बरेली: प्रतियोगिता हुई नहीं, स्विमिंग पूल की मरम्मत पर खपा दिए करोड़ों रुपये
अमृत विचार, बरेली। स्पोर्ट्स स्टेडियम के स्विमिंग पूल की मरम्मत पर करोड़ों रुपए खर्च करने पर विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं। कोरोना के चलते पिछले लगभग एक साल से यहां कोई भी तैराकी प्रतियोगिता आयोजित नहीं की गई। वहीं, एक साल पहले एक करोड़ रुपये पूल की मरम्मत के …
अमृत विचार, बरेली। स्पोर्ट्स स्टेडियम के स्विमिंग पूल की मरम्मत पर करोड़ों रुपए खर्च करने पर विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं। कोरोना के चलते पिछले लगभग एक साल से यहां कोई भी तैराकी प्रतियोगिता आयोजित नहीं की गई। वहीं, एक साल पहले एक करोड़ रुपये पूल की मरम्मत के नाम पर खर्च करने की भी बात कही जा रही है।
अब सवाल यह उठता है कि अगर सालभर पहले ही एक करोड़ रुपये से पूल की मरम्मत की गई थी और एक साल के भीतर पूल में कोई प्रतियोगिता भी नहीं हुई तो फिर मरम्मत की आवश्यकता क्यों पड़ी? मरम्मत पर कोई छोटी-मोटी राशि नहीं बल्कि करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष ने क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी पर जनता के पैसों की बंदरबाट करने समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोमवार को इस संबंध में जिलाधिकारी नितीश कुमार को संबोधित ज्ञापन भी एसीएम प्रथम रोहित यादव को सौंपा। इसमें प्रकरण की गोपनीय जांच कराने की मांग की है।
संगठन के महानगर अध्यक्ष रामकृष्ण शुक्ला ने शिकायत में कहा है कि स्टेडियम के स्विमिंग पूल निर्माण को इस बार 2.62 करोड़ रुपये का बजट भेजा गया है। पिछले साल एक करोड़ रुपये भेजे गए थे। उन्होंने बताया कि खेल संगठनों से मिली शिकायत के मुताबिक पिछले साल मिली एक करोड़ की धनराशि डकार कर कागजों में पूल का कायाकल्प दर्शा दिया गया जबकि हकीकत में लाकडाउन और कोरोना काल की वजह से पूरे साल कोई प्रतियोगिता ही नहीं हुई। बिना प्रतियोगिता के टाइल्स कैसे टूटी और अब मरम्मत की आवश्यक्ता क्यों पड़ी? इस तरह के तमाम सवाल किए हैं।
महानगर महामंत्री दीपक द्विवेदी ने स्थानीय स्तर पर प्रकरण की जांच में लापरवाही पर लखनऊ में मुख्यमंत्री से शिकायत की बात कही है। इधर, महिला मोर्चा की अध्यक्ष राशि पाराशरी ने भी निर्माणाधीन पूल की गुणवत्ता और लंबे समय बाद भी कोच नियुक्त नहीं करने पर सवाल खड़े किए हैं।
इसके अलावा चार सूत्रीय मांग पत्र में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के हिसाब से पूल की गुणवत्ता ध्यान में रखते हुए कार्य करने, नवीन मरम्मत कार्य पूरी ईमानदारी के साथ किसी सक्षम अधिकारी की देखरेख में कराने, स्विमिंग पूल की शुरुआत से पूर्व कोच नियुक्त करने, नये बजट को किस-किस मद में खर्च करना है उसे सार्वजनिक करने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में राघवेंद्र वर्मा, अनिल राजपूत, उपासना पाठक, विक्की पाल, राजेश कुमार, विष्णु शुक्ला, सोनू मौर्या, संजय शर्मा आदि मौजूद रहे।
स्विमिंग पूल में 2017 से अब तक कोई प्रतियोगिता नहीं हुई है। पिछले साल मिला बजट अब खर्च हो रहा है। पहले स्विमिंग पूल की मरम्मत की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था पैकफेड पर थी बाद में निर्माण कार्य में गुणवत्ता ठीक नहीं मिलने पर कार्यदायी संस्था सिडको को जिम्मेदारी सौंप दी गई। दो महीने पहले कार्य शुरू हो चुका है। पिछले साल का बजट अब खर्च किया जा रहा है। – विजय कुमार, आरएसओ
