मुरादाबाद : पुलिसलाइन के आवासों पर ‘अवैध कब्जे’ बरकरार, जारी किए जा चुके हैं नोटिस
मुरादाबाद, अमृत विचार। दूसरों के मकानों से कब्जे हटवाने वाले पुलिस कर्मियों के आवासों पर खुद ‘अवैध कब्जे’ हो गए हैं। मकानों पर कब्जा करने वाले कोई और नहीं बल्कि खुद पुलिस कर्मी हैं। चौंक गए न! लेकिन यह हकीकत है। गैर जिलों में तबादला होने के बाद भी पुलिसकर्मी तो जिले से चले गए …
मुरादाबाद, अमृत विचार। दूसरों के मकानों से कब्जे हटवाने वाले पुलिस कर्मियों के आवासों पर खुद ‘अवैध कब्जे’ हो गए हैं। मकानों पर कब्जा करने वाले कोई और नहीं बल्कि खुद पुलिस कर्मी हैं। चौंक गए न! लेकिन यह हकीकत है। गैर जिलों में तबादला होने के बाद भी पुलिसकर्मी तो जिले से चले गए लेकिन उनके परिवार अब भी यहीं पर रह रहे हैं। साठगांठ करके पुलिस कर्मियों ने लाइन से एनओसी भी ले ली। जबकि नियमानुसार एनओसी तभी दी जाती है जब पुलिस कर्मियों पर जिले में किसी भी मद का पैसा बकाया नहीं होता है।
यही वजह है कि गैर जिलों से मुरादाबाद आने वाले पुलिस कर्मियों को किराए के मकानों में रहना पड़ रहा है। ऐसे पुलिस कर्मियों को चिन्हित कर उनको आवास खाली करने के लिए नोटिस भी जारी किए गए थे लेकिन हालात जस के तस हैं। अब ऐसे पुलिस कर्मियों को चिहि्ंत कर स्टैंडर्ड किराया वसूलने की तैयारी कर ली गई है।
बिना एनओसी के नहीं मिलती है सैलरी
नियमानुसार अगर कोई पुलिस कर्मी किसी जिले से तबादला होकर मुरादाबाद आता है तो पहले उसे पुलिस लाइन में आमद करानी पड़ती है। आमद के बाद पुलिस कर्मी जिस जिले से आता है वहां की पुलिस लाइन से मिलने वाली एनओसी(नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट) यहां की पुलिस लाइन में जमा करनी पड़ती है। एनओसी से साबित होता है कि संबंधित पुलिस कर्मी का उस जिले में पुलिस महकमे में कुछ भी बकाया नहीं हैं। अगर पुलिस कर्मी को उस जिले में सरकारी मकान मिला होता है तो उसका भी एनओसी में जिक्र होता है। बकाए के साथ ही आवास खाली करने के बाद भी उसको एनओसी मिलती है।
बिना आवास खाली किए हासिल कर ली एनओसी
अब बात करें हकीकत की तो पुलिस कर्मी अफसरों से साठगांठ कर बिना आवास खाली किए एनओसी हासिल कर लेते हैं। जिसके आधार पर पुलिस कर्मी गैर जिले में आमद करा लेते हैं और उनके परिवार अवैध तरीके से मकानों में बने रहते हैं। नतीजा बाहर से आने वाले पुलिस कर्मियों को सरकारी आवास नहीं मिल पाते हैं। मुरादाबाद जिले की बात करें तो पुलिस लाइन व थानों में बने 40 से अधिक आवासों में इसी तरह से पुलिस कर्मी रह रहे हैं। हालांकि ऐसे पुलिस कर्मियों से स्टैंडर्ड किराया वसूलने का प्रावधान है लेकिन हीला-हवाली के कारण ऐसा हो नहीं पाता है।
सम्भल व अमरोहा में लाइन न होने से बढ़ी मुश्किलें
मुरादाबाद मंडल में सम्भल व अमरोहा तो ऐसे जिले हैं जहां पर पुलिस लाइन तो है लेकिन भवन नहीं हैं। अस्थाई रूप टीन शेड आदि डालकर पुलिस लाइन संचालित की जा रही है। लिहाजा मुरादाबाद से इन जिलों में तबादले पर जाने वाले पुलिस कर्मी आवास नहीं छोड़ रहे हैं। जिसके पीछे पुलिस कर्मी इन जिलों में सरकारी आवास न होने का तर्क दे रहे हैं।
सम्भल व अमरोहा में पुलिस लाइन में भवन न होने के कारण समस्या बढ़ गई है। नोटिस जारी करने के बाद भी जिन्होंने आवास नहीं छोड़े हैं, उनसे स्टैंडर्ड किराया वसूलने की तैयारी कर ली गई है।
-इंद्रवीर सिंह, प्रतिसार निरीक्षक पुलिस लाइन मुरादाबाद
