बरेली: सट्टा है, पर्ची मिल रही फिर भी चीनी मिलें नहीं ले रहे गन्ना
अमृत विचार, बरेली। अफसर भले ही सख्ती का दावा करें लेकिन माफिया किसानों से कम दामों में गन्ना खरीदकर उनका हक मार रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि पूरे सिस्टम पर माफियाराज हावी है। चीनी मिलों की कार्य प्रणाली से जहां तमाम किसानों के खेत में गन्ना खड़ा है तो वहीं बहुत से किसान ऐसे …
अमृत विचार, बरेली। अफसर भले ही सख्ती का दावा करें लेकिन माफिया किसानों से कम दामों में गन्ना खरीदकर उनका हक मार रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि पूरे सिस्टम पर माफियाराज हावी है। चीनी मिलों की कार्य प्रणाली से जहां तमाम किसानों के खेत में गन्ना खड़ा है तो वहीं बहुत से किसान ऐसे हैं, जिनके गन्ने का सट्टा है, उनकी पर्ची से पहले दूसरों को पर्ची मिल जाती है।
जिले की समस्त पांच चीनी मिलों की बात करें तो इनके अधिकांश केंद्रों पर मानक के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। इसलिए सरकारी गन्ना खरीद में पूरी तरह माफिया और दलालों का तंत्र हावी है। केंद्रों पर 150 से अधिक गन्ना माफिया सक्रिय होने की बात तो दबी जुबां से विभाग के कुछ कर्मचारी भी स्वीकारते हैं।
चीनी मिलों का संरक्षण भी इन्हीं माफिया को मिल रहा है। इस वजह से माफिया और दलाल गन्ना तय सरकारी रेट से 60 से 70 रुपये प्रति क्विंटल की कम दर से खरीदकर उसे अपनी पर्ची पर चीनी मिलों को बेचते हैं। इतना ही नहीं माफिया किसानों से पहले अपना गन्ना तुलवाकर उसका भुगतान भी जल्दी प्राप्त कर लेते हैं। किसानों को पर्ची देर से मिलने की वजह से अपना गन्ना दलाल या माफिया को ही बेचना पड़ता है।
इन स्थानों पर किसानों को मिल जाते हैं माफिया
नवाबगंज से बरखन, क्योलड़िया, मैथी नवादा, भदपुरा, दिबनापुर, इनायतपुर, भटपुरा जागीर, अल्लापुरा, बड़ा गांव, बहेड़ी से शेरगढ़, दियूरियाकलां, बिहारीपुर, निर्भुआ, लौधीपुर, नंदपुर, धीमरी, भोजीपुरा से कोढ़नपुर्र खंजनपुर, अट्टापट्टी स्थानों पर माफिया सक्रिया बताए जाते हैं और रास्ते में ही किसानों को अपने जाल में फंसा लेते हैं।
किसानों को ऐसे फंसाते हैं जाल में
किसानों के गांव से निकलते ही माफिया उनके गन्ने का सौदा कर लेते हैं। बात पक्की होते ही किसानों को नकद भुगतान दे देते हैं। वहीं पर फोन कर अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉली मंगवा लेते हैं। उसके बाद किसानों की ट्रॉली से गन्ना उतरवाकर अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली में लदवा लेते हैं और अपनी पर्चियों पर उसी गन्ने को चीनी मिल के सेंटरों पर तुलवा देते हैं।
परिवहन ठेकेदार भी हैं माफिया
चीनी मिलों के कुछ परिवहन ठेकेदार भी माफियागीरी करते हैं। ये चीनी मिलों के गेट पर खुलेआम किसानों से गन्ना खरीदते हैं। अधिकारी उन्हें परिवहन ठेकेदार की नजर से देखते हैं और इसी में वह बच जाते हैं। इसको लेकर पूर्व में कई बार शिकायतें हुई लेकिन ठेकेदार जनप्रतिनिधि का करीबी होने की वजह से मामला दबा दिया गया।
फर्जी सट्टे के मामले सामने आने के बाद कई पर कार्रवाई की जा चुकी हैं। इसको लेकर लगातार सख्ती भी की जा रही है। इस सत्र में गन्ना माफिया की जानकारी नहीं है। शिकायत मिलती है तो जांच कराकर गन्ना एक्ट के तहत उनके विरुद्ध निश्चित कड़ी कार्रवाई की जाएगी। -पीएन सिंह, जिला गन्ना अधिकारी
