बरेली: गन्ना मूल्य बढ़ने की उम्मीदें धड़ाम, किसान मायूस
अमृत विचार, बरेली। किसान आंदोलन के बीच गन्ने का दाम बढ़ने की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को सरकार ने झटका दिया है। प्रदेश सरकार ने गन्ने के राज्य समर्थित मूल्य में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। इसे यथावत रखा है। गन्ने का दाम नहीं बढ़ने पर किसान संगठनों के अलावा विपक्षी दलों में उबाल दिख …
अमृत विचार, बरेली। किसान आंदोलन के बीच गन्ने का दाम बढ़ने की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को सरकार ने झटका दिया है। प्रदेश सरकार ने गन्ने के राज्य समर्थित मूल्य में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। इसे यथावत रखा है। गन्ने का दाम नहीं बढ़ने पर किसान संगठनों के अलावा विपक्षी दलों में उबाल दिख रहा है।
सरकार कोई भी हो गन्ना मूल्य बढ़ाने की मांग किसान पहले से ही करते आ रहे थे। वर्ष 2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पेराई सत्र 2017-18 में गन्ने के राज्य परामर्शी मूल्य में दस रुपये की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद से न वर्ष 2018-19 से 2019-20 में न दाम बढ़ाया और न ही चालू पेराई सत्र 2020-21 के लिए किसी तरह की बढ़ोतरी की।
किसानों का कहना है गन्ने के रेट में बढ़ोत्तरी जरूरी थी। किसानों की हालत इस समय खराब है। किसानों को लागत और मजदूरी निकालना भी मुश्किल हो रहा है। एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट की ओर से भी गन्ने के रेटों में दस रुपये बढ़ोत्तरी करने का सुझाव दिया गया था। लेकिन 2020-21 के लिए घोषित गन्ना मूल्य के मुताबिक, सामान्य, अगेती, अस्वीकृत प्रजाति का मूल्य क्रमश: 315, 325 व 310 रुपये प्रति क्विंटल ही रहेगा।
इधर, दूसरी तरफ किसान नेताओं का कहना है इस वर्ष गन्ना मूल्य वृद्धि की उम्मीद इसलिए भी थी, क्योंकि दिल्ली बार्डर पर चल रहे किसानों के आंदोलन का असर पड़ने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन गन्ने का दाम न बढ़ाकर सरकार ने यह दिखा दिया वह किसान विरोधी है। खाद, बिजली, पानी, डीजल, जुताई आदि महंगी होने के बाद भी गन्ने का दाम नहीं बढ़ाना किसानों के साथ अन्याय है। इधर, जिला गन्ना अधिकारी पीएन सिंह ने बताया कैबिनेट ने ग मूल्य घोषित कर दिया है, जिसमें कोई वृद्धि नहीं की गई है।
क्या कहते है किसान नेता
किसान आंदोलन के बाद भी सरकार गंभीर नहीं है। खेती का आलम यह है कि किसानों की लागत और मजदूरी भी पूरी नहीं हो पा रही है। ऐसे में गन्ने के रेट न बढने से किसानों को निराशा ही हाथ लगी है। जबकि गन्ने की खेती की भी लागत हर दिन बढ़ती जा रही है।-तेजेंद्र सिंह, किसान नेता
लगातार गन्ने की खेती महंगी होती जा रही है। बिजली की दरों में बहुत वृद्धि कर दी गई है। सरकारी शोध संस्थानों के अनुसार भी इस वर्ष गन्ने की लागत में 10 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि हुई है, लेकिन इसके बावजूद भी पिछले कई वर्षों से गन्ने के राज्य परामर्शी मूल्य में कोई भी बढ़ोतरी नहीं की गई है। -गजेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष भाकियू
किसानों की सुनें
पिछले 4 वर्षों गन्ने के भाव नहीं बढ़ाया गया है। आधे से ज्यादा गन्ना सीजन बीतने पर भाव की घोषणा की गई। इस वर्ष लागत के हिसाब से किसानों को गन्ने के भाव में बढ़ोतरी की पूरी उम्मीद थी। किसानों की आमदनी दोगुना करेंगे सब खोखला साबित हो रहा है। -हरीश पटेल, किसान
सरकार किसान विरोधी नीति अपना रही हैं। सरकार किसानों के लिए बिजली, खाद बीज सब महंगी करती जा रही है। किसानों की मुख्य उपज गन्ने के रेट नहीं बढ़ा रही हैं। गन्ने का दाम नहीं बढ़ाना किसानों के साथ अन्याय है। सरकार गरीब की न होकर पूजीपतियों की हो गई है। -सर्वेश गंगवार, किसान
कब कितना रहा गन्ना रेट
पेराई सत्र गन्ना रेट सरकार
- 2012-13 275-280-290 सपा
- 2013-14 275-280-290 सपा
- 2014-15 275-280-290 सपा
- 2015-16 275-280-290 सपा
- 2016-17 300-305-315 सपा
- 2017-18 305-315-325 बीजेपी
- 2018-19 305-315-325 बीजेपी
- 2019-20 310-315-325 बीजेपी
- 2020-21 310-315-325 बीजेपी
