बरेली: लाकडाउन के एक-एक हजार रुपये पाने से वंचित रह गए हजारों श्रमिक

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अमृत विचार, बरेली। 32 दिन पूर्व पुनर्गठन होने के बाद जिला श्रम बंधु समिति की मंगलवार को पहली बैठक हुई, जिसमें कर्मचारियों और श्रमिकों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने के मामले छाए रहे। प्रतिनिधियों ने लाकडाउन के दौरान श्रम विभाग में पंजीकृत हजारों श्रमिकों को एक हजार रुपये की दूसरी किश्त …

अमृत विचार, बरेली। 32 दिन पूर्व पुनर्गठन होने के बाद जिला श्रम बंधु समिति की मंगलवार को पहली बैठक हुई, जिसमें कर्मचारियों और श्रमिकों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने के मामले छाए रहे। प्रतिनिधियों ने लाकडाउन के दौरान श्रम विभाग में पंजीकृत हजारों श्रमिकों को एक हजार रुपये की दूसरी किश्त नहीं मिलने का मामला जोरशोर से उठाया गया।

सिनेमा कर्मचारी संघ ने मांग रखी कि श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिक योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवेदन निर्धारित समय सीमा के अंदर प्रस्तुत नहीं कर सकें हैं, ऐसे प्रकरणों में उनके विलंब से एक वर्ष की छूट दिलाई जाए। रबर फैक्ट्री के कर्मचारियों का बकाया दिलवाने का मुद्दा भी उठा।

समिति के अध्यक्ष/जिलाधिकारी नितीश कुमार की अध्यक्षता में दोपहर 12:30 बजे बैठक शुरू हुई। लाकडाउन के दौरान एक-एक हजार रुपये की धनराशि कुछ श्रमिकों को अभी तक नहीं मिलने का मामला गूंजा। श्रम विभाग के अधिकारी ने कहा कि 31 मार्च, 2020 तक जिन श्रमिकों का पंजीकरण था। उन्हें लाभ दिया जा चुका है।

कागजात पूरे नहीं होने पर कुछ लोग लाभ से वंचित रह गए हैं। मार्च के बाद जिनका नवीनीकरण नहीं हुआ। उन्हें एक हजार रुपये की दूसरी किश्त नहीं दी गई है। रबर फैक्ट्री (सिन्थेटिक एंड केमिकल्स) के 1999 में बंद होने के बाद बड़ी संख्या में कर्मचारियों का वेतन नहीं मिलने का मामला भी उठा।

270 करोड़ रुपये की धनराशि दिलाने की मांग की। यह भी कहा कि आरसी जारी हो तो श्रम विभाग क्यों मिल प्रबंधन पर कार्रवाई नहीं कर रहा है। डीएम ने कर्मचारियों को बाम्बे हाईकोर्ट में पक्षकार बनने की बात कही, तब यह बात उठी कि फैक्ट्री के कर्मचारियों के सामने घर खर्च चलाना मुश्किल है, ऐसे में केस कैसे लड़ पाएंगे। डीएम ने श्रम विभाग के अधिकारी को मामले में अपनी ओर से कार्रवाई कराने के निर्देश दिए।

सिनेमा कर्मचारी संघ के सचिव हरिशंकर कनौजिया ने सिनेमाघरों में काम करने वाले वर्करों को लाकडाउन की सही सुविधा का लाभ नहीं मिलने का मामला उठाया। उन्हें लाभ दिलवाने की मांग की। अटल बीमा योजना का लाभ नहीं मिलने की बात कही। बैठक में यूपी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष/ बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति डा. केशव कुमार अग्रवाल, संयुक्त आयुक्त उद्योग ऋ षि रंजन गोयल, अजीत कन्नौजिया, रमेश चंद्रा, जगदीश चंद्र, नितिन कुमार गंगवार, राकेश चंद्र अग्रवाल, रुपेश कुमार, राजेश कुमार सक्सेना, अजय भट्ट आदि अधिकारी और श्रमिक संघ, उद्योग संघ के प्रतिनिधि मौजूद थे।

मजदूरों के लिए शेड बनाने का मामला गूंजा
प्रदेश उपाध्यक्ष इंटक सतीश चंद्र मेहता ने ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्र में मजदूरी करने आने वाले मजदूरों के मामला जोरशोर से उठाया। बताया कि कुतुबखाना, श्यामगंज, किला, डीडीपुरम, बीसलपुर चौराहा, बदायूं रोड समेत कई अन्य ऐसे स्थान हैं, जहां पर सुबह तड़के दो वक्त की रोटी के जुगाड़ के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से मजदूरी करने लोग पहुंच जाते हैं। बड़ी संख्या में कई घंटे खड़े रहने पर उन्हें निराशा हाथ लगती है।

डीएम ने योजना का लाभ देने में तेजी लाने के दिए निर्देश
डीएम ने श्रमिकों के कल्याण के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। योजनाओं के सफल क्रियान्वयन पर उप श्रमायुक्त अनुपमा गौतम की सराहना की। चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 में अब तक 42579 श्रमिकों का पंजीकरण हो चुका है। लाभान्वित कार्यों में और अधिक तेजी लाने के निर्देश दिए। सीडीओ चंद्रमोहन गर्ग ने बताया कि अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय भूमि राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं हो पाती है। इस कारण श्रमिकों को आवास सहायता योजना का लाभ मिलने में समस्या आती है।

ये हैं श्रम विभाग की प्रमुख योजनाएं
मातृत्व, शिशु एवं बालिका प्रोत्साहन योजना, मेधावी छात्र पुरस्कार योजना, कामगार गम्भीर बीमार सहायता योजना, अन्त्येष्टि सहायता योजना, पुत्री विवाह अनुदान योजना, आवास सहायता योजना, संत रविदास शिक्षा सहायता योजना, आपदा राहत सहायता योजना, निर्माण कामगार मृत्यु, विकलांगता सहायता एवं अक्षमता पेंशन।

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