बरेली और मुरादाबाद में रोजाना 13 करोड़ लीटर पानी हो रहा बर्बाद
अमृत विचार, बरेली। बरेली और मुरादाबाद शहर रोजाना 17 करोड़ लीटर भूजल पानी पर निर्भर हैं। जिनमें सिर्फ 4 करोड़ लीटर पानी ही इस्तेमाल में आता है और 13 करोड़ लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। यही वजह है कि यहां का भूजल डार्क जोन की ओर बढ़ रहा है। वन विभाग के सहयोग से …
अमृत विचार, बरेली। बरेली और मुरादाबाद शहर रोजाना 17 करोड़ लीटर भूजल पानी पर निर्भर हैं। जिनमें सिर्फ 4 करोड़ लीटर पानी ही इस्तेमाल में आता है और 13 करोड़ लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। यही वजह है कि यहां का भूजल डार्क जोन की ओर बढ़ रहा है।
वन विभाग के सहयोग से रामगंगा नदी के भूजल संरक्षण पर काम कर रही संस्था डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (विश्वप्रकृति निधि भारत) की प्रोजेक्ट मैनेजर नेहा भटनागर ने इसकी जानकारी बरेली कॉलेज के वनस्पति विज्ञान के छात्रों को विश्व नम भूमि दिवस (वर्ल्ड वेटलैंड डे) पर दीं। वनस्पति विभाग की वानस्पतिक परिषद और विश्वप्रकृति निधि भारत के द्वारा कॉलेज में व्याख्यान माला और पोस्टर प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।
वानस्पतिक परिषद के डा. राजेश गंगवार ने छात्रों को बताया कि यह दिवस नमभूमि के संरक्षण के लिए बनाया गया है। वेटलैंड हमारी धरती के गुर्दे हैं। बारिश का पानी जब बहकर वेटलैंड में आता है तब वेटलैंड उस जल को छानकर भूगर्भ का पुनर्भरण करते हैं।
इन्हें बायोलॉजिकल सुपर मार्केट्स के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह एक वृहद भोजन जाल का निर्माण भी करते हैं। नेहा भटनागर ने बताया कि मुरादाबाद शहर में 90 में से सिर्फ अब 57 तालाब बचे हैं। उन्होंने बताया कि रोजाना एक व्यक्ति करीब 400 लीटर पानी बचा सकता है।
टोंटी के लीकेज से 4 लीटर, डबल फ्लेश के इस्तेमाल से 9 लीटर, कंटेनर में सब्जियां धोने से 10 लीटर, ब्रश करते वक्त टोंटी बंद करने से 40 लीटर, घर की धुलाई के दौरान बाल्टी से पानी इस्तेमाल करके 70 लीटर और नहाने के लिए शाबर की जगह बाल्टी से नहाने से 200 लीटर पानी एक व्यक्ति रोजाना बचा सकता है।
उन्होंने बताया कि बरेली की लीलौर झील का असतित्व मिट रहा है। कार्यक्रम में वनस्पति विभाग के अध्यक्ष डा. आलोक खरे, जंतु विभाग के डा. राजेंद्र सिंह ने वेटलेंट पर छात्रों को जानकारी दी। डा. आलोक खरे ने बताया कि वनस्पति विभाग के गेस्ट टीचर अपूर्वा, बीएससी के छात्र सजग शर्मा, सौरभ, श्रेया, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम के साथ रामगंगा जल संरक्षण पर काम कर रहे हैं।
मंगलवार को टीम के साथ छात्रों ने रामगंगा और लीलौर झील का निरीक्षण किया। रामगंगा के पानी का सैंपल भी छात्रों ने लिया है। लीलौर झील में पक्षियों की प्रजातियों का भी अध्ययन किया गया। छात्र बरेली की सूख चूकी नदियों ,एरिल एवं लीलौर झील के संरक्षण के लिए वनस्पति विभाग के शोध एवं परास्नातक छात्र छात्राएं निरंतर कार्य कर रहे है।
स्नातक छात्रों में जागरूकता के लिए परिषद की निदेशक डॉ शालिनी सक्सेना के निर्देशन में जलसंरक्षण विषय पर एक पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें 36 छात्र छात्राओं ने भाग लिया। पोस्टर प्रतियोगिता में मनीषा भंडारी को प्रथम, सग्मन फातिमा को द्वितीय और मुस्कान खन्ना को तृतीय पुरस्कार मिला।
इसके अलावा विशाल गंगवार और शालिनी शंखधार को भी पुरस्कार दिया गया। कार्यक्रम में डॉ राजीव यादव ,डॉ नीरज पाल मलिक, डॉ नरेंद्र पाल सिंह, डॉ ब्रजेश शर्मा, डॉ दीपक सिंह, एवं अपूर्वा शर्मा के साथ साथ विभाग के 100 से अधिक स्नातक एवं परास्नातक छात्र छात्राओं ने भाग लिया।
