बरेली: पीएचडी में प्रवेश के लिए साल में दो बार होगी परीक्षा
अमृत विचार, बरेली। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में वर्ष 2019 के बाद पीएचडी के लिए कोई भी प्रवेश परीक्षा नहीं हुई लेकिन अब एक वर्ष में दो बार प्रवेश परीक्षा आयोजित करायी जाएगी। पहली परीक्षा जुलाई तो दूसरी दिसंबर में आयोजित होगी। चोरी की रिसर्च को पकड़ने के लिए विश्वविद्यालय ने प्लेग्रिज्म साफ्टवेयर तैयार किया है। …
अमृत विचार, बरेली। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में वर्ष 2019 के बाद पीएचडी के लिए कोई भी प्रवेश परीक्षा नहीं हुई लेकिन अब एक वर्ष में दो बार प्रवेश परीक्षा आयोजित करायी जाएगी। पहली परीक्षा जुलाई तो दूसरी दिसंबर में आयोजित होगी। चोरी की रिसर्च को पकड़ने के लिए विश्वविद्यालय ने प्लेग्रिज्म साफ्टवेयर तैयार किया है।
इसे सभी महाविद्यालयों को लागू करना होगा। इसके अलावा सभी महाविद्यालयों के छात्रों व शिक्षकों का रिकार्ड भी एक ही पोर्टल पर रखा जाएगा। शुक्रवार को विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. केपी सिंह की अध्यक्षता में शोध और परीक्षा व्यवस्था में सुधार को हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
शोध व परीक्षा में सुधार के लिए 5 व 6 मार्च को सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक बुलाई गई है। शुक्रवार को मिनिस्ट्रियल स्टाफ सभागार में हुई बैठक में बरेली, पीलीभीत, बदायूं, शाहजहांपुर और रामपुर जिले के सभी महाविद्यालयों के प्राचार्य शामिल हुए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ आलोक श्रीवास्तव ने की। उन्होंने इस कार्यक्रम के विषय में सभी प्राचार्यों को विश्वविद्यालय में स्थापित किए गए 10 डायरेक्टरेट के विषय में बताया। कुलपति प्रोफेसर के पी सिंह ने कहा कि हमें ऐसे उत्कृष्ट उदाहरण पेश करने और कार्य करने होंगे जिससे विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया जा सके और इसकी पहचान विश्व पटल पर बनाई जा सके।
उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तुलना में राज्य विश्वविद्यालयों में सिस्टम के अभाव पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने प्रवेश परीक्षा एवं परिणाम से ऊपर उठकर विश्वविद्यालय की चहुमुखी विस्तार एवं विकास को भी आवश्यक बताया। विश्वविद्यालय के शोध में वर्ष में अब दो बार जुलाई और दिसंबर में प्रवेश किए जा सकेंगे।
विश्वविद्यालय में होने वाले सभी शोध कार्य गुणवत्ता पूर्ण होने चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में शोध होते हैं लेकिन एक भी शोध पेंटेंट न होना चिंता की बात है। उन्होंने वर्ष भर में कम से कम 10 शोध को पेंटेंट कराने के लिए कहा। । इसके निवारण के लिए विश्वविद्यालय ने एक आईपीआर सेल का गठन किया है जो पेटेंट संबंधी कार्यों में छात्रों शिक्षकों एवं आसपास के उद्योगों की मदद करेगा।
उन्होंने सभी महाविद्यालयों को भी शोध में महाविद्यालय के नाम के साथ विश्वविद्यालय का नाम भी जोड़ने के लिए कहा। ऐसा करने से विश्वविद्यालय के साथ-साथ छात्र की भी गरिमा बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि शोध के लिए जल्द ही रिसर्च गाइड की संख्या जल्द बढ़ाई जाएगी। 10 वर्ष या इससे अधिक सेवा यूजी शिक्षक के रूप में कार्य कर चुके शिक्षकों को भी रिसर्च गाइड बनाने पर विचार किया जा रहा है।
कुलपति ने कहा कि प्लैग्रिज्म सॉफ्टवेयर सभी राजकीय एवं वित्तीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य को उपलब्ध कराया जा रहा है। जिसका आधिकाधिक उपयोग किया जाना जरूरी है ताकि ना केवल बरेली बल्कि पूरे रुहेलखंड क्षेत्र को शोध के क्षेत्र में इससे फायदा पहुंचे। कुलपति ने सभी महाविद्यालयों को अपनी वेबसाइट अपडेट करने और सूचनाएं अपडेट करने के लिए कहा। उन्होंने सभी प्रधानाचार्यों से कहा कि वह अपने महाविद्यालय के छात्रों को विश्वविद्यालय के एलुमनी एसोसिएशन से जोड़ने के लिए प्रेरित करें।
