बरेली: चार महीने बाद भी नहीं हो सका क्राइम ब्रांच का पूरा गठन
अमृत विचार, बरेली। क्राइम ब्रांच (एसओजी) को भंग हुए 4 महीने पूरे हो चुके हैं लेकिन अभी तक इसका दोबारा पूरी तरह से गठन नहीं हो सका है। दूसरी ओर नकली क्राइम ब्रांच लोगों को डर दिखाकर टप्पेबाजी कर रहे हैं। बीते दिनों शहर में ऐसी ही दो वारदातें हुईं, जिनमें क्राइम ब्रांच या फिर …
अमृत विचार, बरेली। क्राइम ब्रांच (एसओजी) को भंग हुए 4 महीने पूरे हो चुके हैं लेकिन अभी तक इसका दोबारा पूरी तरह से गठन नहीं हो सका है। दूसरी ओर नकली क्राइम ब्रांच लोगों को डर दिखाकर टप्पेबाजी कर रहे हैं। बीते दिनों शहर में ऐसी ही दो वारदातें हुईं, जिनमें क्राइम ब्रांच या फिर पुलिस अधिकारी के ऑफिस में तैनाती का डर दिखाकर लूट की गई। पुलिस अब तक दोनों मामलों में कोई गिरफ्तारी नहीं कर सकी है।
अक्टूबर में क्राइम ब्रांच की टीम का रिश्वत के बंटबारे का वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो के आधार पर एसएसपी ने पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। उसके बाद पूरी क्राइम ब्रांच को भंग कर दिया था। एसएसपी रोहित सिंह सजवाण ने नए तरीके से क्राइम ब्रांच के गठन करने के आदेश दिए।
इसके तहत क्राइम ब्रांच में आने के लिए आवेदन मांगे गए। इसमें सबसे बड़ी शर्त थी कि व्यक्ति का ईमानदार भी होना चाहिए। कुछ लोगों ने आवेदन किए लेकिन जानकारी का अभाव होने के चलते उनका चयन ही नहीं हो सका। मौजूदा समय में क्राइम ब्रांच में सिर्फ चार लोग हैं।
जिसमें एक इंस्पेक्टर, एक सब इंस्पेक्टर और दो सिपाही हैं। जबकि पहले करीब एक दर्जन लोगों की टीम थी। क्राइम ब्रांच का गठन 7 साल पहले किया गया था। जिसमें ऑपरेशनल, इंवेस्टीगेशन समेत कई विंग बनाई गई थीं। स्वेट टीम भी इसी का हिस्सा थी। बरेली में स्वेट टीम को भी गड़बड़ी करने पर कई साल पहले तत्कालीन एसएसपी ने भंग कर दिया था, उसके बाद से स्वेट टीम का गठन नहीं हो सका।
क्राइम ब्रांच की ऑपरेशनल विंग को भंग हुए 4 महीने हो चुके हैं लेकिन अभी तक इसका पूरी तरह से गठन नहीं हो सका है। जिसकी वजह से बड़े अपराधों के खुलासे में थाना पुलिस और सर्विलांस की टीम को ही जद्दोजहद करनी पड़ती है। टप्पेबाजी या ठगी के अलग तरह के गैंग पकड़ने का काम भी क्राइम ब्रांच करती थी लेकिन अब ऐसा नहीं हो पा रहा है। दूसरी ओर क्राइम ब्रांच का अधिकारी या पुलिसकर्मी बताकर ठगी के मामला कोई पहला नहीं है।
इससे पहले भी ठगी के कई मामले शहर में हो चुके हैं, लेकिन कभी गैंग पकड़ा नहीं गया है। यह गैंग लोगों को सुरक्षा के नाम पर जाल में फंसाता है और फिर उनकी ज्वैलरी या नकदी उतरवाकर अपने पास रख लेता है। उसके बाद लिफाफा बदलकर या तो नकली ज्वेलरी या फिर कागज के टुकड़े नोट की जगह पकड़ा देते हैं।
यह लोगों को इतना डरा देते हैं कि उन्हें घर जाकर सामान देखने की बात कहते हैं और तब तक मौका पाकर फरार हो जाते हैं। प्रेमनगर और कोतवाली एरिया में हुई दोनों वारदातों को भी इसी तरह से अंजाम दिया गया, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
