बरेली: मवेशियों का दूध निकालने में बढ़ा ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का प्रयोग

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

सिद्धार्थ भारद्वाज, बरेली। गाय और भैंस का दूध निकालने के लिए प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का प्रयोग बढ़ गया है। डेयरी संचालक इसका प्रयोग ज्यादा कर रहे हैं। प्रतिदिन पांच हजार से अधिक इंजेक्शनों की खपत बताई जा रही है। औषधि विभाग प्रतिबंधित इंजेक्शन की बिक्री पर पूर्णता रोक नहीं लगा पा रहा है। बताते हैं …

सिद्धार्थ भारद्वाज, बरेली। गाय और भैंस का दूध निकालने के लिए प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का प्रयोग बढ़ गया है। डेयरी संचालक इसका प्रयोग ज्यादा कर रहे हैं। प्रतिदिन पांच हजार से अधिक इंजेक्शनों की खपत बताई जा रही है। औषधि विभाग प्रतिबंधित इंजेक्शन की बिक्री पर पूर्णता रोक नहीं लगा पा रहा है।

बताते हैं कि ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का प्रयोग कर गाय और भैंस का दूध निकालने पर दूध की मात्रा बढ़ जाती है, लेकिन नियमित तौर पर इंजेक्शन का इस्तेमाल करना न सिर्फ गाय व भैंस के लिए खतरनाक होता है, बल्कि इंजेक्शन लगी गाय व भैंस दूध का नियमित उपयोग करने वाले बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह दूध पीने से बच्चों का पाचन तंत्र खराब हो जाता है। आंखें भी कमजोर हो सकती हैं। महिलाओं में गर्भपात से लेकर स्तन कैंसर तक का खतरा भी बढ़ जाता है।

नगर निगम क्षेत्र में ही एक नजर दौड़ाई जाए तो करीब 400 से अधिक डेरियां संचालित हैं। यह सभी डेयरियां नगर निगम में पंजीकृत हैं, जबकि बिना पंजीकरण के चल रही डेयरियों की तो कोई संख्या ही नहीं है। ऐसे में महानगर क्षेत्र में ही हजारों की संख्या में गाय और भैंस है। एक अनुमान के मुताबिक दस फीसदी यानी रोजाना पांच हजार से अधिक ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की खपत हो रही है। हैरत तो इस बात की है कि यह इंजेक्शन इन लोगों को आखिर कैसे प्राप्त हो जाते हैं।

सूत्रों ने बताया कि सिर्फ इंजेक्शन बोलने पर ही दुकानदार इसे दे देता है। वहीं, कुछ साल पहले किला क्षेत्र में एक फैक्ट्री भी पकड़ी गई थी, हालांकि वह बाद में नकली इंजेक्शन बनाने की निकली। फिर भी बताया जाता है कि उस फैक्ट्री में ऑक्सीटोसिन के ही नकली इंजेक्जशन बनाए जा रहे थे। केमिस्ट एसोसिएशन ने भी सभी दवा विक्रेताओं से प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन न बेचने की अपील की हुई है। कहा है कि यह सेहत के लिए खतरनाक है। ऐसे में कोई भी दवा विक्रेता प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन न बेचें।

मवेशियों पर पड़ता है असर
– पशु में कैल्शियम की कमी।
– लगातार उपयोग से तनाव, बेचैनी।
– भैंस की औसत आयु घट जाती।
– दूध में सोडियम व नमक की मात्रा में वृद्धि।

किस उम्र में क्या करता है असर
– 0 से 5 साल पाचन तंत्र खराब होना, आंख कमजोर
– 5 से 15 साल बच्चों का अप्रत्याशित विकास, लड़कियों की किशोरावस्था के दौरान युवावस्था के लक्षण
– 15 से 30 साल युवाओं में हार्मोनल असंतुलन का खतरा
– 30 से 45 साल महिलाओं में गर्भपात, स्तन कैंसर का खतरा, रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाना
– 45 से 100 साल पाचन तंत्र पर बुरा असर, एसिडिटी का खतरा

“प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन बेचने वाले एक व्यक्ति पर कार्रवाई की गई है। जिस किसी को भी प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की बिक्री होने की जानकारी हो तो वह विभाग को सूचना दे। उसका नाम गोपनीय रखा जाएगा।” -उर्मिला वर्मा, औषधि निरीक्षक, बरेली

“प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बेचना कानूनी अपराध है। थोड़े से लालच में कोई भी व्यक्ति आने वाली पीढ़ी को खोखला न करे। इनका पूरा एक नेटवर्क है, किस तरह से यह संचालित हो रहा है यह अपने आपमें चिंता का विषय है।” -रितेश मोहन गुप्ता, सचिव, बरेली केमिस्ट ऐसोसिएशन

संबंधित समाचार