बरेली: बिजली वितरण के निजीकरण की घोषणा से बिजली कर्मियों में गुस्सा
अमृत विचार, बरेली। सोमवार को पास हुए केंद्रीय बजट में बिजली वितरण के निजीकरण की घोषणा से बिजली कर्मियों में रोष है। साथ ही इनकम टैक्स स्लैब में कोई राहत न मिलने से निराशा भी है। उनका कहना है कि बिजली विभाग के निजीकरण से उपभोक्ताओं की जेब पर इसका बोझ बढ़ेगा। उत्तर प्रदेश राज्य …
अमृत विचार, बरेली। सोमवार को पास हुए केंद्रीय बजट में बिजली वितरण के निजीकरण की घोषणा से बिजली कर्मियों में रोष है। साथ ही इनकम टैक्स स्लैब में कोई राहत न मिलने से निराशा भी है। उनका कहना है कि बिजली विभाग के निजीकरण से उपभोक्ताओं की जेब पर इसका बोझ बढ़ेगा।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के क्षेत्रीय सचिव इंजीनियर रंजीत चौधरी ने बताया कि बिजली वितरण कम्पनियों की मोनोपोली समाप्त करने के नाम पर एक क्षेत्र में एक से अधिक बिजली वितरण कंपनियों के आने का साफ मतलब है कि वर्तमान में सरकारी बिजली कंपनियों के अतिरिक्त निजी कंपनियों को बिजली आपूर्ति का कार्य दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इसके बाद निजी बिजली कम्पनियां सरकारी वितरण कंपनियों के नेटवर्क का बिना कोई निवेश किए प्रयोग करेंगी। इतना ही नहीं, निजी कम्पनियां केवल मुनाफे वाले औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बिजली देंगी और घाटे वाले ग्रामीण व घरेलू उपभोक्ताओं को सरकारी कंपनी घाटा उठाकर बिजली देने को विवश होगी।
इससे पहले ही आर्थिक संकट से कराह रही सरकारी बिजली कंपनियों की माली हालत और खराब हो जाएगी। परिणामस्वरूप किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं पर घाटे का बोझ पड़ेगा। अंततः इन उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी होगी।
बजट में सार्वजानिक क्षेत्र के सम्पूर्ण निजीकरण की घोषणा की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि यह बजट पूरी तरह निजीकरण और कारपोरेट घरानों का बजट है। पहले ही महंगाई भत्ते के फ्रीज होने का दंश झेल रहे कर्मचारियों को इनकम टैक्स में कोई राहत न देना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक है।
