मुरादाबाद की माटी में उपजेगा अखरोट, खुमानी और सेब, फार्म में पौधों की देख-रेख कर रही अनंतनाग की टीम
मुरादाबाद, अमृत विचार। गन्ना, गेहूं आलू के लिए प्रसिद्ध अंचल की माटी अब अखरोट, खुमानी और सेब उगाएगी। मनोहरपुर स्थित कृषि अनुसंधान एवं कृषि विकास केंद्र (जार्ड्स) फार्म में इसकी तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र में उगाए गए हैं 4 प्रजाति के सेब, जो मुरादाबाद के माटी में उपजेंगे। यहां से किसानों को खेती …
मुरादाबाद, अमृत विचार। गन्ना, गेहूं आलू के लिए प्रसिद्ध अंचल की माटी अब अखरोट, खुमानी और सेब उगाएगी। मनोहरपुर स्थित कृषि अनुसंधान एवं कृषि विकास केंद्र (जार्ड्स) फार्म में इसकी तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र में उगाए गए हैं 4 प्रजाति के सेब, जो मुरादाबाद के माटी में उपजेंगे। यहां से किसानों को खेती के जरिये मालामाल करने की तैयारी है। इसके लिए प्रयोग के तौर पर अखरोट उगाया गया है। खुमानी के पौधे सवा से डेढ़ साल के भीतर फल देने लगेंगे। जबकि अगले साल यानी 2022 में केंद्र के सेब बाजार में आ जाएंगे।
कृषि एवं बागवानी विकास के लिए विभाग की ओर से अनंतनाग की विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई है। श्रीनगर से आए बागवानी विशेषज्ञ अमन सक्सेना की देखरेख में अखरोट के पौधे विकसित हो रहे हैं। यानी कि 3 साल में मुरादाबाद की माटी को पहाड़ में उपजने वाले पौधे यहां फल देंगे। अखरोट के लिए लोगों को अब जम्मू-कश्मीर और पर्वतीय इलाकों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। प्रयोग के तौर पर यह काम शुरू हुआ है, जिसके लिए किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
किसानों को बनाएंगे आत्मनिर्भर
विभागीय परीक्षण में मुरादाबाद की माटी इन फलों के बेहतर उत्पादन के लिए उपयुक्त पाई गई है। केंद्र के निदेशक डा. दीपक मेंदीरत्ता का कहना है कि ऐसा करके हम किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। यानी कि अखरोट और खुमानी का उत्पादन करके किसान अच्छी और अधिक आमदनी कर सकते हैं। डा. मेंदीरत्ता का कहना है कि सेब की 4 प्रजातियां यहां विकसित की गई हैं। 1 साल के बाद फार्म हाउस में सेब का उत्पादन शुरू हो जाएगा। पहाड़ी इलाकों में ऊपजने वाली खुमानी भी एक से डेढ़ साल के भीतर फल देने लगेगी। ऐसा होने से यहां के किसानों को काम और व्यापार दोनों का अवसर मिलेगा।
अनंतनाग की टीम दे रही टिप्स
विभाग की ओर से किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अनंतनाग से आने वाली टीम समय-समय पर हमें खेती और बागवानी के जरूरी टिप्स दे रही है। बताया कि अगले 3 साल के भीतर मुरादाबाद में पैदा होने वाले सेब, अखरोट और खुमानी मिलने लगेगा। इन तीनों उत्पादों के भंडारण बिक्री और वितरण में अन्य फसलों की तुलना में काफी सहूलियत रहती है। यह इलाका धान, गन्ना, गेहूं और आलू पर निर्भर हैं। यहां के लोगों बागवानी से अच्छी आमदनी कर सकते हैं। मजदूरों को काम का अवसर भी मिलेगा।
