लखनऊ: ये चंद मामले खोल रहे हैं लेसा में भ्रष्टाचार की परतें
अमित सिंह, लखनऊ। उत्तर प्रदेश पॉवर कार्पोरेशन के मध्यांचल के डिस्कॉम के अंतर्गत आने वाले लेसा में भ्रष्टाचार चरम पर है। यहां के उपभोक्ताओं पर दलालों का शिकंजा तो कसा ही हुआ है। साथ में अभियंता भी दलालों की मुहीम में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए साथ देते हैं। आज आपके सामने अमृत विचार …
अमित सिंह, लखनऊ। उत्तर प्रदेश पॉवर कार्पोरेशन के मध्यांचल के डिस्कॉम के अंतर्गत आने वाले लेसा में भ्रष्टाचार चरम पर है। यहां के उपभोक्ताओं पर दलालों का शिकंजा तो कसा ही हुआ है। साथ में अभियंता भी दलालों की मुहीम में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए साथ देते हैं। आज आपके सामने अमृत विचार लेसा में पनप रहे और हुए भ्रष्टाचार के कुछ उदाहरण बताएगा, जिसके बाद साफ हो जाएगा कि किस तरह से दलाल से लेकर अभियंता तक भ्रष्टाचार को अंजाम देकर उपभोक्ताओं के खून को तो चूस ही रहे हैं, साथ में विभाग के राजस्व को चोट पहुंचा रहे हैं।
केस एक
उपभोक्ता नाम अमित कुमार अग्रवाल, खाता संख्या- 3003100179, इस उपभोक्ता के मीटर में करीब 11 हजार से अधिक की रीडिंग स्टोर रही, लेकिन यहां के दलालों, संविदा कर्मी पंकज शुक्ला के माध्यम से मीटर को बदल दिया गया। यहां पर अभियंताओं के सहयोग से नया मीटर लगा दिया गया। सूत्रों ने बताया इस खेल को अंजाम देने के लिए हजारों रुपये का खेल हुआ।
केस दो
यह प्रकरण राजाजीपुरम का है। उपभोक्ता राइसा बानो पत्नी अब्दुल मजीद निवासी सम्मन गार्डेन, कैंपवेल रोड, राजाजीपुरम। खाता संख्या- 1770611111, उपभोक्ता पर 50 हजार से अधिक का बिल बकाया रहा। आरोप है कि विभागीय कर्मचारियों की मदद से कम यूनिट का बिल बनवाकर मीटर को बदलवा दिया गया।
केस तीन
यह केस भी ऐशबाग खंड का है। यहां पर कनेक्शन पहले रेखा श्रीवास्तव के पति आरके श्रीवास्तव के नाम पर रहा। करीब 27 हजार ज्यादा की स्टोर रीडिंग होने और लाखों रुपये का बकाया होने पर विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से कनेक्शन को रेखा श्रीवास्तव के नाम कर दिया गया। यहां पर भी पंकज शुक्ला की संलिप्तता सामने आई। अब फिर से रेखा श्रीवास्तव खाता संख्या- 2866666666 पर करीब चार लाख रुपये का बकाया हो गया है। लेकिन अभी तक बकाया की वसूली नहीं हो सकी है। बताया जा रहा है कि कनेक्शन नहीं काटे जाने और बकाया वसूली न हो सके, हर महीने उपभोक्ता से वसूली की जा जाती है। आपको यह भी बता दें कि दलालों की मिली भगत से इस कनेक्शन को अपट्रान डिवीजन भी ट्रांसफर कराया गया था। ताकि उपभोक्ता को डिफाल्टर बताकर बिलिंग को रोक दिया जाए।
वहीं एक और सीतापुर डिवीजन में एक मामला सामने आया था, जहां पर सुपरवाइज मीटर रीडरों से वसूली करता दिख रहा था। वीडियो को वायरल होने के बाद अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए कंपनी को सुपरवाइजर को हटाने का निर्देश दे दिया था।
“गलत काम करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा, यदि गलत हुआ है तो दोषियों पर कार्रवाई होगी। मामले की जांच कराई जाएगी।” -प्रदीप कक्कड़, निदेशक (कार्मिक एवं प्रशासन), मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड
