जिला कारागार में त्योहारों को लेकर उत्साह, 550 बंदी रख रहे माता के व्रत, 700 का है रोजा

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मुरादाबाद, अमृत विचार। जिला कारागार में इन दिनों कौमी एकता का अद्भुत माहौल बना हुआ है। नवरात्र और रमजान का महीना एक साथ पड़ने से यहां की फिजा में भक्ति और अकीदत की पावन बयार बहने लगी है। हिंदू कैदी जहां माता रानी के उपवास रखकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं, वहीं मुस्लिम बंदी रोजे रखकर …

मुरादाबाद, अमृत विचार। जिला कारागार में इन दिनों कौमी एकता का अद्भुत माहौल बना हुआ है। नवरात्र और रमजान का महीना एक साथ पड़ने से यहां की फिजा में भक्ति और अकीदत की पावन बयार बहने लगी है। हिंदू कैदी जहां माता रानी के उपवास रखकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं, वहीं मुस्लिम बंदी रोजे रखकर इबादत में डूबे हुए हैं। कारागार का स्टाफ भी ऐसे में इन लोगों को आवश्यक सुविधायें उपलब्ध करवा रहा है।

धर्म-जाति के नाम पर उन्माद फैलाने और कत्लेआम करने वाले भी इस मौके पर एकता का अनूठा परिचय दे रहे हैं। न जाति एक है, न मजहब और न खून का रिश्ता। सबकी इबादत अलग है और मान्यताये भी। लेकिन धर्म को लेकर यहां कोई फसाद नहीं। न तो ‘राम’ के नवरात्र व्रत पर ‘रहीम’ को कोई ऐतराज है, न ही ‘रहीम’ की नमाज और रमजान से ‘राम’ को कोई दिक्कत। धर्मों के मिलन का अद्भुत संगम यहां पर नजर आ रहा है। दिन निकलने के साथ ही सभी की दिनचर्या की शुरुआत अपने-अपने धर्म के हिसाब से पूजा और इबादत से होती है। जेल प्रशासन भी उनके खान-पान का विशेष ध्यान रख रहा है।

जुर्म की दुनिया में आकर भी आस्था से नहीं भटके
मंगलवार को माता के नवरात्र शुरू हो गए, जबकि बुधवार से रमजान के पाक माह की शुरुआत हुई। ये दोनों ऐसे मौके हैं जो हिंदू व मुस्लिम समुदाय के लोगों की आस्था से जुड़े हैं। इस मौके पर जहां हिंदू समाज के लोग उपवास रखकर नौ दिन तक पूजा-अर्चना करते हैं, वहीं मुस्लिम समुदाय के लोग एक माह तक अल्लाह की इबादत में रहते हैं। तमाम ऐसे भी लोग हैं जो किन्हीं कारणों से जरायम की दुनिया में आ गए। लेकिन, अपने धर्म को नहीं भूले। ऐसे ही कुछ लोग जेल में अपने दिन बिता रहे हैं। लेकिन, आस्था से पीछे नहीं हट रहे।

550 बंदी रख रहे माता के व्रत, 700 का रोजा
मौजूदा समय में जिला कारागार में करीब तीन हजार से अधिक बंदी हैं। उनमें से 550 बंदी माता के उपवास रख रहे हैं तो करीब 700 बंदी नियमित रोजा रख रहे हैं। मुस्लिम धर्म के लोग बैरक में बैठकर इबादत करते हैं तो हिंदू समाज के लोग जेल परिसर में खड़े पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर पूजा अर्चना करते हैं। खासबात यह है कि किसी को न तो माता के जयकारों से एतराज, न ही अजान से। दोनों समुदाय के लोग आपस में मिलकर अपनी-अपनी पूजा व इबादत कर रहे हैं।

हिंदू आलू से व्रत तो मुस्लिम खजूर से खोल रहे रोजा
इस मौके पर जेल प्रशासन भी दोनों धर्म के लोगों के खान-पान का विशेष ध्यान रख रहा है। जेल अफसरों की मानें तो व्रत रखने वालों को आधा किलो आलू, फल, दूध और चीनी समेत अन्य व्रत का सामान दिया जा रहा है। वहीं रोजा रखने वालों को खजूर, पाव रोटी, नीबू, चीनी और दही समेत अन्य सामान उपलब्ध कराया जा रहा है।

जेलर मृत्युजंय पांडेय ने कहा कि दोनों धर्म के लोगों की आस्था व इबादत का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। जेल प्रशासन उनके खानपान को लेकर संजीदा है। प्रयास किया जा रहा है कि व्रत व रोजा रखने वालों को कोई परेशानी न हो।

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