बरेली: आईवीआरआई में नहीं वन्यजीवों के अंग, रामा पंसारी प्रकरण में घिरे अधिकारी

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रजनेश सक्सेना, बरेली। शहर के व्यापारी रामा पंसारी की दुकान से प्रतिबंधित जड़ी-बूटी के साथ दुर्लभ वन्यजीवों के अंगों को बेचने और कई अंग बरामद होने के मामले में अधिकारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। वन विभाग के अधिकारी अभी तक यह कह रहे थे कि रामा पंसारी के यहां से बरामद अंगों की …

रजनेश सक्सेना, बरेली। शहर के व्यापारी रामा पंसारी की दुकान से प्रतिबंधित जड़ी-बूटी के साथ दुर्लभ वन्यजीवों के अंगों को बेचने और कई अंग बरामद होने के मामले में अधिकारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। वन विभाग के अधिकारी अभी तक यह कह रहे थे कि रामा पंसारी के यहां से बरामद अंगों की जांच कराई जा रही है। अंगों को आईवीआरआई लैब भेजा गया है लेकिन जब आईवीआरआई लैब से इस संबंध में संपर्क किया गया तो बड़ा खुलासा हुआ।

वन विभाग ने जांच के लिए आईवीआरआई अंग भेजे थे लेकिन आईवीआरआई लैब ने जांच से इंकार करते हुए अंगों को देहरादून स्थित वन्यजीवों की लैब में जांच कराने को कहा था। लिहाजा, अधिकारी मामले में घिरते नजर आ रहे हैं। साठगांठ कर केस को कमजोर करने की चर्चा तेज हो गई है।

छह माह पूर्व अंग बरामद होने के बाद अभी तक जांच न कराना भी कई सवाल खड़े कर रहा है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि मुख्य वन संरक्षक रुहेलखंड जोन ललित वर्ता को भी डीएफओ समेत अन्य अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि आईवीआरआई ने अंगों की जांच करने से इंकार कर दिया है। सीसीएफ ने प्रकरण की जांच कराने की बात कही है।

आईवीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. एएम पावड़े ने बताया कि रामा पंसारी के यहां से जो भी वन्य जीवों के अंग प्राप्त हुए थे। उनकी जांच आईवीआरआई में नहीं हो रही है क्योंकि उनके यहां जांच करने की कोई सुविधा नहीं है। साथ ही कोई भी डॉक्टर नहीं हैं। उन्होंने बताया कि मामला होने के कुछ दिनों बाद वन विभाग ने अंगों की जांच के लिए आईवीआरआई भेजे थे लेकिन यहां डॉ. और सुविधाएं न होने की वजह से उन्हें देहरादून में जांच कराने के लिए लिखकर वापस भेज दिया था।

आईवीआरआई में वन्य जीवों के अंगों की जांच डॉ. चंद्रमोहन किया करते थे लेकिन अब वह यहां पर तैनात नहीं हैं। जबकि वन विभाग लगातार बीते कई महीनों से यह कहकर मामले को टालने की कोशिश कर रहा है कि आईवीआरआई से जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में साफ है कि अधिकारी रामा पंसारी प्रकरण में व्यापारी श्याम अग्रवाल को पूरी तरह से बचाने की कोशिश में जुटे हैं। वन विभाग के सूत्र बताते हैं कि सितम्बर महीने में डीएफओ भरतलाल भी सेवानिवृत्त हो जाएंगे।

यह था पूरा मामला
21 सितम्बर, 2020 को दिल्ली की वाइल्ड लाइफ इंडिया की एंटी पोचिंग संस्था ने बरेली में श्यामगंज स्थित रामा पंसारी की दुकान पर छापेमारी की। दुकान से तीन हत्था जोड़ी, पटरा गोह, 11 सियार सिंघी, कुटकी औषधीय पौधे की लकड़ी आदि प्रतिबंधित सामग्री बरामद की थी। इसके बाद रामा पंसारी दुकान के मालिक श्याम अग्रवाल और उसके दो कर्मचारी विशाल गुप्ता व मनीष पर वन्य अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा था। इस मामले में कुछ दिनों तक कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगे लेकिन श्याम अग्रवाल की पत्नी की एक एप्लीकेशन के बाद पूरा मामला पलट गया। कुछ दिनों बाद मिले वन्य जीवों के अंगों की जांच के बाद कार्रवाई पर सभी की जमानत हो गई थी लेकिन तब से लेकर अब तक छह महीने बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई ही नहीं हुई है।

जांच अधिकारी पहले ही हो चुके सेवानिवृत्त
रामा पंसारी मामले में बरेली के एसडीओ आरबी सिंह को जांच अधिकारी नामित किया गया था लेकिन कुछ दिनों तक जांच पूरी करने के बाद वह सेवानिवृत्त हो गए तब से अब तक किसी को विभाग ने जांच अधिकारी नामित नहीं किया है जब इस मामले में डीएफओ भरत लाल से बात हुई थी तो उन्होंने कहा था कि आईवीआरआई से जांच रिपोर्ट आने के बाद ही जांच अधिकारी को नामित किया जाएगा।

मामले पर मुख्य वन संरक्षक ने बैठाई जांच
जब इस मामले में मुख्य वन संरक्षक ललित कुमार वर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हे इस मामले में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। यदि आईवीआरआई से बताया जा रहा है कि वन्य जीवों के अंगों को देहरादून जांच के लिए लिखकर दिया गया है तो अब वह इस मामले की जांच कराएंगे कि आखिर अब तक यह मामला क्यों छिपा रहा।

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