मुरादाबाद: कोरोना बन रहा काल, बच्चों के स्वास्थ्य का ऐसे रखें ध्यान
मुरादाबाद, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने खतरे को और बढ़ा दिया है। जिस तेजी के साथ ये लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है, उससे जरूरी है कि सभी सतर्क हो जाएं और खुद को इस वायरस से बचाएं। इस साल कोरोना ने एक और बड़ी चिंता बच्चों को लेकर बढ़ा …
मुरादाबाद, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने खतरे को और बढ़ा दिया है। जिस तेजी के साथ ये लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है, उससे जरूरी है कि सभी सतर्क हो जाएं और खुद को इस वायरस से बचाएं। इस साल कोरोना ने एक और बड़ी चिंता बच्चों को लेकर बढ़ा दी है। सूरत में तीन दिन के नवजात की मौत के बाद अभिभावकों को और सतर्क होने की जरूरत है।
प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण और उनके स्वभाव को देखते हुए वायरस से सुरक्षित रखना माता-पिता के लिए चुनौती जरूर होगा, पर ऐसा कर पाना नामुमकिन नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बच्चों की सेहत को लेकर ज्यादा गंभीर होने और सतर्क रहने की सलाह दी है। जिले में अब तक जीरो से 10 साल तक के लगभग 500 बच्चे इसकी चपेट में आ चुके हैं।
केस-1
चिकित्सक का बेटा संक्रमित
दिल्ली के चिकित्सक का सात साल का बेटा संक्रमित हो गया। वह अपनी मौसी के घर आवास विकास में रहता है। उसके मम्मी-पापा की रिपोर्ट दिल्ली में ही पाजिटिव आई थी। उस वक्त वह वहां पर ही था। मुरादाबाद आने के बाद जब उसे बुखार आया तो फिर की गई कोरोना जांच में इस संक्रमण की पुष्टि हो गई।
केस-2
यूएई जा रहा परिवार संक्रमित
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जा रहा परिवार भी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गया। दंपति के साथ उनके दो साल की बच्ची व सात साल का बेटा भी इस वायरस की चपेट में आ गए हैं। इसके चलते उन्हें यात्रा रद करनी पड़ी। बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर परिवार चिंतित है।
केस-3
संक्रमित बच्ची को पिलाया गिलोय का जूस
लाइनपार प्रेम नगर की रहने वाली 13 साल की बच्ची की रिपोर्ट कोरोना पाजिटिव आ गई। लगातार खांसी आने के कारण उसने जांच कराई थी। जांच में उसके संक्रमित मिलने पर परिवार घबरा गया। बच्ची को गिलोय का जूस पिलाया, जिसके बाद उसकी खांसी रुक गई।
केस-4
एक साल का बच्चा आया चपेट में
कांठ के एक सोसाइटी होम में रहने वाले परिवार में एक साल का बच्चा कोरोना वायरस की चपेट में आ गया। बताया जाता है कि इस परिवार को प्रदेश के बाहर जाना था। जांच कराई तो मासूम की रिपोर्ट में वायरस की पुष्टि हो गई।
बच्चों को क्यों है ज्यादा खतरा
नटखट कहे जाने वाले बच्चों को नियंत्रण में रखना मुश्किल होता है। बीमारी को वे उतनी गंभीरता से नहीं लेते हैं। नियमित तौर पर मास्क लगाना, शारीरिक दूरी का ख्याल रखना और बाहरी चीजों के सेवन से खुद को बचाना उनके लिए मुश्किल होता है। बाल रोग विशेषज्ञ डा. वीर सिंह बताते हैं कि इस स्थिति में वायरस को मौका रहता है। इसीलिए बच्चों को यह वायरस जल्द अपनी चपेट में ले लेता है। उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, जो तबीयत ज्यादा खराब हो जाने का कारण बन सकती है।
एमआईएससी का शिकार हो सकते हैं बच्चे
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डा. वीर सिंह बताते हैं कि कई बच्चों में कोरोना वायरस की वजह से बेहद गंभीर और खतरनाक जटिलता भी देखने को मिल रही है। इसे मल्टीसिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम इन चिल्ड्रेन (एमआईएससी) कहते हैं। इसमें हृदय, फेफड़े, किडनी, ब्रेन, स्किन, पाचन से जुड़े अंग या आंखों में इन्फ्लेमेशन की समस्या हो सकती है।
सुपरस्प्रेडर हो सकते हैं बच्चे
उनका कहना है कि बच्चे सुपरस्प्रेडर हो सकते हैं, यानी वे दूसरे बच्चों और वयस्कों को तेजी से संक्रमित कर सकते हैं। कोरोना की दूसरी लहर में बिल्कुल उल्टा ट्रेंड देखने को मिल रहा है। पिछले साल जहां अधिकतर बच्चे एसिम्प्टोमैटिक थे, यानी उनमें कोई लक्षण नहीं दिख रहे थे। वहीं, इस साल कोरोना की दूसरी लहर में बच्चों में पहले लक्षण दिख रहे हैं। बच्चों से वयस्कों में इंफेक्शन फैल रहा है। लिहाजा बच्चों में अगर ये लक्षण दिखें तो इन्हें नजरअंदाज न करें।
-बुखार
-सर्दी-जुकाम
-सूखी खांसी
-दस्त
-उल्टी आना
-भूख न लगना
-सही से खाना न खाना
-थकान महसूस होना
-शरीर पर रैशेज (चकत्ते) दिखना
-सांस लेने में दिक्कत महसूस होना
इस तरह रखें ख्याल
-बच्चों की इच्छा और पसंद के साथ अपनाएं बचाव
-बच्चों को कार्टून प्रिंट के मास्क पहनाएं
-बच्चों को बाहर न खेलने दें
-बाहर से कोई भी आए तो पहले सेनिटाइजर का प्रयोग करें
-अच्छे से हाथ पैर धोएं, जूते चप्पल कमरे से दूर उतारें
-बच्चों को उनके पास न जाने दें
-कोरोना की पुष्टि होने पर यदि वह बच्चा है तो पूरी तरह आइसोलेट रखें
-बाकी सदस्यों से अलग बेडरूम और बाथरूम की व्यवस्था करें
-संक्रमित बच्चे की देखभाल करते वक्त माता-पिता डबल मास्क पहनें
-चिकित्सक की सलाह के अनुरूप उपचार करवाएं
