अल्मोड़ा: चौखुटिया के इस गांव में 22 ओखल कत्यूरी शासन की दिलाते हैं याद
प्रदीप नेगी,अमृत विचार। समतल पत्थर पर बाईस प्राचीन ओखल खुदे होने की वजह से गांव का नाम ही पड़ गया बाईसओखला। यह गांव चौखुटिया विकास खंड के कलरों क्षेत्र में है। ओखल काफी प्राचीन व पौराणिक हैं। कहते हैं कि ये ओखल 11वीं-12वीं सदी के आसपास कत्यूरी राजाओं शासन काल के हैं। बताते हैं कि …
प्रदीप नेगी,अमृत विचार। समतल पत्थर पर बाईस प्राचीन ओखल खुदे होने की वजह से गांव का नाम ही पड़ गया बाईसओखला। यह गांव चौखुटिया विकास खंड के कलरों क्षेत्र में है। ओखल काफी प्राचीन व पौराणिक हैं। कहते हैं कि ये ओखल 11वीं-12वीं सदी के आसपास कत्यूरी राजाओं शासन काल के हैं। बताते हैं कि यहां लखनपुर किले में कत्यूरी उप राजधानी रही है। बाईसओखला गांव इसी किले से करीब 3 किमी दूर बसा है।
बाईसओखला गांव चौखुटिया बाजार से करीब 5 किमी दूर है। गांव में पहुंचने के लिए डेढ़ किमी पैदल चलना पड़ता है। प्राचीन 22 ओखल गांव के बीच में स्थित 3 मीटर लंबे व 3 मीटर चौड़े समतल पत्थर पर बने हैं। जो एकदम गोलाई में खुदे हैं। इनमें से कोई एक फीट गहरा तो कोई इससे कम गहराई के हैं। जो किसी ड्रिल मशीन से खोदे गए लगते हैं। गांव के वाशिंदे बताते हैं कि ये ओखल कब व क्यों खोदे गए, इस बारे में सही व तथ्यपूर्ण जानकारी नहीं है, लेकिन मान्यता है कि ये 22 ओखल 11 या 12 वीं सदी के आसपास कत्यूरी शासन के दौरान हैं। बाईसओखला अनुसूचित बस्ती है। जहां करीब 35-40 परिवार बसे हैं। बाईसओखला के नाम से करीब वर्ष 1962-63 में ग्राम पंचायत बनी है।
वर्ष 2007 में खुदाई के दौरान मिले ये 22 ओखल
मान्यता है कि लखनपुर किले में कत्यूरी उप राजधानी के दौरान इन ओखलों का निर्माण किया गया। तब कोई सुविधाएं नहीं थीं तो कत्यूरी राजाओं ने धान कूटकर चावल बनाने के लिए इनका निर्माण किया होगा। कालांतर में धीरे धीरे से ये ओखल पत्थर समेत मिट्टी के नीचे दब गए तथा बाद की पीढ़ी को इनकी कोई जानकारी नहीं रही, लेकिन राजस्व अभिलेखों में जब गांव में 22 ओखल होने की बात सामने आई तो इनकी खोजबीन की गई। 24 जुलाई 2007 में ग्रामीणों द्वारा संभावित स्थल की खुदाई की गई तो करीब एक मीटर गहराई में स्थित समतल पत्थर पर ये सभी 22 ओखल मिल गए। इसके साथ ही इन्हें देखने लोगों की भीड़ लग गई तथा दूर-दूर से लोग पहुंचे।
गांव के पास ही है कत्यूरी लखनपुर किला
बाईसओखला गांव से करीब 3 किमी दूर बसे पहाड़ी की चोटी में ऐतिहासिक लखनपुर किला स्थित है। जो 11-12वीं सदी में कत्यूरी राजाओं की उप राजधानी रही है। जहां आज भी कत्यूरी राजधानी के खंडहर भवनों के अवशेष विद्यमान हैं। इसके अलावा उस समय के पहाड़ी में बने सुरंग भी हैं।
पूर्व में से पौराणिक ओखल जमीन में दब गए थे, जिन्हें अब ग्रामीणों के सहयोग से खुदाई कर खोज लिया गया है। जो गांव में धरोहर के रूप में हैं। इन्हें संजोए रखना जरूरी है। इस दिशा में सरकार को कदम उठाने चाहिए।
चिंता राम आगरी, स्थानीय निवासी
पत्थर पर तराशे गए ये ओखल पूर्व में गांववासियों के संज्ञान में नहीं थे। लेकिन वर्ष 2007 में खुदाई के बाद ओखल मिलने से गांव चर्चा में आ गया। सभी 22 ओखल सुरक्षित हैं तथा ओखल ग्रामीणों के आस्था व विश्वास के प्रतीक हैं।
धनी राम आर्य, स्थानीय निवासी
