बरेली: बजट लैप्स कर दिया पर 950 बच्चों को बैग नहीं दिया

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अमृत विचार, बरेली। बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते परिषदीय स्कूलों के करीब 950 बच्चे स्कूल बैग से वंचित रह गए। बजट होने के बाद भी बच्चों को स्कूल बैग मुहैया नहीं कराए गए और अब बजट लैप्स हो गया है। हलांकि, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने कार्यदाई संस्था का बजट रोक …

अमृत विचार, बरेली। बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते परिषदीय स्कूलों के करीब 950 बच्चे स्कूल बैग से वंचित रह गए। बजट होने के बाद भी बच्चों को स्कूल बैग मुहैया नहीं कराए गए और अब बजट लैप्स हो गया है। हलांकि, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने कार्यदाई संस्था का बजट रोक दिया है। अब वित्तीय वर्ष खत्म होने के साथ ही बचे हुए करीब ढाई लाख रुपये वापस करने पड़ रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग में इस वर्ष करीब 350978 बच्चे पंजीकृत हैं।
परिषदीय स्कूलों के बच्चों को स्कूल बैग बांटने के लिए करीब छह करोड़ 24 लाख रुपये आवंटित हुए थे। इससे जिले के सभी स्कूलों के कुल तीन लाख 50 हजार 978 बच्चों को स्कूल बैग दिए जाने थे। इसका काम गाजियाबाद की मंजीत प्लास्टिक इंडस्ट्रीज को सौंपा गया था। ऑनलाइन हुए टेंडर में इस फर्म को ही काम दिया गया था। इसके बाद भी इस फर्म ने करीब 950 स्कूल बैग कम भेजे।
इस पर फर्म के करीब ढाई लाख रुपये रोक लिए गए। सभी स्कूलों में बच्चों को बैग बांटे गए मगर फर्म ने बचे हुए स्कूल बैग सप्लाई नहीं किए। बेसिक शिक्षा अधिकारी विनय कुमार का कहना है कि उन्होंने फर्म की इस लापरवाही की वजह से उसके बजट में कटौती की है। बहरहाल, बच्चों को अब ये बैग कब मिलेंगे इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
बेसिक शिक्षा विभाग में करोड़ों रुपये हुए लैप्स 
बरेली। बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही की वजह से करोड़ों रुपये लैप्स हो गए। इसमें निर्माण, मिड-डे-मील, यूनिफार्म समेत तमाम मदों की धनराशि शामिल है। विगत वित्तीय वर्ष में बेसिक शिक्षा विभाग को छात्र संख्या के आधार पर स्कूलों में अतिरिक्त कक्ष बनवाने के लिए प्रति स्कूल के हिसाब से चार से पांच लाख रुपये आवंटित किए गए थे। बरेली में यह धनराशि 12 स्कूलों के लिए दी गई थी। इसके लिए करीब 57 लाख रुपये आए थे मगर पूरे वर्ष में एक भी कक्ष का निर्माण नहीं हो सका।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उनके पास अतिरिक्त जमीन नहीं थी। इसलिए उन्होंने एक भी कक्ष नहीं बनाया। साथ ही करीब 80 लाख रुपये रसोइयों का भी लैप्स हो गया। मिड-डे-मील के भी करीब दो करोड़ रुपये लैप्स हुए हैं। इनमें से करीब एक करोड़ रुपये एफसीआई का बचा था। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों के लिए गेहूं चावल उठाने की आखिरी तारीख 31 मार्च थी। इसलिए उसका बिल नहीं बन सकता तो वह पैसा वापस करना पड़ा है।

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