बरेली: चौरी-चौरा कांड की शताब्दी मनाने की तैयारी, खोज रहे गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी
अमृत विचार, बरेली। राज्य सरकार ने चौरी-चौरा कांड का शताब्दी वर्ष समारोह और आजादी की 75वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए बड़े स्तर पर कार्ययोजना तैयार कराई जा रही है। सरकार बरेली समेत सभी जनपदों में गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों को तलाश रही है। भारत-पाकिस्तान, कारगिल युद्ध के अमर शहीदों की …
अमृत विचार, बरेली। राज्य सरकार ने चौरी-चौरा कांड का शताब्दी वर्ष समारोह और आजादी की 75वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए बड़े स्तर पर कार्ययोजना तैयार कराई जा रही है। सरकार बरेली समेत सभी जनपदों में गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों को तलाश रही है।
भारत-पाकिस्तान, कारगिल युद्ध के अमर शहीदों की भी जानकारी एकत्र कराई जा रही है। सोमवार को अपर जिलाधिकारी नगर महेंद्र कुमार सिंह दिनभर किताबों और शहर के बुजुर्ग समाजसेवियों से गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानकारी लेते रहे।
उन्हें यह तो पता चला कि वर्ष 1857 से लेकर 1947 तक 348 स्वतंत्रता सेनानियों के अभिलेख उपलब्ध हैं। उनके नाम, पते भी सूचना विभाग की किताब के साथ अन्य किताबों में उल्लिखित हैं। इनमें वर्ष 1857 की क्रांति के नायक खान बहादुर खां रुहेला का नाम सबसे ऊपर आया। एडीएम सिटी पुरानी जेल के पास खान बहादुर खान के शहीद स्थल गए। पास में ही इनकी मजार भी है।
दोपहर बाद एडीएम सिटी ने वरिष्ठ समाजसेवी जेसी पालीवाल को कार्यालय बुलाकर गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानकारी ली। इतिहासकार गिरिराज नंदन समेत कई अन्य से फोन पर बात की। एडीएम सिटी ने जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालय से शहीद सैनिकों की विस्तृत जानकारी मांगी।
कार्यालय ने वर्ष 1962 से 2012 तक विभिन्न ऑपरेशनों में शहीद हुए 21 जवानों का डाटा एडीएम सिटी को उपलब्ध कराया है। एडीएम सिटी ने बताया कि खान बहादुर शहीद स्थल का सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। फव्वारा, लाइटिंग की व्यवस्था होगी। साथ ही शहीद स्थल की दीवारों पर खान बहादुर की वीरगाथा का चित्रांकन किया जाएगा।
स्वतंत्रता सेनानियों व अमर शहीदों का यह डाटा एकत्र करा रहे
संस्कृति विभाग लखनऊ की ओर से आए पत्र को एडीएम सिटी ने बहेड़ी, आंवला, नवाबगंज, फरीदपुर मीरगंज व सदर के उप जिलाधिकारियों को भेजा है। इसमें कहा गया है कि स्वतंत्रता पूर्व एवं स्वातंत्रता के बाद सन् 1857 से 1922, 1922 से 1947 और 1947 से अब तक के ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण घटनाक्रमों का अभिलेखीकरण, प्रकाशन एवं विश्वविद्यालय के माध्यम से शोध कार्य कराया जाना है।
सौ से ज्यादा अंग्रेजों को मारा था खान बहादुर ने
24 मार्च 1860 की सुबह 1857 क्रांति के नायक खान बहादुर खान को कोतवाली में फांसी दी गई थी। ब्रितानी हुकूमत से लड़ने के जुर्म में उन्हें मौत की सजा दी गई थी। फांसी से पहले उन्होंने ऊंची आवाज में कहा था कि मैंने 100 से ज्यादा अंग्रेजों को मारा था। जांबाज क्रांतिकारी को पुरानी जिला जेल परिसर में एक कब्र में दफन किया गया था। खान बहादुर का जन्म 1791 में हुआ था। खान बहादुर खान रुहेला सरदार हाफिज रहमत खां के वंशज थे। रहमत खां के बेटों में जुल्फिकार अली खां इनके पिता थे। उनका ननिहाल कठेहर में था। पिता के न रहने पर वह बरेली आकर बसे थे। भूड़ मोहल्ले में नवाब के ठेरे पर इनके परिवार की रिहायश थी। इनका विवाह शाहजहांपुर के मीरनपुर कटरा निवासी कमाल की बेटी मुमताज से हुआ था। वह यहां के सदर न्यायाधीश थे।
चौरी चौरा कांड का इतिहास
चौरी चौरा कांड 4 फरवरी 1922 को गोरखपुर जिले के चौरी चौरा में हुआ था। उस दिन असहयोग आंदोलन में भाग लेने वाले प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह पुलिस के साथ भिड़ गया था। जवाबी कार्रवाई में प्रदर्शनकारियों ने हमला किया था और एक पुलिस स्टेशन में आग लगाई थी जिससे उनके सभी कब्जेधारी मारे गए थे। इस कांड में तीन नागरिकों और 22 पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी।
