बरेली: जिस गन्ना प्रजाति ने किया मालामाल अब उसी से ‘तौबा’
अमृत विचार, बरेली। किसान अभी तक बकाया भुगतान को लेकर चिंतित थे, वहीं, अब उनकी मुसीबत और भी बढ़ गई है। किसानों की जेबें भर देने वाली गन्ने की अगेती प्रजाति लाल सड़न नामक बीमारी की चपेट में आ गई हैं। जिसकी वजह से फायदेमंद होने के बावजूद किसान इसे छोड़ने को मजबूर हैं। चीनी …
अमृत विचार, बरेली। किसान अभी तक बकाया भुगतान को लेकर चिंतित थे, वहीं, अब उनकी मुसीबत और भी बढ़ गई है। किसानों की जेबें भर देने वाली गन्ने की अगेती प्रजाति लाल सड़न नामक बीमारी की चपेट में आ गई हैं। जिसकी वजह से फायदेमंद होने के बावजूद किसान इसे छोड़ने को मजबूर हैं। चीनी मिलों भी इस गन्ने की खरीद से साफ इनकार कर रही है। इससे खेतों में खड़ी गन्ने की नकदी फसल को लेकर किसान परेशान हैं। अधिकारी किसानों को इसकी जगह अन्य गन्ना प्रजाति लगाने की अपील कर रहे हैं।
जिले में एक लाख हेक्टेयर करीब गन्ने का रकबा है। इसके बावजूद गन्ना किसान भुगतान में देरी समेत कई अन्य तरह के संकटों से घिरा रहता है। इधर, अब गन्ना किसानों के लिए नई मुसीबत खड़ी हो गई है। जिले में 85 प्रतिशत से अधिक रकबे में 0238 प्रजाति का गन्ना किसानों ने बो रखा है। कुछ किसानों ने दूसरे क्षेत्र से लाकर गन्ना बो दिया।
मगर, अब हालात खराब है। किसानों को सर्वाधिक फायदा पहुंचाले वाले इस गन्ने की प्रजाति बड़ी मात्रा में लाल सड़न रोग की चपेट में आ चुकी है। 0239 अर्ली प्रजाति भी किसानों के लिए सिरदर्द बनी है। यह गन्ना रिजेक्ट प्रजाति का निकला। मिल प्रबंधन ने रिजेक्ट प्रजाति का गन्ना खरीदने से इनकार कर दिया है।
कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि गन्ने की पैदावार बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार अगेती प्रजाति वाली फसल की बुवाई को प्राथमिकता देती है, इसके लिए हर साल भारी भरकम धनराशि खर्च की जा रही है। लेकिन अधिकांश किसान इससे अंजान रह जाते हैं। जिस कारण वह पाबंदी वाले रिजेक्ट प्रजाति का गन्ना बोकर खुद को ठगा महसूस करा रहे हैं। करीब 13 हेक्टेयर में रिजेक्ट प्रजाति के गन्ना बुवाई की बात अब तक सामने आई है।
दूसरी प्रजाति का रोपने पर जोर
पिछले कुछ सालों से गन्ने की नई-नई प्रजातियां गन्ना विभाग ने विकसित की है। इनकी रोपाई कर खेतों में प्रयोग भी किया गया, लेकिन कोई प्रजाति स्थायी रूप से ऐसी विकसित नहीं हो सकी, जो किसानों को मालामाल कर सकें। गन्ने की 0238 प्रजाति की बात करें तो यह प्रजाति इतनी फायदेमंद साबित हुई कि जनपद के कुल रकबे के सापेक्ष करीब 85 प्रतिशत क्षेत्रफल में फैल गई। अब गन्ना विभाग जिले के कुछ स्थानों पर इसमें लाल सड़न रोग लगने पर इसकी जगह अन्य प्रजाति बोने की सलाह किसानों को दे रहा है।
