बरेली: दीक्षांत समारोह में उप मुख्यमंत्री ने कहा- रट्टामार नहीं, सीखने योग्य पढ़ाई करेंगे छात्र

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बरेली,अमृत विचार। नई शिक्षा नीति के तहत छात्र रट्टामार पढ़ाई नहीं, बल्कि सीखने योग्य पढ़ाई करेंगे। इस पढ़ाई से वह भारत के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे। यह बातें रुहेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री उत्तर प्रदेश प्रो. दिनेश शर्मा ने अपने ऑनलाइन संबोधन में कहीं। उन्होंने कोरोना …

बरेली,अमृत विचार। नई शिक्षा नीति के तहत छात्र रट्टामार पढ़ाई नहीं, बल्कि सीखने योग्य पढ़ाई करेंगे। इस पढ़ाई से वह भारत के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे। यह बातें रुहेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री उत्तर प्रदेश प्रो. दिनेश शर्मा ने अपने ऑनलाइन संबोधन में कहीं।

उन्होंने कोरोना महामारी के चलते विश्वविद्यालय और यूपी बोर्ड की परीक्षाओं को टालने की भी जानकारी दी। जिससे विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने राहत की सांस ली। दैनिक अमृत विचार ने गुरुवार के अंक में विश्वविद्यालय की परीक्षाओं पर खतरा मंडराने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी।

दिनेश शर्मा ने कहा कि भारत में शिक्षा जगत के इतिहास में सबसे बड़ा बदलाव किया गया है। मानव संसाधन प्रबंधन मंत्रालय के द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 पेश की गई है। इस शिक्षा नीति के तहत बहुत सारे क्षेत्र में छूट और अत्यधिक लाभ देने की कोशिश की गई है, जिससे छात्रों पर पढ़ाई का बोझ कम होगा। छात्र रट्टा मार पढ़ाई ना करके कुछ सीखने योग्य पढ़ाई करेंगे और भारत के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति में 2020 के तहत छात्रों को सबसे बड़ी छूट स्ट्रीम को चयन करने में दिया गया है। छात्र अगर चाहे तो साइंस स्ट्रीम का चयन कर आर्ट्स स्ट्रीम की भी पढ़ाई कर सकते हैं और आर्ट्स स्ट्रीम का चयन कर साइंस स्ट्रीम की भी पढ़ाई कर सकते हैं, इसके तहत स्ट्रीम चुनने की प्रक्रिया खत्म कर दी गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्रत्येक विषय को अतिरिक्त पाठ्यक्रम ना मानकर पाठ्यक्रम के रूप में ही देखा जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत खेल, नृत्य, मूर्ति कला, संगीत इत्यादि को भी शामिल किया गया है।

बहुस्तरीय प्रवेश एवं निकासी (मल्टीपल एंट्री एंड एग्जिट) के तहत वर्तमान में तीन या चार वर्ष के डिग्री कोर्स में यदि कोई छात्र किसी कारणवश बीच में पढ़ाई छोड़ देता है तो उसे डिग्री ना मिलने से इस पढ़ाई का कोई महत्व नहीं रहता था लेकिन अब इसमें एक वर्ष की पढ़ाई पूर्ण कर लेने के उपरांत छात्र को सर्टिफिकेट दो वर्ष की पढ़ाई पूर्ण करने पर डिप्लोमा तथा तीन या चार वर्ष पर डिग्री प्रदान की जाएगी।

नई शिक्षा नीति को अंगीकार करने वाला प्रथम विश्वविद्यालय है रुविवि
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत एनसीईआरटी पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की रूपरेखा के अनुसार तैयार करेगी। साथ ही शारीरिक शिक्षा को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में छात्र हित में नई शिक्षा नीति को अंगीकार करने वाला प्रथम विश्वविद्यालय है। किसी भी संस्थान के लिए उसके छात्र ही उसके ब्रांड एंबेसडर होते हैं। क्योंकि यही छात्र जब सफल होकर बड़ी-बड़ी इंडस्ट्री या प्रशासनिक पदों पर अपनी सेवा देते हैं तो कहीं ना कहीं उस संस्थान को भी उसकी सफलता के साथ याद किया जाता है।

शिक्षकों की गुणवत्ता के लिए छात्रों का फीडबैक जरूरी: प्रो. रविकांत
एमजेपी रूहेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में विशिष्ठ अतिथि एम्स ऋषिकेश के निदेशक पदमश्री डा. रविकांत ने कहा कि प्रत्येक दो वर्ष में विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में बदलाव होना चाहिए। इस बदलाव से ही आगे बढ़ सकते हैं। पांच साल तक बदलाव न होने पर पाठ्यक्रम काम का नहीं रहता है। उन्होंने शिक्षकों की गुणवत्ता जांचने के लिए भी छात्रों की फीडबैक को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने विदेशों में पढ़ाई के स्तर से आर्थिक स्थिति की बढ़ोतरी का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी के साथ लगातार कंधे से कंधा मिलाकर चलना अनिवार्य है। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता पर भी बल दिया और छात्रों एवं शिक्षकों के बीच परस्पर सहयोग पर भी बल दिया।

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