बरेली: तो क्या एक ही छात्रा ने कई छात्रों की दी थी परीक्षा

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अमृत विचार, बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में एक ही छात्रा ने कई छात्रों की परीक्षा दी और उसकी वजह से सभी छात्र परीक्षा में पास भी हो गए। इसके बावजूद छात्र परेशान हो रहे हैं। आप सोच रहे होंगे कि यह कैसे हो सकता है? तो हम बताते हैं कि ऐसा एक छात्रा के फोटो का …

अमृत विचार, बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में एक ही छात्रा ने कई छात्रों की परीक्षा दी और उसकी वजह से सभी छात्र परीक्षा में पास भी हो गए। इसके बावजूद छात्र परेशान हो रहे हैं। आप सोच रहे होंगे कि यह कैसे हो सकता है? तो हम बताते हैं कि ऐसा एक छात्रा के फोटो का इस्तेमाल करके किया गया है।

छात्रा की फोटो को कई छात्रों के परीक्षा फार्म में अपलोड किया गया और इसकी वजह से मार्कशीट में भी फोटो उसी की छपकर आयी है। अब जिन छात्रों के अंकपत्र में छात्रा की फोटो छपी है वह अपना अंकपत्र सही कराने के लिए विश्वविद्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। गलती चाहे छात्र की हो या विश्वविद्यालय की, परेशान छात्र ही हो रहे हैं।

विश्वविद्यालय परिसर के बीटेक थर्ड ईयर के छात्र अंकित (परिवर्तित नाम) ने शिकायत की है कि वह बीटेक थर्ड ईयर केमिकल इंजीनियरिंग का छात्र है। उसका दिसंबर माह में परिणाम आया। उसने जब अंकपत्र प्राप्त किया तो उसमें एक छात्रा का फोटो लगा था। अब वह अंकपत्र में संशोधन कराने के लिए चक्कर लगा रहा है।

अंकपत्र में गड़बड़ी की वजह से उसे काफी दिक्कतें हो रही हैं। ऐसा आमिर के साथ नहीं हुआ है बल्कि बीटेक के ही 20 छात्रों के साथ हुआ है। इसके अलावा अन्य छात्रों के साथ भी इसी तरह की समस्या होती है। बीटेक की जिस छात्रा की फोटो छापी गई है वह पढ़ने में काफी अच्छी है। जिन छात्रों ने अंक पत्र में संशोधन के लिए आवेदन दिया है, उनका चार्ट तैयार कर संशोधन किया जा रहा है।

विश्वविद्यालय के सूत्रों की मानें तो ऐसा प्रत्येक वर्ष होता है। कई छात्र कैफे से फार्म भरते हैं। कैफे संचालक गलत जानकारी व फोटो अपलोड कर देते हैं। उसके बाद छात्र फार्म को महाविद्यालय या विभाग से वेरीफाई कराता है। उसमें भी इसे ठीक नहीं किया जाता है। इसके अलावा परीक्षा फार्म भरने के लिए विश्वविद्यालय तिथि निर्धारित करता है। कई छात्र हैं जो निर्धारित समय में फार्म नहीं भर पाते हैं और वेबसाइट लॉक कर दी जाती है। वे छात्र विश्वविद्यालय में अधिकारियों के पास फार्म भरने के लिए चक्कर लगाते हैं। ऐसे छात्रों के फार्म कम्प्यूटर यानी ऑनलाइन विभाग के द्वारा भरवाए जाते हैं।

इस दौरान छात्र का आवेदन फार्म भरने के लिए फोटो न होने पर वहां मौजूद किसी का फोटो लगा दिया जाता है जिसकी वजह से दिक्कत होती है। अब इसे छात्र की गलती कहें या फिर विश्वविद्यालय की लेकिन छात्रों को अंकपत्र सही कराने के लिए काफी दिनों तक चक्कर लगाने पड़ते हैं।

सिर्फ गनीमत यह है कि छात्र को इसके लिए कोई शुल्क चुकाना नहीं पड़ता है। विश्वविद्यालय के प्रोग्रामर नवीन कांत गुप्ता ने बताया कि छात्र आवेदन फार्म भरते हैं और उसके बाद वेरीफिकेशन होता है। ऐसे में गलती छात्रों की होती है। विश्वविद्यालय की इसमें कोई गलती नहीं है।

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