बरेली: हुलासनगरा क्रॉसिंग पर मार्च में नहीं राहत, जून तक झेलें दिक्कतें

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। हुलासनगरा रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण कराने में एक और पेच फंस गया है। 31 मार्च तक निर्माणाधीन ओवरब्रिज तैयार कराकर यातायात के लिए खोले जाने की टाइम लाइन आगे बढ़ा दी गई। इससे बरेली-लखनऊ मार्ग पर आने-जाने वाले राहगीरों के अलावा कार, ट्रक, टेंपो व बाइक सवार लोगों को जून माह …

अमृत विचार, बरेली। हुलासनगरा रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण कराने में एक और पेच फंस गया है। 31 मार्च तक निर्माणाधीन ओवरब्रिज तैयार कराकर यातायात के लिए खोले जाने की टाइम लाइन आगे बढ़ा दी गई। इससे बरेली-लखनऊ मार्ग पर आने-जाने वाले राहगीरों के अलावा कार, ट्रक, टेंपो व बाइक सवार लोगों को जून माह तक दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी। क्योंकि, 31 मार्च तक ओवरब्रिज का निर्माण पूरा नहीं हो सकेगा। ओवरब्रिज निर्माण के लिए रेलवे ने जो गाडर तीन साल पहले तैयार कराए थे। उन गाडरों की तकनीकी जांच करने से रुड़की आईटी ने इनकार कर दिया है।

इससे रेलवे और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों को झटका लगा है। अब गाडरों की जांच के लिए बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के आईटी विभाग से संपर्क किया गया है। आईटी विभाग की सहमति मिलने पर निर्माण कार्य शुरू होगा। बुधवार को मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद ने एनएचएआई के पीडी से फोन पर ओवरब्रिज निर्माण की प्रगति जानी। तब पीडी ने बताया कि रुड़की आईटी ने गाडरों की जांच करने से इनकार कर दिया है। कई माह तो टीम के आने की चर्चा में खराब चले गए। पहले रुड़की आईटी ने गाडरों की जांच करने के लिए हामी भर दी थी। इस वजह से निर्माण कार्य की अवधि बढ़ाने पड़ी।

शासन से जून तक का समय लिया है। मंडलायुक्त ने पीडी को जून तक हर हाल में ओवरब्रिज तैयार करके देने के निर्देश दिए हैं। हुलासनगरा में दो रेलवे क्रॉसिंग हैं। दोनों के ऊपर ओवरब्रिज का निर्माण होना है। दिसंबर, 2020 में मंडलायुक्त ने कार्यदायी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर को 31 मार्च तक ओवरब्रिज निर्माण कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए थे। पहले यह प्रोजेक्ट 2200 करोड़ के बरेली-सीतापुर फोरलेन के प्रोजेक्ट में शामिल था, लेकिन इसका कांट्रेक्ट लेने वाली इरा इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के बीच में ही सीतापुर-बरेली फोरलेन का कार्य छोड़कर भाग गई। इससे ओवरब्रिज का निर्माण अधूरा है।

जुलाई, 2019 में मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद की पैरवी के बाद एनएचएआई ने हुलासनगरा रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज बनाने का प्रस्ताव केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय को भेजा था। करीब 45 करोड़ की लागत से 1000 मीटर लंबे इस ओवरब्रिज के निर्माण को अनुमति मिली थी।

रोज जाम की गिरफ्त में रहती है हुलासनगरा
हुलासनगरा रेलवे कॉसिंग के पास यातायात के हालात बेहद खराब हैं। प्रतिदिन दिनभर हुलासनगरा रेलवे क्रॉसिंग जाम की गिरफ्त में रहती है। कई घंटे तक जाम लगने से एक से दो किलोमीटर तक वाहन जाम में फंसे रहते हैं। ट्रेन गुजरने के दौरान हालात और खराब हो जाते हैं। जाम में शासन के कई बड़े अधिकारी भी फंस चुके हैं। पिछले माह अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी फंसे थे। जो भी अधिकारी फंसता है, मंडलायुक्त से ओवरब्रिज न बनवाने की शिकायत जरूर करता है। लखनऊ से आने और जाने वाली एंबुलेंस तक फंसी रहती हैं।

सर्विस लेन भी अधूरी, दिनभर उड़ती है धूल
हुलासनगरा क्रॉसिंग के पास पक्की सड़क तो सालों से गायब है। सिर्फ धूल-मिट्टी ही नजर आती है। वाहनों के दौड़ने से दिनभर धूल के गुबार उड़ते रहते हैं। मंडलायुक्त एनएचएआई के अधिकारियों को कई बार सर्विल लेन बनाने के निर्देश दे चुके हैं लेकिन अभी तक पूर्णरूप से सर्विस लेन नहीं बन सकी है। मंडलायुक्त ने एनएचएआई के पीडी को जल्द सर्विस लेन बनवाने के निर्देश दिए हैं।

कई बड़े हादसे हुए, कई की जा चुकी है जान
हुलासनगरा क्रॉसिंग के पास बड़े-बड़े गड्ढे हैं। इनमें अक्सर बाइक सवार गिरकर घायल होते हैं। पिछले सालभर की बात करें तो आधा दर्जन से अधिक बड़ी दुर्घटना सिर्फ अव्यवस्था की वजह से हुई हैं। जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है। क्रॉसिंग के पास सड़क का पता नहीं। सिर्फ धूल और मिट्टी ही नजर आती है। सबसे ज्यादा दिक्कतें दोपहिया वाहन चालकों को निकलने में रहती है। पहिया फिसलते ही राहगीर वाहन लेकर गिर जाते हैं।

हुलासनगरा रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण के लिए पूर्व में 31 मार्च तक का समय दिया गया था लेकिन कोरोना काल में कार्य प्रभावित रहने की वजह से एनएचएआई को तीन माह समय और मिल गया। एनएचएआई को जून में ओवरब्रिज तैयार करके देने के निर्देश दिए गए हैं। -रणवीर प्रसाद, मंडलायुक्त

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