बरेली: मुंबई व गुरुग्राम की संस्थाओं ने की जांच, चार मिलें पुनर्संचालन को फिट
राकेश शर्मा, बरेली। 12 महीने की जांच पड़ताल के बाद 15 साल से बंद पड़ी चार कताई मिलों को पुनर्संचालित करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। गुरुग्राम और मुंबई की दो एजेसियों से मिलों की तकनीकी जांच कराने के बाद इनके संचालित करने पर मुहर लग गई है। मिलों की मशीनों समेत अन्य स्थितियों …
राकेश शर्मा, बरेली। 12 महीने की जांच पड़ताल के बाद 15 साल से बंद पड़ी चार कताई मिलों को पुनर्संचालित करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। गुरुग्राम और मुंबई की दो एजेसियों से मिलों की तकनीकी जांच कराने के बाद इनके संचालित करने पर मुहर लग गई है। मिलों की मशीनों समेत अन्य स्थितियों को दर्शाते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ धनराशि खर्च कर चार मिलों को चालू करा सकते हैं।
रिपोर्ट के आधार पर बरेली की बहेड़ी, अमरोहा, गाजीपुर की बहादुरगंज और इलाहाबाद की मऊ आइमा मिल को चालू कराने के लिए फाइलें शासन में दौड़ने लगी हैं। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सहकारी कताई मिल्स संघ कानपुर के अधिकारी बरेली पहुंचे और जिलाधिकारी नितीश कुमार और अपर जिलाधिकारी प्रशासन वीके सिंह से मुलाकात कर मिल को चालू कराने के संबंध में चर्चा की।
यूपी सहकारी कताई मिल के सचिव/जनरल मैनेजर एनके मिश्रा द्वारा डीएम को भेजी मेल की कॉपी प्रिंट कराकर जिलाधिकारी को सौंपी। कानपुर से आए संघ के लेबर वेलफेयर ऑफीसर के एस द्विवेदी ने बताया कि वजीर एडवाइजर्स गुरुग्राम व चितियार कन्सल्टिंग इंजीनियर्स मुंबई से प्रदेश की 11 कताई मिलों का भौतिक सत्यापन कराया गया। जिसमें चार मिलों को चालू कराने की सिफारिश की गई।
चार मिलें चालू होंती हैं, तो 10 हजार लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। जिलाधिकारी ने बहेड़ी मिल के पुनर्संचालन को लेकर अपने स्तर से अपर मुख्य सचिव उद्यम से वार्ता करने का आश्वासन दिया है। 1 जनवरी, 2020 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में लखनऊ में कताई मिलों को लेकर बैठक हुई थी। जिसमें बहेड़ी मिल के पुनर्संचालन पर चर्चा हुई थी।
चारों मिलों पर है 342.94 करोड़ रुपये की देनदारी
यूपी को-आपरेटिव सोसाइटीज एक्ट-1995 के तहत दोनों संस्थाओं ने अलग-अलग अध्ययन किया। इसके बाद वाइबिल मिलों की सही स्थिति निकलकर सामने आई। जिसमें बताया कि बहेड़ी मिल पर 127.68 करोड़ रुपये की देनदारी है। ओटीएस द्वारा ब्याज के मद में 38.20 करोड़ रुपये की बजत हुई। इसलिए यूपी को-आपरेटिव सोसाइटीज एक्ट-1995 के तहत 89.48 करोड़ रुपये ही देनदारी शेष है। इसी तरह अमरोहा मिल पर 112.60 करोड़ रुपये है।
33.12 करोड़ रुपये बचत होने पर 79.48 करोड़ रुपये की देनदारी शेष है। मऊ आइमा मिल पर 136.38 करोड़ रुपये की देनदारी में से 35.41 करोड़ रुपये बचत हो गई। 100.97 करोड़ रुपये की देनदारी शेष है। बहादुरगंज मिल पर 98.13 करोड़ रुपये की देनदारी में से 25.12 करोड़ रुपये बचत हो गई तो 73.01 करोड़ रुपये देनदारी रह गई। कुल मिलाकर चारों मिलों पर 342.94 करोड़ रुपये की देनदारी है।
मिलों की रिस्टोरेशन कास्ट में खर्च होंगे 31.16 करोड़ रुपये
दोनों संस्थाओं ने वाइबिल मिलों को संचालित करने के लिए रिस्टोरेशन कास्ट जिसमें भवन, मशीनरी की मरम्मत और मिलों को विद्युत संयोजन के मद में व्यय होगी। रिपेयर बिल्डिंग पर बहेड़ी मिल पर 0.35 करोड़ रुपये, अमरोहा में 2.74 करोड़ रुपये, मऊ आइमा पर 3.03 करोड़ रुपये और बहादुरगंज पर 2.21 करोड़ रुपये व्यय होंगे।
रिपेयर ऑफ प्लांट एवं मशीनरी पर बहेड़ी मिल पर 5.44 करोड़ रुपये, अमरोहा पर 4.85 करोड़ रुपये, मऊ आइमा पर 4.21 करोड़ रुपये और बहादुर गंज मिल पर 4.71 करोड़ रुपये व्यय होंगे। जबकि रिस्टोरेशन ऑफर पॉवर कनेक्शन पर बहेड़ी मिल पर 0.85 करोड़ रुपये, अमरोहा पर 1.02 करोड़ रुपये, मऊ आइमा पर 1.02 करोड़ रुपये और बहादुर गंज मिल पर 0.73 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
