बरेली: अखिलेश के मंत्र से मिशन 2022 की रणनीति में जुटे समाजवादी
अमृत विचार, बरेली। मंडलीय कार्यशाला में 2022 का चुनाव जीतने का मंत्र देकर गए अखिलेश यादव के जाते ही सपा नेताओं ने बीजेपी सरकार को चुनौती देने के लिए कमर कस ली है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव में फिर से सत्ता हासिल करने को 2012 से 2017 तक अखिलेश सरकार …
अमृत विचार, बरेली। मंडलीय कार्यशाला में 2022 का चुनाव जीतने का मंत्र देकर गए अखिलेश यादव के जाते ही सपा नेताओं ने बीजेपी सरकार को चुनौती देने के लिए कमर कस ली है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव में फिर से सत्ता हासिल करने को 2012 से 2017 तक अखिलेश सरकार में किए ऐतिहासिक कामों को आधार बनाया जाएगा। जिले में किए गए सभी बड़े विकास कार्यों की लिस्ट तैयार होगी। इस लिस्ट के कामों को बूथ स्तर पर जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा पंफलेट और सोशल मीडिया के माध्यम से भी इन कामों को आम जनता तक पहुंचाने का प्लान तैयार किया है।
अखिलेश यादव से चुनावी मंत्र मिलने के अब समाजवादी पार्टी की कोशिश है न केवल पार्टी का जनाधार मजबूत हो बल्कि वह विपक्षी दलों में चल रही वर्चस्व की जंग में बीजेपी के सबसे मजबूत विकल्प के रूप में उभरकर सामने आए। हाल ही में अखिलेश यादव ने बीएसपी के कुर्मी नेता देवेंद्र गंगवार और दलित नेता विजयपाल को पार्टी में शामिल किया।
पार्टी के सामने अब भी चुनाव से पहले ओबीसी-मुस्लिम समीकरण बनाने की कोशिश है। बताया जाता है पिछले विधानसभा चुनाव में गैर यादव ओबीसी वोटों को अपने पाले में लाकर बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज की थी। अब इसी रणनीति पर तैयारियां चल रही हैं। जिलाध्यक्ष अगम मौर्या का कहना है ‘समाजवादी पार्टी की सरकार ने ‘काम करना है विकास करना है’ के तहत प्रदेश में चार चांद लगाने के काम किया। 2012 से 2017 के बीच हर जिले में यह काम दिख रहे हैं और बोल रहे हैं, लेकिन 2017 से लेकर आज तक बीजेपी ने सिर्फ विकास के नारे को खोखला किया है। लिहाजा अब गांव-गांव बूथों पर सरकार की असलियत बताई जाएगी। शीघ्र ही पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक कर राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिले निर्देशों के क्रम में प्लान बनाया जाएगा।
अखिलेश के दौरे से सतर्क हुई विपक्षी पार्टियां
अखिलेश यादव के दौरे से विपक्षी पार्टियां काफी सतर्क हो गई हैं। शुक्रवार को अखिलेश यादव ने पीलीभीत रोड स्थित हवेली में सपा की मंडलीय कार्यशाला में कृषि कानूनों समेत कई मुद्दों पर बीजेपी सरकार को घेरा था। इसके बाद चुनावी गतिविधियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, इन सबके बीच वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन पिछड़ी जातियों को सपा से दोबारा जोड़ने की है जो समय के साथ पार्टी से दूर चली गई है। अगर यहां के सपा नेता ऐसा कर सकें तो बाइस में बायसाइकिल का नारा सबसे तेज गूंजेगा।
