बरेली: एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स के ड्राफ्ट पर मांगे सुझाव
बरेली, अमृत विचार। नई शिक्षा नीति के तहत डिग्री पाठ्यक्रम करने वाले छात्र अपनी पढ़ाई का स्कोर क्रेडिट कर सकेंगे। इसके तहत एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (एबीसी) बनाया गया है। इस संबंध में यूजीसी द्वारा गठित समित ने सभी विश्वविद्यालयों से सुझाव मांगे हैं। किस तरह से स्कोर को क्रेडिट किया जाएगा और छात्र इसका …
बरेली, अमृत विचार। नई शिक्षा नीति के तहत डिग्री पाठ्यक्रम करने वाले छात्र अपनी पढ़ाई का स्कोर क्रेडिट कर सकेंगे। इसके तहत एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (एबीसी) बनाया गया है। इस संबंध में यूजीसी द्वारा गठित समित ने सभी विश्वविद्यालयों से सुझाव मांगे हैं। किस तरह से स्कोर को क्रेडिट किया जाएगा और छात्र इसका भविष्य में किस तरह इस्तेमाल कर सकेंगे, इसे लेकर भी सुझाव मांगे गए हैं। इसके तहत रुहेलखंड विश्वविद्यालय को भी कई बदलाव करने होंगे।
नई शिक्षा नीति के तहत तीन साल के डिग्री पाठ्यक्रम में यदि कोई छात्र एक साल का पाठ्यक्रम करता है तो उसे पहले साल में सर्टिफिकेट, दो साल करता है तो डिप्लोमा और तीन साल करने पर डिग्री दी जाएगी। यदि कोई फिर से पढ़ाई शुरू करेगा तो बीच में पढ़ाई शुरू कर सकता है। इसी को लेकर एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स बनाया है। इसका एक ड्राफ्ट तैयार किया गया है। क्रेडिट्स के तहत एक घंटा थ्योरी, एक घंटा ट्यूटोरियल वर्क और दो घंटे लैबोरेटरी वर्क को प्रति सप्ताह जोड़ा जाएगा। यह एक सेमेस्टर के तहत 13 से 15 सप्ताह तक जोड़ा जाएगा।
इंटर्नशिप के लिए प्रति सप्ताह एक क्रेडिट होगा जो अधिकतम 6 क्रेडिट हो सकेगा। इसके तहत छात्र देश के किसी विश्वविद्यालय में अपने एकेडमिक अकाउंट में जोड़े गए क्रेडिट का इस्तेमाल कर सकेगा। छात्र अपनी सुविधा के अनुसार पाठ्यक्रम भी चुन सकेगा। सभी क्रेडिट डिजिटली स्टोर किए जाएंगे।
बरेली कॉलेज के यूजीसी समन्वयक डा. अविनाश अग्रवाल ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। इस पर सुझाव मांगे गए हैं। इससे छात्रों को भविष्य में काफी फायदा मिलेगा। किसी वजह से यदि छात्र की पढ़ाई बीच में रुक जाती है तो बाद में वह अपनी डिग्री पूरी कर सकेगा। जिस तरह से छात्रों का डाटा विश्वविद्यालय में रखा जाता है। इसके लिए उसे एक रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाता है। जब तक छात्र विश्वविद्यालय नहीं छोड़ता है तब तक उसकी आईडी रहती है। इसी तरह से इसे ऑनलाइन तैयार किया जाएगा जिसका पूरे देश के किसी विश्वविद्यालय में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
