बरेली: महंगी फीस तो चुकानी होगी पर घर के नजदीक पढ़ सकेंगे रोजगारपरक कोर्स
बरेली,अमृत विचार। अब छात्रों को महंगी फीस चुकाकर दूर-दराज के महाविद्यालयों में पढ़ाई के लिए नहीं जाना पड़ेगा। उन्हें उनके घर के नजदीक ही राजकीय महाविद्यालय में दुग्ध उत्पादन, मछली पालन, फार्मेसी, बीएड, बीपीएड, फार्मेसी जैसे अन्य रोजगारपरक पाठ्यक्रम पढ़ने को मिल जाएंगे। शासन के निर्देश पर रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी …
बरेली,अमृत विचार। अब छात्रों को महंगी फीस चुकाकर दूर-दराज के महाविद्यालयों में पढ़ाई के लिए नहीं जाना पड़ेगा। उन्हें उनके घर के नजदीक ही राजकीय महाविद्यालय में दुग्ध उत्पादन, मछली पालन, फार्मेसी, बीएड, बीपीएड, फार्मेसी जैसे अन्य रोजगारपरक पाठ्यक्रम पढ़ने को मिल जाएंगे। शासन के निर्देश पर रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
राजकीय महाविद्यालय में उस क्षेत्र के हिसाब से पाठ्यक्रम संचालित करने को लेकर कुलपति प्रो. केपी सिंह ने मंगलवार को विश्वविद्यालय के स्टाफ एसोसिएशन सभागार में बैठक की। बैठक में कुलपति ने शासन के निर्देशों के अनुपालन के निर्देश संबंधित डीन व विभागाध्यक्षों को दिए।
शासन ने प्रदेश के 13 विश्वविद्यालयों में नवनिर्मित व निर्माणाधीन 74 राजकीय महाविद्यालयों को संबंधित विश्वविद्यालय के क्षेत्र अंतर्गत संघटक महाविद्यालय के रूप में चलाने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में मंगलवार को आयोजित बैठक की शुरुआत में कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा विश्वविद्यालय को भवन एवं जमीन आवंटित की जाएगी। जिस पर महाविद्यालय चलाने के लिए विश्वविद्यालय अपने संसाधनों का उपयोग करते हुए विभिन्न प्रकार के पाठ्यक्रम खोलने एवं चलाने के लिए स्वतंत्र होगा। ये सभी महाविद्यालय स्ववित्त पोषित योजना के तहत चलाए जाएंगे। इस संबंध में सरकार द्वारा एक विस्तृत आख्या मांगी गई है।
मीटिंग में कुलपति द्वारा एक समिति गठित की गई है जिसमें विभिन्न विषयों के वरिष्ठ शिक्षक शामिल हैं जो महाविद्यालयों की स्थिति एवं निर्माण की प्रगति तथा उसे संचालित करने हेतु उपयुक्त पाठ्यक्रम एवं डिग्री/डिप्लोमा सर्टिफिकेट संचालन हेतु अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय को सौंपेगी। इसके लिए शिक्षकों ने बहुत से सुझाव दिए जिसे कुलपति ने धैर्यपूर्वक सुना तथा सभी शिक्षकों से आग्रह किया कि इस संबंध में सभी अपने सुझाव समिति को प्रेषित कर दे।
क्षेत्र की आवश्यकता के आधार पर होंगे पाठ्यक्रम
कुलपति ने कहा कि महाविद्यालयों के सुचारू संचालन के लिए क्षेत्र विशेष में उपलब्ध उद्योगों एवं प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ वहां के परिवेश एवं आवश्यकता के अनुरूप ही पाठ्यक्रमों को तैयार किया जाना आवश्यक है। इससे इन महाविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र अपने आसपास के समाज के लिए अधिक उपयोगी सिद्ध हो सकेंगे। इसके लिए उन्होंने शिक्षकों से उनके सुझाव आमंत्रित किए तथा उन्हें धैर्य पूर्वक सुना। कुछ सुझावों की प्रशंसा भी की। महाविद्यालयों को शुरू करने के लिए कुलपति ने जुलाई 2021 तक समय सीमा पर बल दिया।
