बरेली: अब तक 205 मौतें, बदइंतजामी में फंसे 300 बेड अस्पताल के 18 वेंटिलेटर
बरेली, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण के फैलने से बरेली जनपद के हालात बेहद खराब हैं। सक्रिय संक्रमितों का आंकड़ा 11000 के पार पहुंच गया है। इसके साथ अब तक स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में दर्ज मौतों की संख्या भी 205 पहुंच गई। वैसे, श्मशान स्थलों पर संक्रमण से मरने वालों के शवों के पहुंचने की …
बरेली, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण के फैलने से बरेली जनपद के हालात बेहद खराब हैं। सक्रिय संक्रमितों का आंकड़ा 11000 के पार पहुंच गया है। इसके साथ अब तक स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में दर्ज मौतों की संख्या भी 205 पहुंच गई। वैसे, श्मशान स्थलों पर संक्रमण से मरने वालों के शवों के पहुंचने की संख्या की बात करें तो यही आंकड़ा से तीन गुना बढ़ जाएगा लेकिन स्वास्थ्य विभाग इन्हें संक्रमण से मरने वालों की श्रेणी में नहीं गिन रहा है। रेमडेसिविर इंजेक्शन और ऑक्सीजन को लेकर हा-हाकार मचा है।
300 बेड के मंडलीय कोविड अस्पताल में अव्यवस्था फैली है। पेड कोविड अस्पताल और निजी मेडिकल कॉलेजों के वेंटीलेटरों पर मरीज भेजे जा रहे हैं लेकिन सालभर से सरकारी 300 बेड अस्पताल के 18 वेंटिलेटर शोपीस बने हुए हैं। पिछले साल कोविड के दौरान पीएम केयर्स फंड से 10 वेंटिलेटर इस अस्पताल को मिले थे। आठ स्थानीय प्रशासन ने लाखों रुपये खर्च कर खरीदवाकर दिए थे, लेकिन संक्रमण के भयावह दौर में सरकारी वेंटिलेटरों को चलाने के लिए तकनीकी स्टाफ हायर नहीं किया गया। इससे ज्यादा बदइंतजामी और क्या हो सकती है।
इस तरफ न कमिश्नर, डीएम और न ही शहर विधायक व मेयर देख रहे हैं। जबकि राज्य सरकार ने स्पष्ट कह दिया है कि जरूरत पड़ने पर बाहर से डॉक्टर व तकनीकी स्टाफ हायर कर सकते हैं। सीएमओ डा. सुधीर कुमार गर्ग से वेंटिलेटर चालू कराने के संबंध में जब भी बात की गई, तब उनका रटा रटाया जबाव मिला कि शासन को तकनीकी स्टाफ की तैनाती के लिए पत्र लिख रहे हैं।
प्रतिदिन रेमडेसिविर कोविड अस्पतालों को मिल रहा तो क्यों मरीज से मंगा रहे
प्रशासनिक अधिकारी कह रहे हैं कि कोविड अस्पतालों में रेमडेसिविर इंजेक्शन जरूरत के हिसाब से प्रतिदिन दिया जा रहा है लेकिन कोविड अस्पताल मरीजों पर दबाव बनाकर इंजेक्शन मंगा रहे हैं। अपने प्रियजन की जान बचाने के लिए लोग 25 से 30 हजार रुपये में तक रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदकर दे रहे हैं।
300 और 400 रुपये में भरे जाने वाले छोटे-बड़े ऑक्सीजन के सिलेंडर भी शहर के कई स्थानों पर दो से पांच हजार रुपये तक में रिफिल किए जा रहे हैं। जनपद में इतना कुछ होने के बावजूद बरेली के प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा सिर्फ वर्चुअल बैठक कर कोविड इंतजामों की समीक्षा कर रहे हैं। जबकि फेसबुक, ट्वीटरों पर बेड, ऑक्सीजन के लिए लोग गुहार लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के हेल्पलाइन नंबर, कोविड कमांड कंट्रोल रूम से लेकर जनप्रतिनिधियों द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर पर सैकड़ों कॉल सिर्फ बेड, ऑक्सीजन व इंजेक्शन दिलाने की गुहार वाली आ रही हैं।
300 बेड अस्पताल के वेंटिलेटरों को संचालित कराने के लिए जिलाधिकारी और सीएमओ को निर्देश दिये हैं। वेंटिलेटर संचालित होने से गंभीर मरीजों की जान बचाने में काफी लाभ मिलेगा। सभी सीएमओ से ऑक्सीजन की किल्लत दूर करने के लिए मरीजों के अनुसार गैस की मांग भेजने के निर्देश दिये गए हैं। -आर रमेश कुमार, मंडलायुक्त
रेमडेसिविर इंजेक्शन के उपयोग की जानकारी सार्वजनिक करें डीएम
कोविड काल में अधिकारी हो या जनप्रतिनिधि। हर कोई पुराने ढर्रे से ही व्यवस्थाएं ठीक करने की कोशिश करते हैं। संक्रमण की भयावह स्थिति के बीच प्रभारी मंत्री एवं ऊर्जा व अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत मंत्री श्रीकान्त शर्मा की बात करें तो उन्होंने शनिवार दोपहर को बरेली की वर्चुअल समीक्षा की और जिलाधिकारी को रेमडेसिविर इंजेक्शन के उपयोग की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने के निर्देश दिए। कालाबाजारी की शिकायतों की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अन्य जीवन रक्षक दवाओं, ऑक्सीजन सिलेंडर व आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी पर प्रभावी अंकुश लगाने को भी।
होम आइसोलेशन वाले मरीजों को आइसोलेशन किट उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए। डीएम व सीएमओ से कहा कि होम आइसोलेशन तथा कोविड वार्ड में भर्ती मरीजों से बात करके यह जानने की कोशिश करें कि उन्हें सरकार द्वारा दी जा रही सुविधा मिल रही है या नहीं। ऑक्सीजन की मांग की ऑडिट करें।
माइक्रो कंटेनमेंट जोन में कोविड प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन कराएं। नगर आयुक्त व डीपीआरओ को अपने अधिकार क्षेत्रों में सैनेटाईजेशन कराने के निर्देश दिये। उपरोक्त दिशा-निर्देशों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या वर्चुअल बैठक कर धरातल की स्थिति को जाना जा सकता है। तब जब हर तरफ संक्रमण दहशत फैलाए हुए है।
