टेढ़े-मेढ़े दांतों से ना बिगड़े आपके लाडले की मुस्कान, इन बातों का रखें ध्यान

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Edited By Amrit Vichar
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बच्चों में कई प्रकार की आदतें देखने को मिलती हैं। जैसे कि मुंह से सांस लेना, अंगूठा चूसना, होंठ काटना। ऐसी गलत आदतें मुंह की बनावट से भी हो सकती हैं। शुरुआती दौर में यह सामान्य लगता है लेकिन बाद में इन आदतों के कारण जबड़े पर दबाव पड़ता है जिसके वजह से दांत टेढ़े-मेढ़े …

बच्चों में कई प्रकार की आदतें देखने को मिलती हैं। जैसे कि मुंह से सांस लेना, अंगूठा चूसना, होंठ काटना। ऐसी गलत आदतें मुंह की बनावट से भी हो सकती हैं। शुरुआती दौर में यह सामान्य लगता है लेकिन बाद में इन आदतों के कारण जबड़े पर दबाव पड़ता है जिसके वजह से दांत टेढ़े-मेढ़े निकलते हैं।

मुंह से सांस लेना
बच्चे के नाक के छेद और मैक्जिलरी साइनस संकीर्ण हो सकते हैं। मुंह से सांस लेने वाले बच्चों में श्वांसनली सूखने लगती है। जिसके वजह से श्वांसनली में सूजन आ जाती है।

स्लीप एपनिया सिंड्रोम
मुंह से सांस लेने की वजह से मुंह की लार सुख जाती है और यह लार मुंह की सफाई में मदद करती है, लेकिन इस सिंड्रोम में लार की सफाई करने की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। जिसके वजह से टॉन्सिल्स में सूजन आ जाती है। इस दौरान सोते समय श्वांसनली में रुकावट हो सकती है। इसको हम स्लीप एपनिया सिंड्रोम के नाम से जानते हैं।

इसके इलाज
इसका पूर्ण इलाज हमें लक्षणों के अनुसार करना चाहिए। कुछ अप्लायंस के जरिये हम इसका इलाज कर सकते हैं जैसे कि ओरल स्क्रीन अप्लायंस। कुछ एक्सरसाइज भी बता सकते हैं। गहरी सांस लेना। परामर्श दिया जा सकता है कि वे बच्चों को विभिन्न गतिविधियों में व्यस्त रखें। ऐसे में बच्चों को इस आदत के लिए अल्प समय ही मिलेगा।

आयु संबंधी कारक
यदि बच्चा प्रथम 5 वर्षों में अंगूठा चूसने की समस्या से ग्रसित है तो यह बिल्कुल सामान्य है। इस आयु वर्ग में किसी उपचार की आवश्यकता नहीं होती और इस आदत की वजह से अगर दांत टेढ़े-मेढ़े होते हैं तो इनमें स्वयं सुधार की संभावना होती है। यदि अंगूठा चूसने की समस्या 5 वर्षों से ऊपर जारी रहती है तो टेढ़े-मेढ़े दांतों में स्वयं सुधार की संभावना नहीं होती है और इसके लिए माता-पिता को दंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए ।

होंठ काटना
होंठ की सही बनावट बोलने में और खाने में मददगार है। यह आदत दो भागों में विभाजित की जा सकती है- जैसे कि होठों को जुबान के द्वारा भिगोना। होठों को मुंह के अंदर दोनों दांतों के बीच दबान।

होंठ काटने के कारण
यह आदत तनाव की वजह से हो सकती है या फिर बाकी आदतों के साथ भी देखने को मिलती है।

कैसे पहचानें इस आदत को
ऊपर वाले दांतों का बाहर आना। नीचे वाले दांतों का अंदर जाना। होठों को दोनों दांतों के बीच में दबाना (लिप ट्रैप)।

इसका इलाज
यह आदत अपने आप नहीं सही हो सकती और उम्र के साथ और भी गंभीर हो जाती है। इसका इलाज हम ओरल स्क्रीन अप्लायंस या फिर लिप प्रोटेक्टर, लिप बंपर की मदद से करते हैं। परामर्श दिया जा सकता है कि वे बच्चों को विभिन्न गतिविधियों में व्यस्त रखें। ऐसे में बच्चों को इस आदत के लिए अल्प समय ही मिलेगा।

होठों के एक्सरसाइज हर दिन में 15 से 30 मिनट 4 से 5 महीने के लिए करें। ओरल स्क्रीन अप्लायंस को हम रात में देते हैं, कुछ एक्सरसाइज के साथ। ओरल स्क्रीन अप्लायंस में जो रिंग पाई जाती है, उसको हम बच्चे को होंठ से पकड़कर बाहर खींचने को कहते हैं, जिससे होंठ अपने सामान्य अवस्था में आ जाये।

अंगूठा चूसना
इस दौरान बच्चा अपना अंगूठा मुंह में रखता है।

अंगूठा चूसने के कारण
यह आदत अधिकतर औद्योगिक क्षेत्रों में पाई जाती है, अंगूठा चूसने का एक कारण तनाव भी है। अंगूठा चूसने की आदत अधिकतर नवजात शिशु में देखने को मिलती है या जब बच्चों में दूध के दांत निकलने शुरू होते हैं। शुरुआती दौर में यह सामान्य होती है। 2 से 5 साल तक, लेकिन इसके बाद 5 साल के बाद इस आदत से दांतों को नुकसान पहुंचता है और बोलने में भी दिक्कत आती हैं।

अंगूठा चूसने के परिणाम
ऊपर जबड़े की लंबाई बढ़ना। ऊपर के दांत बाहर आना। ऊपरी जबड़े का बाहर तरफ की आना। दांतों की जड़ों का गलना। आगे के दांतों को नुकसान होने की संभावना। नीचे के दांतों का अंदर जाना। सामने से मुंह का खुला रहना।

इस आदत को छुड़ाने के बहुत तरीके
विभिन्न गतिविधियों में बच्चों को व्यस्त करना, माता-पिता से किए गए प्रश्नों से यह पता चलता है कि बच्चा यह तभी करता है जब वह अकेलापन महसूस कर रहा हो या जब वह सोने जा रहा हो। -डॉ सत्यजीत नायक, विभागाध्यक्ष डिपार्टमेंट ऑफ पीडोडोंटिक्स प्राचार्य, इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज, बरेली

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