मुरादाबाद: मौत के नौ दिन बाद श्रीलंका से घर आया इंजीनियर का शव, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप
मुरादाबाद, अमृत विचार। मौत के नौ दिन बाद श्रीलंका में कार्यरत इंजीनियर का शव घर आया तो कोहराम मच गया। शव घर आने के बाद परिजनों ने कंपनी के आला अफसरों के न आने पर हंगामा करना शुरू कर दिया। वह लोग हत्या का आरोप लगा रहे थे। शव के साथ एक कर्मी को परिजनों …
मुरादाबाद, अमृत विचार। मौत के नौ दिन बाद श्रीलंका में कार्यरत इंजीनियर का शव घर आया तो कोहराम मच गया। शव घर आने के बाद परिजनों ने कंपनी के आला अफसरों के न आने पर हंगामा करना शुरू कर दिया। वह लोग हत्या का आरोप लगा रहे थे। शव के साथ एक कर्मी को परिजनों ने बैठा लिया। उससे एचआर से बात कराने की बात कही। कई बार संपर्क करने के बाद जब एचआर से बात नहीं हो पाई तो परिजन भड़क गए। फिलहाल खबर लिखे जाने तक परिजन शव का अंतिम संस्कार करने चले गए थे, वहीं कंपनी के अफसरों से बात करने का प्रयास चल रहा था।
सिविल लाइंस कोतवाली क्षेत्र के मोरा निवासी सीताराम चौहान के दो बेटे थे। बड़ा बेटा जोगेंद्र सिंह चौहान नोयडा में एचसीएल कंपनी में बतौर इंजीनियर तैनात था। करीब एक माह पहले कंपनी ने जोगेंद्र सिंह चौहान को श्रीलंका भेज दिया था। परिजनों के अनुसार जोगेंद्र में श्रीलंका में कोलंबों में कंपनी की शाखा को ज्वाइन कर लिया था। करीब दस दिन पहले उन्होंने पत्नी पिंकी से फोन पर बात की।
अगले दिन जब पिंकी ने फिर फोन मिलाया तो बात नहीं हो सकी थी। कई बार फोन करने के बाद भी संपर्क नहीं हो पाया तो परिजनों को चिंता हुई। किसी तरह जोगेंद्र सिंह के एक सहयोगी से परिजनों ने संपर्क किया। सहयोगी ने कुछ देर बाद फोन करके जोगेंद्र सिंह की मौत होने की बात कही। यह सुनकर परिजनों के होश उड़ गए। इसके बाद परिजन शव लाने की जद्दोजहद में जुट गए। दूतावास में संपर्क करने के साथ ही कुछ राजनीतिक लोगों की मदद ली।
देर शाम आया शव तो मचा कोहराम
कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जोगेंद्र का शव रविवार की सुबह श्रीलंका से दिल्ली भेजा गया। उसके बाद रविवार की देर शाम परिजन शव लेकर घर आए तो कोहराम मच गया। बताते हैं कि शव के साथ कंपनी का एक कर्मचारी भी साथ आया था। यहां आने के बाद परिजनों ने हत्या का आरोप लगाना शुरू कर दिया। शव आने में हुई देरी से भी परिजन खफा थे। उनका कहना था कि कंपनी के अधिकारी मौत की वजह आत्महत्या बता रहे हैं। जबकि मौत से एक दिन पहले जब जोगेंद्र से बात हुई थी तो ऐसा कुछ भी नहीं लग रहा था। वहीं मौत के बाद भी कंपनी के अफसरों ने शव भारत लाने के लिए अपने स्तर से कोई प्रयास नहीं किए। खबर लिखे जाने तक जहां कंपनी के आला अफसरों से वार्ता करने का प्रयास चल रहा था तो वहीं परिजन शव का अंतिम संस्कार करने चले गए थे।