मीटिंग के दौरान शिक्षकों ने कुलपति के संज्ञान में इस बात को भी डाला कि अधिकतर महाविद्यालय दूर-दराज के क्षेत्रों में हैं। इनमें संचालित पाठ्यक्रमों का वित्तीय भार विश्वविद्यालय के ही कंधों पर होगा और इसकी पूर्ण जिम्मेदारी भी विश्वविद्यालय पर होगी। कुलपति ने कहा कि यदि फिशरीज, डेयरी उद्योग से संबंधित पाठ्यक्रम कृषि से संबंधित पाठ्यक्रम तथा खेलकूद से संबंधित रोजगारपरक पाठ्यक्रम खोले जाएंगे तो इन महाविद्यालयों को सफलतापूर्वक चलाया जा सकता है। इस बैठक में दूसरे भाग में कुलपति ने यूजीसी, एम.एचआर.डी., प्रदेश सरकार आदि द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में जारी किए गए निर्देशों को लेकर विश्विद्यालय द्वारा किये गए कार्यों का उल्लेख किया।
कुलपति ने बताया कि 8 दिसंबर 2020 की कार्यपरिषद द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप कई निकायों का गठन रुविवि में हो चुका है। इनमें सेंटर फॉर मल्टी लैंग्वेज स्टडीज, रिसर्च सेंटर, इनक्यूबेशन सेंटर, डायरेक्टोरेट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स, ग्रास रूट्स इनोवेशन सेंटर, बौद्धिक संपदा अधिकार प्रकोष्ठ, पूर्व छात्र परिषद(एलुमिनी), अटल सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिसर्च सेंटर, अंतरराष्ट्रीय संबंधों के निदेशालय की स्थापना एवं परामर्श प्रकोष्ठ कंसल्टेंसी सेल आदि शामिल हैं। कुलपति ने सभी वरिष्ठ शिक्षकों से कहा कि वे अपने जूनियर शिक्षकों को अच्छे रिसर्च प्रपोजल बनाने एवं उसे जमा करने के लिए प्रोत्साहित करें एवं किसी भी प्रकार का सलाह एवं सहायता प्रदान करें।
13 विश्वविद्यालयों को 74 महाविद्यालयों की बागडोर
प्रदेश सरकार ने महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली को 14, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय को एक, रज्जू भैया राज्य विश्वविद्यालय प्रयागराज को 3, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ को 11, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी को 09, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी को 4, राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या को 6, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर को 4, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर को पांच छत्रपति साहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर को 3, जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया को एक, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर आगरा विश्वविद्यालय आगरा को 10 और लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ को तीन संघटक महाविद्यालय की बागडोर सौंपी है।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के अंतर्गत ये महाविद्यालय खुलेंगे
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के अंतर्गत राजकीय महाविद्यालय भदपुरा, नवाबगंज, राजकीय महाविद्यालय रिछा बहेड़ी, राजकीय महिला महाविद्यालय बदायूं, राजकीय महाविद्यालय हसनपुर अमरोहा, राजकीय महाविद्यालय फतेहउल्लागंज, ठाकुरद्वारा मुरादाबाद, राजकीय महाविद्यालय, मथाना कांठ मुरादाबाद, राजकीय महाविद्यालय मीरापुर बंगर बिजनौर, ठाकुर रोशन सिंह राजकीय महाविद्यालय, नबादा दरोबस्त, कटरा खुदागंज शाहजहांपुर, सरदार भगत सिंह राजकीय महाविद्यालय, ढाका पुवायां शाहजहांपुर, राजकीय महाविद्यालय अल्लीपुर, पूरनपुर पीलीभीत, राजकीय महाविद्यालय, देवापुर चंदौसी संभल, राजकीय महाविद्यालय कस्बा पट्टी यकीन मुहम्मद सहसवान बदायूं, राजकीय महाविद्यालय रेवड़ी कला, मिलक रामपुर, स्व. श्री रामपाल सिंह राजकीय महाविद्यालय, उसावां, दातागंज, बदायूं।
