लॉकडाउन में बढ़े घरेलू हिंसा के केस, अधिकांश की वजह ‘विवाहेतर संबंध’

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बरेली, अमृत विचार। लॉकडाउन में एक ओर जहां बेरोजगारी बढ़ी तो दूसरी तरफ घरेलू हिंसा के मामलों में भी इजाफा हुआ। वजह सामने आई विवाहेतर संबंध (एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स)। घरेलू हिंसा के कुल मामलों में से करीब 40-50 फीसदी में हिंसा का मुख्य कारण विवाहेतर संबंध ही निकले। हालांकि अधिकांश मामलों को काउंसिलिंग कर सुलझा …

बरेली, अमृत विचार। लॉकडाउन में एक ओर जहां बेरोजगारी बढ़ी तो दूसरी तरफ घरेलू हिंसा के मामलों में भी इजाफा हुआ। वजह सामने आई विवाहेतर संबंध (एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स)। घरेलू हिंसा के कुल मामलों में से करीब 40-50 फीसदी में हिंसा का मुख्य कारण विवाहेतर संबंध ही निकले। हालांकि अधिकांश मामलों को काउंसिलिंग कर सुलझा दिया गया।

विवाहेतर संबंध (शादी के बाद दूसरी महिला या पुरुष के साथ संबंधों) की पोल तब खुली जब लॉकडाउन में लोगों को घर में रहना पड़ा। दंपति के एक, दो दिन तो आसानी से कट गए मगर जब उन्हें किसी दूसरी महिला या पुरुष के साथ बातचीत करते पकड़ा गया तो घरेलू हिंसाओं ने जन्म ले लिया।

सखी वन स्टॉप सेंटर के आंकड़ों पर गौर करें तो अधिकांश केस में पुरुषों के विवाहेतर संबंध सामने आए। महिलाओं के संबंधों की संख्या बेहद कम थी। सेंटर की मैनेजर सौम्या वर्मा और काउंसलर प्रिंसी सक्सेना ने बताया कि लॉकडाउन से अब तक घरेलू हिंसा के उनके पास करीब 65 केस आए हैं जिसमें से 25-30 केस विवाहेतर संबंधों के थे। यह तब पता चला जब उनकी काउंसिलिंग की गई।

काउंसिलिंग में घरेलू हिंसा की वजह पूछने पर महिलाओं ने बताया कि उनके पति का किसी अन्य महिला के साथ संबंध है। इसका विरोध किया तो उन्होंने अपनी पत्नियों के साथ मारपीट शुरू कर दी। कुछ केसों में महिलाओं ने पति से तलाक लेने की भी बात कही तो कुछ की कांउसिलिंग कर मामले को सुलझा दिया गया।

घरेलू हिंसा का शिकार लिव-इन में रहने वाली भी हुईं
मंगलवार को राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह जब बरेली पहुंची तो उन्होंने भी लॉकडाउन में घरेलू हिंसा के मामले बढ़ने पर चिंता जताई थी। उन्होंने बताया कि कई ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें कुछ जोड़े लिव-इन-रिलेशनशिप में रह रहे थे मगर जब लॉकडाउन हुआ तो घर पर रहना पड़ा। घर वालों को पता चला तो उनके साथ भी हिंसा होने लगी।

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