बरेली: बैंक नहीं मान रहे ई-स्टांप, लटक गईं सैकड़ों फाइलें

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

अमृत विचार, बरेली। स्टांप व्यवस्था के निजीकरण के साथ ई-स्टांपिंग व्यवस्था लागू होने से लोगों की मुश्किलें और बढ़ गईं। अव्यवस्था के चलते जहां लोगों को ई-स्टांप नहीं मिल रहे हैं वहीं, कई बैंकों में ई-स्टांप को मान्यता नहीं दी जा रही है जबकि ऋ ण लेने व सरकारी योजनाओं के कार्यों में 10 और …

अमृत विचार, बरेली। स्टांप व्यवस्था के निजीकरण के साथ ई-स्टांपिंग व्यवस्था लागू होने से लोगों की मुश्किलें और बढ़ गईं। अव्यवस्था के चलते जहां लोगों को ई-स्टांप नहीं मिल रहे हैं वहीं, कई बैंकों में ई-स्टांप को मान्यता नहीं दी जा रही है जबकि ऋ ण लेने व सरकारी योजनाओं के कार्यों में 10 और 100 रुपये के स्टांप का ज्यादा चलन है।

कागज वाले 10 और 100 रुपये के स्टांप कुछ ही जगह मिल रहे हैं। ऐसे में लोग परेशानी उठाकर किसी तरह ई-स्टांप ऋ ण लेने समेत अन्य बैंकों के कार्यों में लगा रहे हैं तो कई बैंकों का स्टाफ ई-स्टांप को यह कहते हुए मान्यता नहीं दे रहा है कि उनके पास ई-स्टांप का प्रयोग करने के संबंध में सरकार से कोई सर्कुलर नहीं आया है। लिहाजा, कागज के 10 और 100 रुपये के स्टांप पर ही शपथ पत्र दाखिल करें।

कई सरकारी और अर्द्धसरकारी बैंकों में ई-स्टांप लगाने वाले लोग परेशान हैं। इसकी वजह से सैकड़ों फाइलें लटकी हैं। खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों में ग्रामीणों के सामने कई दिक्कतें हैं। बैंकों से निराश होकर लौटने पर लोग नजदीकी स्टांप विक्रेताओं के पास कागज वाले स्टांप लेने पहुंचते हैं तो उन्हें 10 रुपये का स्टांप 20 से 30 रुपये तक में मिल रहा है। 100 रुपये के स्टांप की कालाबाजारी दो से तीन गुना अधिक पर हो रही है। इसकी कई शिकायतें जिला प्रशासन के पास पहुंचीं लेकिन अधिकारियों ने कार्रवाई करने की बात कही। कार्यालयों से निकलकर जांच करना कभी जरूरी नहीं समझा।

राज्यपाल से शिकायत, आज एडीएम को ज्ञापन देंगे
कचहरी पर दोगुने दाम पर स्टाम्प खुलेआम बेचे जा रहे हैं। स्टाम्प बिक्री में धांधली के खिलाफ बुधवार को एडवोकेट यशेन्द्र सिंह ने राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल के ट्विटर पर शिकायत की। उन्होंने कहा कि ई-स्टाम्प लागू होने के बाद से ई-स्टाम्प के नाम पर अधिक में स्टांप दिए जा रहे हैं। कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वह पत्र भेजकर भी राज्यपाल को इस बाबत अवगत कराएंगे। इससे पूर्व मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करा चुके हैं। एडवोकेट वीपी ध्यानी ने कहा कि शासन ने जिस मंशा से ई-स्टाम्प की व्यवस्था लागू की है उसका अनुपालन नहीं हो रहा है। अवैध रूप से शुल्क वसूला जा रहा है। गुरुवार को इसकी शिकायत एडीएम वित्त एवं राजस्व मनोज कुमार पांडेय से करेंगे।

20 से 30 मिनट का इंतजार, फिर भी जलालत से मिल रहे ई-स्टांप
बरेली। ई-स्टांपिंग व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ाई हुई है। करीब 20 से 30 मिनट में लोगों को ई-स्टांप मिल रहा है। कलेक्ट्रेट चौराहे पर एक ई-स्टांप विक्रेता के यहां ग्राहकों की दिनभर लाइन लगी रहती है। 10 रुपये का ई-स्टांप 22 रुपये में मिल रहा है। जो भी ग्राहक ई-स्टांप लेने पहुंचता है उसे 27 विकल्प का पेपर दिखाते हैं। उसमें देखकर ई-स्टांप का फार्मेट चयन करना पड़ता है। इसके बाद ई-स्टांपिंग की प्रक्रिया शुरू होती है। ई-स्टांप विक्रेता से 22 रुपये में 10 रुपये का स्टांप देने के कारण पूछा तो कहते हैं कि इसमें टाइपिंग के रुपये भी जुड़े हैं।

– ई-स्टांपिंग होल्डिंग एजेंसी पर कोषागार का कोई नियंत्रण नहीं है। एजेंसी अपने हिसाब से लाइसेंस दे रही है। पूर्व में 10 रुपये के स्टांप आए थे। इसकी ज्यादा जानकारी मुख्य कोषाधिकारी को ही मालूम होगी।
-यादवेंद्र पाठक उर्फ नीरज, कोषाधिकारी, बरेली

संबंधित समाचार