बरेली: अस्पताल कर्मचारियों ने ही फर्जी नौकरी का बनाया था प्लान
अमृत विचार, बरेली। 300 बेड के अस्पताल में नौकरी के नाम पर ठगी का पूरा प्लान हेड क्लर्क कुलदीप और वार्ड ब्वॉय ताहिर उर्फ बॉबी ने ही बनाया था। उन्होंने अस्पताल में निजी तौर पर काम करने वाले आठवीं पास विकास को फर्जी नौकरी के लिए ग्राहकों को फंसाने की जिम्मेदारी दी थी। विकास ने …
अमृत विचार, बरेली। 300 बेड के अस्पताल में नौकरी के नाम पर ठगी का पूरा प्लान हेड क्लर्क कुलदीप और वार्ड ब्वॉय ताहिर उर्फ बॉबी ने ही बनाया था। उन्होंने अस्पताल में निजी तौर पर काम करने वाले आठवीं पास विकास को फर्जी नौकरी के लिए ग्राहकों को फंसाने की जिम्मेदारी दी थी। विकास ने अपने जानने वालों को बताया और फिर कई लोगों से ठगी कर ली।
पुलिस गिरफ्त में आए विकास से पूछताछ के बाद पूरा खेल सामने आ गया है। पुलिस ने ताहिर, कुलदीप और विकास का आमना-सामना कराया। इसके साथ ही पीड़ितों को भी उनके सामने लाया गया तो उन्होंने आरोपियों को पहचान लिया। पुलिस ने डोरीलाल और रजत को भी हिरासत में लिया है लेकिन इन लोगों के साथ भी ठगी हुई है। पुलिस पूछताछ के बाद कई अन्य लोगों की भी गिरफ्तार कर सकती है।
पुलिस के मुताबिक प्रकाश कॉलोनी लाल फाटक कैंट निवासी विकास यादव, अली बख्स और दिनेश मौर्या पहले सिविल लाइंस स्थित एक निजी अस्पताल में काम करते थे। उसके बाद विकास जिला महिला चिकित्सालय में निजी तौर पर काम करने लगा। यहां पर वह हेड क्लर्क कुलदीप और ताहिर से मिला, उसके बाद वह मरीजों के काम लाने लगा, इसके बदले उसे रुपये मिलने लगे। जब ताहिर और कुलदीप ने देखा कि विकास को काफी लोग जानते हैं। ऐसे में नव निर्माणाधीन 300 बेड अस्पताल में नौकरी के लिए लोगों को लाने के लिए कहा।
इसके बाद विकास ने कई लोगों से संपर्क किया। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, क्लर्क व अन्य पदों पर भर्ती के लिए अलग-अलग रकम निर्धारित की गई। किसी से 20 हजार तो किसी से 40 हजार रुपये एडवांस लिए गए और बाकी रकम नौकरी लगने के बाद लेने का झांसा दिया। विकास ने सबसे पहले पीलीभीत के रहने वाले सुरेश कश्यप को अपने झांसे में लिया। उसके बाद जानने वाले अली बख्स और दिनेश मौर्या से भी संपर्क किया। अली बख्स ने अपने परिवार के आठ लोगों की नौकरी के लिए रुपये दे दिए। उसके बाद कई और लोगों को फंसाया गया। आरोपियों ने पूछताछ में भी 18 लोगों के नाम बताए हैं। पुलिस की अब तक की जांच में 28 लोगों से ठगी की पुष्टि हुई है।
पुलिस ने रजत और डोरीलाल से पूछताछ की तो पता चला उन्होंने भी नौकरी के लिए रकम दी है। विकास के कहने पर ही उन्होंने अन्य लोगों को बताया, जिससे उनके साथ भी ठगी हुई। पुलिस ने विकास के बैंक खाते खंगाले तो उसके तीन खातों में 43 लाख रुपये का लेनदेन हुआ है लेकिन अब उसके खातों में 9 रुपये, 26 रुपये व अन्य रकम ही बची है।
पुलिस ने इस मामले में पहले भी ताहिर और कुलदीप को पूछताछ के लिए कोतवाली बुलाया लेकिन गिरफ्तारी नहीं की। पुलिस ने सबसे पहले विकास को पकड़ने का प्रयास किया लेकिन वह पश्चिम बंगाल भाग गया था। सबसे पहले उसका एनबीडब्लयू जारी कराया गया और फिर एसआई अहमद टीम के साथ पश्चिम बंगाल गए। यहां पर वह अपनी ससुराल में रह रहा था। उसकी गिरफ्तारी के बाद से ही अन्य आरोपियों को पकड़ लिया गया।
सामान्य तरीके से कराए थे मेडिकल
पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि जिन लोगों को नौकरी के लिए फर्जी मेडिकल भी कराए गए थे, यह मेडिकल ताहिर ने ही सामान्य प्रक्रिया के तहत अस्पताल से करा लिए थे। किसी को यह नहीं बताया गया था कि यह मेडिकल 300 बेड में नौकरी के लिए बनवाए जा रहे हैं। पूछताछ में बताया कि चतुर्थ श्रेणी के पद पर भर्ती के लिए तीन लाख और क्लर्क के पद के लिए पांच लाख रुपये तय किए गए थे। 5 लाख रुपये ठगने पर एक लाख रुपये विकास को दिए जाते और अन्य रुपये कुलदीप और ताहिर अपने पास रख लेते। अब पुलिस ताहिर और कुलदीप के बैंक खातों की भी डिटेल खंगालेगी। पुलिस ठगी की रकम को वापस लाने के लिए कोर्ट में रिपोर्ट पेश करेगी।
