र में आत्महत्या के 411 मामलों में 241 ने दिन में तो 170 ने रात के समय आत्महत्या की। आईजी ने बताया कि ऐसे में लोगों को अपने परिवार के सदस्यों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। वे किसी तरह की टेंशन में तो नहीं हैं। यदि हैं तो उनसे अच्छे से बात करनी चाहिए। उन पर नजर रखनी चाहिए। घर में ऐसी वस्तुओं को नहीं रखना चाहिए जिनसे लोग आसानी से आत्महत्या कर सकें।

आई ने पहले भी तैयार कराई थी रिपोर्ट
आईजी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि कई वर्ष पहले उन्होंने लखनऊ में आत्महत्या के मामलों की रिपोर्ट तैयार करायी थी जिसमें धर्म, जाति, उम्र, घटना के स्थान, ऋ तु आदि के आधार पर आत्महत्या का रिकार्ड तैयार कराया था। इसके अलावा शैक्षिक स्तर की भी जांच की गई थी। उस वक्त यह भी देखने में आया था कि सिर्फ पांच फीसदी मामलों में सुसाइड नोट प्राप्त हुआ था। यहां तक कि 50 फीसदी मामलों में रिपोर्ट ही दर्ज नहीं की गई थी।

संबंधित समाचार