बरेली: दहेज के खिलाफ दरगाह ने जारी किया फरमान, बेशुमार खर्च वाली शादियों में निकाह न पढ़ाएं काजी

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अमृत विचार, बरेली। अहमदाबाद की रहने वाली 23 साल की आयशा ने दहेज प्रताड़ना से तंग आकर साबरमती नदी में कूदकर जान दे दी थी। इस घटना ने देश के तमाम संजीदा लोगों के साथ मुस्लिम समाज को भी अंदर से हिला डाला। देश के विभिन्न हिस्सों से दहेज के खिलाफ आवाजें उठने लगीं। इसी …

अमृत विचार, बरेली। अहमदाबाद की रहने वाली 23 साल की आयशा ने दहेज प्रताड़ना से तंग आकर साबरमती नदी में कूदकर जान दे दी थी। इस घटना ने देश के तमाम संजीदा लोगों के साथ मुस्लिम समाज को भी अंदर से हिला डाला। देश के विभिन्न हिस्सों से दहेज के खिलाफ आवाजें उठने लगीं। इसी कड़ी में गत दिवस आगरा में उलेमा और समाजसेवियों ने दहेज न लेने के पंफलेट बांटे थे। दरगाह आला हजरत से उलेमा के लिए आधिकारिक रूप से यह फरमान जारी हो गया है कि बेशुमार खर्च और दहेज वाली शादियों में निकाह हरगिज न पढ़ाएं। इतना ही नहीं अगर शादी में बैंडबाजा, नाच-गाना, आतिशबाजी और महिलाएं बेपर्दगी की हालत में हों, तब भी निकाह न पढ़ाया जाए।

सुन्नियत की मरकज कही जाने वाली बरेली की विश्व प्रसिद्ध दरगाह आला हजरत पर गुरुवार को उलेमाओं का जमावड़ा लगा। दरअसल, कुछ दिन पहले दरगाह की तरफ से शादी में बढ़ती दहेज की मांग, बैंड-बाजा, डीजे व आतिशबाजी आदि के खिलाफ एक अपील की गई थी। जिसके जरिए काजी और मौलवियों से ऐसे आयोजनों में निकाह न पढ़ाने को कहा गया था।

वहीं, अब दरगाह से हुई इस अपील को अमलीजामा पहनाने के लिए उलेमा एक मंच पर दिखाई दिए। दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खान सुब्हानी मियां की सरपरस्ती और सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी अहसन मियां की सदारत एक बैठक बुलाई गई जिसमें सभी ने एकमत होकर सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां की अपील पर हाथ उठाकर हिमायत की। शहर की मस्जिदों से दरगाह का पैगाम पूरी कौम तक पहुंचाने का आह्वान भी किया गया।

दरगाह के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि जो लोग शादी बरातों में शरीयत के खिलाफ काम करेंगे उनका सामूहिक बहिष्कार किया जाएगा। सुन्नी-बरेलवी विचारधारा के मानने वाले उलेमाओं तक एक विस्तृत गाइडलाइन का पंफलेट भेजा जा रहा है जिसमें मुस्लिम समाज में फैली बुराइयों को थामने के लिए कड़ाई बतरने की अपील शामिल है।

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