बरेली: कलाकारों को नहीं भा रही मुख्यमंत्री की ‘माटीकला’

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अमृत विचार, बरेली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में शुमार माटीकला योजना माटी कलाकारों को नहीं भा रही है। जिले के कलाकार इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। योजना के तहत लाभ पाने के लिए पिछले करीब छह माह में सिर्फ 18 लोगों ने ही आवेदन किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि तमाम …

अमृत विचार, बरेली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में शुमार माटीकला योजना माटी कलाकारों को नहीं भा रही है। जिले के कलाकार इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। योजना के तहत लाभ पाने के लिए पिछले करीब छह माह में सिर्फ 18 लोगों ने ही आवेदन किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि तमाम कोशिशों के बाद भी योजना का लाभ लेने के लिए माटी कलाकार या अन्य लाभार्थी नहीं मिल रहे हैं।

जनपद में बड़े मॉल और शोरूम पर आधारित बाजार होने की वजह से माटी आधारित उत्पाद पर ब्रेक लग गया है। इससे कुम्हारों की स्थिति दयनीय हो गई है। कुम्हारों, परंपरागत कारीगरों, उद्यमियों और शिल्पकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री माटी कला योजना शुरू की गई।

मंशा थी कि योजना से जुड़कर घरेलू उपयोग के सामान (खिलौने, प्रेशर कुकर, घड़ा, सुराही, जग, कुल्हड़, गिलास, कटोरी, अचारदानी, कप, प्लेट्स, डोंगे) और भवन निर्माण सामग्री (फ्लोर टायल्स, रूफ टायल्स, पाइप, वॉश वेशिन), सजावटी सामान ‘गुलदस्ता, गार्डन पार्ट्स, बोनसाई पार्ट्स, लैंप्स) आदि के उद्योग स्थापित कर उद्यमी आत्मनिर्भर बन सकें।

योजना में प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को दस लाख रुपये तक के प्रोजेक्ट पर बैंक से ऋ ण देने का प्रावधान है। इसमें प्रोजेक्ट लागत का पांच प्रतिशत उद्यमी अंशदान और 95 प्रतिशत लोन मिलेगा जो पांच वर्ष में नियम के अनुसार वापस करना होगा। पूंजीगत ऋ ण राशि का 25 प्रतिशत धन मार्जिन मनी के रूप में विभाग को प्रदान किया जाएगा।

अधिकारियों के मुताबिक, योजना का उद्देश्य व्यक्तिगत इकाइयां स्थापित कराना है। योजना लागू होने के बाद से अब तक 18 आवेदन हुए। विभाग की ओर से इन्हें स्वीकृति के लिए संबंधित बैंक भेजा जा चुका है। इनमें तीन को उद्यम स्थापित करने की मंजूरी बैंक से मिल चुकी है।

प्रचार-प्रसार पर जोर, फिर भी नहीं मिल रहे लाभार्थी
मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली इस योजना के तहत माटी कलाकारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार हर संभव कोशिश कर रही है वहीं, ग्रामोद्योग विभाग के अधिकारी बताते हैं योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों को दिलाने के लिए गांव-गांव प्रचार-प्रसार कराया जा रहा है। योजना के प्रति लोग दिलचस्पी नहीं दिखा रहे।

योजना के लिए राष्ट्रीयकृत और ग्रामीण बैंकों से आर्थिक सहायता प्रदान कराकर उद्योग लगाने के लिए आवेदन मांगे गए हैं। अभी तक मात्र 18 आवेदन ही प्राप्त हुए हैं। योजना के प्रचार-प्रसार करने की तैयारी जोरों पर है। अधिक से अधिक लोगों को योजना का लाभ मिल सके इसका प्राथमिकता पर ध्यान रखा जाता है।
-बीसी वंशीवाल, एडीओ ग्रामोद्योग विभाग

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